नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय शेयर बाजार में आज सुबह से ही भारी बिकवाली का दौर देखने को मिला। बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों औंधे मुंह गिर पड़े। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1100 अंकों से ज्यादा लुढ़क गया, जिससे निवेशकों में अफरा-तफरी मच गई। बाजार की इस अचानक आई बड़ी गिरावट से निवेशकों के करीब 8 लाख करोड़ रुपये पलभर में स्वाहा हो गए। मेटल और हेल्थकेयर सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई है, जिससे निवेशकों को तगड़ा झटका लगा है।
विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण बाजार पर यह दबाव बना है। पिछले कई हफ्तों से बाजार लगातार फिसलता जा रहा है और मंदी के करीब पहुंच रहा है। आज की इस बड़ी गिरावट ने पिछले कई हफ्तों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। छोटे और मझोले निवेशकों की पूंजी डूबने से बाजार का माहौल पूरी तरह से डरावना हो गया है। जानकारों का कहना है कि अनिश्चितता का यह माहौल अभी कुछ और दिन बना रह सकता है।
बाजार में अचानक आई इस गिरावट के बड़े कारण
शेयर बाजार के जानकारों के अनुसार इस बड़ी गिरावट के पीछे कई मुख्य वजहें हैं। सबसे बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार भारतीय बाजारों से अपना पैसा निकालना है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर महंगाई के आंकड़े और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव ने भी निवेशकों के भरोसे को कम किया है। बाजार के तकनीकी संकेत भी लंबे समय से कमजोर बने हुए थे, जिससे निवेशकों ने बिना सोचे-समझे बिकवाली शुरू कर दी।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निफ्टी और सेंसेक्स लगातार हफ्तों से नीचे की तरफ जा रहे हैं। आज की बिकवाली ने आग में घी का काम किया है। पिछले कुछ महीनों में शेयर बाजार ने जो ऊंचाई हासिल की थी, वह अब तेजी से नीचे आ रही है। बाजार के इस रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में भी सतर्क रहने की बहुत जरूरत है। छोटे निवेशकों को इस समय बिना किसी ठोस सलाह के नए निवेश से बचने की हिदायत दी जा रही है।
लगातार कमजोर हो रहा है बाजार का सेंटिमेंट
दलाल स्ट्रीट पर इस समय मायूसी का माहौल छाया हुआ है। पिछले आठ हफ्तों से बाजार लगातार गिर रहा है, जिससे निवेशकों का धैर्य टूटने लगा है। बाजार के जानकारों का मानना है कि यह गिरावट सिर्फ एक दिन की नहीं है, बल्कि इसके पीछे लंबी अवधि का नकारात्मक रुझान है। कई बड़े शेयरों के भाव औंधे मुंह गिर चुके हैं और वे अपनी समर्थन सीमा को तोड़कर नीचे आ गए हैं। इस स्थिति में निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की नए सिरे से समीक्षा करनी पड़ रही है।
आम निवेशकों के मन में अब यह बड़ा सवाल है कि क्या उनका पैसा सुरक्षित है। वित्तीय सलाहकारों की मानें तो घबराहट में आकर अपने अच्छे शेयरों को कम दाम पर न बेचें। बाजार में उतार-चढ़ाव उसका स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन इस तरह की बड़ी गिरावट से संभलने में समय लग सकता है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे लंबी अवधि के नजरिए से ही पैसा लगाएं और हर गिरावट पर आँख बंद करके खरीदारी न करें।
आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल
आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की चाल पूरी तरह से वैश्विक संकेतों और घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुकती है और कंपनियों के तिमाही नतीजे बेहतर आते हैं, तो बाजार में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए तुरंत किसी बड़ी तेजी की उम्मीद करना मुश्किल है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे पूरी सावधानी बरतें और बाजार की हर खबर पर पैनी नजर रखें ताकि किसी भी बड़े नुकसान से बचा जा सके।



