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ममता बनर्जी का मेडिकल रिकॉर्ड लीक होने पर घमासान: अस्पतालों को कानूनी नोटिस भेजकर उठाए बड़े सवाल

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान ममता बनर्जी के पैर में लगी चोट का मुद्दा गरमा गया है। मेडिकल रिकॉर्ड सार्वजनिक होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ने अस्पतालों को कानूनी नोटिस भेजा है, जिस पर राज्य में नया सियासी विवाद शुरू हो गया है।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•5 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•29
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ममता बनर्जी का मेडिकल रिकॉर्ड लीक होने पर घमासान: अस्पतालों को कानूनी नोटिस भेजकर उठाए बड़े सवाल
📷 ममता बनर्जी का मेडिकल रिकॉर्ड लीक होने पर घमासान: अस्पतालों को कानूनी नोटिस भेजकर उठाए बड़े सवाल — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मेडिकल दस्तावेज सार्वजनिक होने के बाद SSKM समेत तीन अस्पतालों को कानूनी नोटिस भेजा है।
  • मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया था कि 2021 के चुनाव के दौरान ममता के पैर में कोई फ्रैक्चर नहीं हुआ था, जिसके बाद यह विवाद खड़ा हुआ।
  • टीएमसी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश और उपचुनाव को प्रभावित करने का प्रयास बताया है।

ममता बनर्जी की मेडिकल रिपोर्ट लीक होने पर गरमाई सियासत

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर से साल 2021 के विधानसभा चुनावों की यादें ताजा हो गई हैं, लेकिन इस बार मामला किसी राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर सीधे चिकित्सकीय गोपनीयता और कानूनी नोटिस तक पहुंच चुका है। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के निजी मेडिकल रिकॉर्ड बिना किसी पूर्व अनुमति के सार्वजनिक किए जाने के बाद गलियारों में भूचाल आ गया है। इस खुलासे के बाद से राजनीतिक तापमान काफी बढ़ गया है और दोनों प्रमुख दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए ममता बनर्जी के कानूनी सलाहकारों ने संबंधित अस्पतालों के प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को कड़े शब्दों में नोटिस थमाया है। नोटिस में यह सवाल उठाया गया है कि आखिर एक व्यक्ति विशेष के गोपनीय स्वास्थ्य दस्तावेजों को किस अधिकार के तहत सार्वजनिक किया गया, जबकि ऐसा करना चिकित्सकीय आचार संहिता और निजता के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।

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साल 2021 के चुनावी दिनों की चोट पर छिड़ी नई बहस

इस पूरे विवाद की जड़ मार्च 2021 में हुए नंदीग्राम विधानसभा चुनाव के दौरान घटी उस घटना से जुड़ी है, जब प्रचार अभियान के बीच ममता बनर्जी के बाएं पैर में गंभीर चोट आई थी। उस समय तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने दावा किया था कि कुछ अज्ञात लोगों द्वारा दिए गए धक्के के कारण वह अपनी कार के खुले दरवाजे से टकरा गईं थीं, जिससे उनके पैर में फैक्चर और लिगामेंट की गंभीर समस्या हो गई थी। इस घटना के बाद उन्हें कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था और लंबे समय तक उन्होंने व्हीलचेयर पर बैठकर ही पूरे राज्य में धुआंधार चुनाव प्रचार किया था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उस चुनाव में ममता बनर्जी की इस चोट और व्हीलचेयर वाले कैंपेन ने जनता के बीच एक भावनात्मक माहौल तैयार करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। चुनाव के परिणामों में टीएमसी को प्रचंड बहुमत हासिल हुआ था और पार्टी ने शानदार जीत दर्ज करते हुए सत्ता में वापसी की थी, जबकि भारतीय जनता पार्टी को निर्धारित सीटों से संतोष करना पड़ा था।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के दावों ने बढ़ाई हलचल

हाल ही में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक सार्वजनिक मंच से कुछ मेडिकल दस्तावेजों का हवाला देते हुए एक विस्फोटक दावा किया था। उनका कहना था कि अस्पताल के मूल रिकॉर्ड की जांच करने से यह पता चलता है कि उस समय ममता बनर्जी के पैर में किसी भी प्रकार का कोई फ्रैक्चर या हड्डी खिसकने जैसी चिकित्सीय पुष्टि नहीं हुई थी। मुख्यमंत्री ने इसे एक बड़ा राजनीतिक प्रपंच बताते हुए कहा था कि इस मामले की गहराई से जांच कराई जाएगी ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।

शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम उपचुनाव प्रचार के दौरान तंज कसते हुए यह तक कह दिया कि उस घटना को आधार बनाकर जनता की सहानुभूति बटोरी गई थी। उन्होंने चुनाव परिणामों के बाद इस विषय पर और अधिक खुलासे करने की बात कही है, जिसके बाद से राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि आगे क्या बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

अस्पतालों को भेजा गया कानूनी नोटिस और तीखे सवाल

विवाद बढ़ने के तुरंत बाद ममता बनर्जी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए एसएसकेएम अस्पताल के निदेशक, बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज के चिकित्सा अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ चिकित्सकों को औपचारिक कानूनी नोटिस भिजवा दिया। इस नोटिस में साफ तौर पर यह पूछा गया है कि क्या इन दस्तावेजों को सार्वजनिक करने के लिए किसी अदालत का आदेश प्राप्त किया गया था या फिर इसके पीछे कोई प्रशासनिक मिलीभगत थी।

"बिना किसी की कानूनी अनुमति और सहमति के निजी चिकित्सा दस्तावेजों को सार्वजनिक करना न केवल मेडिकल एथिक्स के खिलाफ है, बल्कि यह एक खतरनाक मिसाल भी पेश करता है जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।" — कानूनी सलाहकार, टीएमसी

नोटिस में यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि जो दस्तावेज मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर दिखाए गए हैं, वे मूल मेडिकल रिकॉर्ड थे या उनमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ की गई थी। इस पूरे प्रकरण की एक प्रति राज्य के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को भी सूचनार्थ भेजी गई है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर भी दबाव बढ़ गया है।

तृणमूल कांग्रेस का पलटवार और भविष्य की राजनीतिक दिशा

तृणमूल कांग्रेस ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सभी दावों को खारिज करते हुए इसे पूरी तरह से आधारहीन और राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह सब कुछ चल रहे उपचुनावों के परिणामों को प्रभावित करने और जनता का ध्यान भटकाने के लिए गढ़ा गया एक हथकंडा है। टीएमसी का यह भी तर्क है कि गंभीर चोट के बाद अस्पताल में डॉक्टरों की देखरेख में इलाज हुआ था, जिसके सभी आधिकारिक प्रमाण उस समय भी मौजूद थे।

जैसे-जैसे मामले की परतें खुल रही हैं, यह विवाद और गहराता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक सफाई सामने आती है या फिर कानूनी लड़ाई के जरिए इस रहस्य से पूरी तरह पर्दा उठ पाता है।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
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सत्यापित संपादकीय डेस्क

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द फ्रीलांस की राष्ट्रीय संपादकीय डेस्क देश की राजनीति, संसद, नीतिगत फैसलों, केंद्रीय योजनाओं और जनसरोकार से जुड़े बड़े मुद्दों पर 24/7 निष्पक्ष, तथ्यपरक और खोजी रिपोर्टिंग करती है। यह टीम दोहरे तथ्य-सत्यापन के कठोर सिद्धांतों का पालन करती है।

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