नई दिल्ली से ग्राउंड रिपोर्ट — भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के एक ताजा बयान के बाद बाजार में लॉन्ग टर्म कैपिटल गैन यानी एलटीसीजी और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी एसटीटी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। देश के आम निवेशकों और बड़े विश्लेषकों का मानना है कि सरकार इन दोनों करों के नियमों में बड़ा बदलाव कर सकती है। इस खबर के सामने आते ही दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों का उत्साह कई गुना बढ़ गया है और शेयरों की खरीदारी में तेजी देखी जा रही है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि अगर सरकार इन करों को पूरी तरह खत्म करती है या इसमें कोई बड़ी राहत देती है, तो इसका सीधा फायदा छोटे और मझोले निवेशकों को मिलेगा। एसबीआई रिसर्च ने भी अपनी हालिया रिपोर्ट में इस दिशा में सकारात्मक सुझाव दिए थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि शेयर बाजार को बढ़ावा देने के लिए कर के बोझ को कम करना बेहद जरूरी है। वित्त मंत्री के इस नए संकेत ने उन उम्मीदों को पंख लगा दिए हैं, जिन पर पिछले कुछ महीनों से बाजार की नजर टिकी हुई थी।
वित्त मंत्री के बयान से रॉकेट बना शेयर बाजार
वित्त मंत्री के बयान के आते ही बुधवार को शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी दोनों ही हरे निशान के साथ बंद हुए। कारोबार के दौरान निफ्टी ने 22,700 के आंकड़े को पार कर लिया, जिससे निवेशकों की संपत्ति में एक ही दिन में भारी इजाफा हुआ। खासतौर पर आईटी और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में तगड़ी लिवाली देखने को मिली। बाजार के एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेशकों का यह भरोसा इस बात का सबूत है कि वे कर प्रणाली में सरलीकरण चाहते हैं।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि सरकार एसटीटी और एलटीसीजी को लेकर कोई लचीला रुख अपनाती है, तो विदेशी संस्थागत निवेशक भी भारत की तरफ और तेजी से आकर्षित होंगे। पिछले कुछ समय से घरेलू निवेशकों ने ही शेयर बाजार की नब्ज को थाम रखा है, लेकिन कर राहत मिलने से बाजार का दायरा और अधिक विस्तृत हो जाएगा। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, अभी इस पर अंदरूनी स्तर पर विचार किया जा रहा है और आम बजट से पहले इस पर कोई ठोस घोषणा सामने आ सकती है।
एसबीआई रिसर्च और उद्योग जगत की मांगें
कुछ महीने पहले एसबीआई रिसर्च की एक विशेष रिपोर्ट में भी सरकार से यह अपील की गई थी कि शेयर बाजार में निवेश को बढ़ावा देने के लिए करों की समीक्षा की जानी चाहिए। रिपोर्ट में तर्क दिया गया था कि ज्यादा टैक्स होने की वजह से कई बार छोटे निवेशक लंबी अवधि के निवेश से दूर हो जाते हैं। उद्योग जगत के कई बड़े दिग्गजों ने भी वित्त मंत्री से मुलाकात कर एलटीसीजी को हटाने की वकालत की थी। उनका मानना है कि वैश्विक बाजारों में टिके रहने के लिए भारतीय पूंजी बाजार को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना होगा।
मैदानी स्तर पर छोटे निवेशकों का कहना है कि अगर सरकार वाकई यह कदम उठाती है, तो यह मध्यम वर्ग के लिए बहुत बड़ा तोहफा होगा। म्यूचुअल फंड और सीधे शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले लोग अब सरकार के अगले आधिकारिक कदम का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, जानकारों का यह भी सुझाव है कि निवेशकों को केवल अफवाहों के आधार पर अपनी रणनीति नहीं बनानी चाहिए, बल्कि सही और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर ही निवेश का फैसला करना चाहिए।
निवेशकों के लिए आगे की राह और बाजार का मिजाज
फिलहाल देश भर के शेयर बाजारों में सकारात्मक माहौल बना हुआ है और हर कोई आने वाले नीतिगत बदलावों पर नजर गड़ाए हुए है। द फ्रीलान्स की टीम द्वारा जुटाई गई जानकारी के अनुसार, बाजार नियामक और वित्त मंत्रालय के बीच इस मुद्दे पर लगातार मंथन चल रहा है। जैसे-जैसे बजट का समय नजदीक आएगा, इस दिशा में स्थिति और अधिक स्पष्ट होती जाएगी। तब तक के लिए निवेशकों को धैर्य रखने और बाजार के उतार-चढ़ाव को समझकर ही आगे बढ़ने की सलाह दी जा रही है।




