भारतीय शेयर बाजार में इतिहास रचने के लिए एक और बड़ा नाम पूरी तरह तैयार हो चुका है। देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम और डिजिटल सेवा प्रदाता कंपनी रिलायंस जियो अब अपने बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ को बाजार में उतारने जा रही है। पिछले दो दशकों में रिलायंस समूह की किसी भी कंपनी का यह पहला आईपीओ होगा, जिसे लेकर देश-दुनिया के निवेशकों में जबरदस्त कौतूहल और उत्साह देखा जा रहा है। बाजार के जानकारों और विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मेगा इश्यू इसी महीने की 21 तारीख को निवेश के लिए खुल सकता है।
जियो प्लेटफॉर्म्स का यह सार्वजनिक प्रस्ताव भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ के रूप में दर्ज होने की पूरी संभावना है। इससे पहले हुंडई मोटर इंडिया के आईपीओ ने बाजार में बड़ा रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन जियो का यह नया इश्यू उस आंकड़े को भी पीछे छोड़ने की पूरी ताकत रखता है। कंपनी इस आईपीओ के माध्यम से लगभग 37,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम पूंजी जुटाने की तैयारी में है। खास बात यह है कि यह पूरा निर्गम नए शेयरों यानी फ्रेश इश्यू पर आधारित होगा, जिसका सीधा मतलब है कि इससे मिलने वाली सारी राशि कंपनी के विकास कार्यों और वित्तीय सुदृढ़ीकरण में लगाई जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोड शो का सफल आयोजन
आईपीओ की घोषणा से पहले कंपनी ने अपनी वैश्विक पहुंच और निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए दुनिया के कई प्रमुख वित्तीय केंद्रों में बड़े पैमाने पर रोड शो आयोजित किए। अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, दुबई, सिंगापुर और हांगकांग जैसे बड़े वैश्विक बाजारों में निवेशकों को इस आईपीओ के बारे में जानकारी दी गई। इन सभी महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय दौरों की अगुवाई खुद जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रबंध निदेशक और रिलायंस जियो के अध्यक्ष आकाश अंबानी के साथ-साथ रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड की कार्यकारी निदेशक ईशा अंबानी ने की।
सूत्रों के अनुसार, इन विदेशी रोड शो के दौरान वैश्विक संस्थागत निवेशकों और बड़े फंड हाउसों ने जियो की बिजनेस मॉडल, एआई क्षमताओं, क्लाउड सेवाओं और एंटरप्राइज नेटवर्क में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। इसी मजबूत वैश्विक प्रतिक्रिया के आधार पर बैंकिंग विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी का शुरुआती मूल्यांकन या उद्यम मूल्य 143 से 146 अरब डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में करीब 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक के स्तर पर पहुंच सकता है। विदेशी निवेशकों के इस रुख से घरेलू बाजार में भी छोटे और बड़े निवेशकों का आत्मविश्वास काफी बढ़ गया है।
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ग्रे मार्केट में शानदार शुरुआत और जीएमपी का गणित
मुख्य बाजार में आधिकारिक तौर पर दस्तक देने से पहले ही ग्रे मार्केट में जियो के शेयरों की गूंज सुनाई देने लगी है। अनौपचारिक बाजार यानी ग्रे मार्केट में इस आईपीओ को लेकर निवेशकों में गजब की दीवानगी है। उपलब्ध बाजार रिपोर्टों के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी उछलकर 151 से 153 रुपये के दायरे में पहुंच गया है। मजबूत जीएमपी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जब यह शेयर बाजार में लिस्ट होगा, तो निवेशकों को शानदार लिस्टिंग गेन मिलने की पूरी उम्मीद है।
बाजार चर्चाओं के अनुसार, कंपनी इस आईपीओ के लिए 1350 रुपये से 1450 रुपये प्रति शेयर के बीच का प्राइस बैंड तय कर सकती है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो लिस्टिंग के बाद कंपनी का कुल मार्केट वैक्यूएशन 12.40 लाख करोड़ रुपये से 13.40 लाख करोड़ रुपये के बीच पहुंच सकता है। निवेशकों के लिए यह पैसा लगाने का एक स्वर्णिम अवसर माना जा रहा है, क्योंकि कंपनी की वित्तीय स्थिति और डिजिटल बाजार में उसकी पैठ बेहद मजबूत है।
"जियो प्लेटफॉर्म्स का यह सार्वजनिक निर्गम न केवल रिलायंस समूह के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि भारतीय शेयर बाजार की गहराई और क्षमता को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान देगा। इस इश्यू से मिलने वाले फंड का एक बड़ा हिस्सा कंपनी के कर्ज को कम करने में भी इस्तेमाल किया जाएगा।" — वित्तीय बाजार विश्लेषक एवं बैंकिंग सूत्र
महत्वपूर्ण तिथियां और निवेशकों के लिए आगे की रूपरेखा
आईपीओ की संभावित समय सारिणी को लेकर भी कई अहम जानकारियां सामने आ चुकी हैं। बाजार सूत्रों के मुताबिक, बड़े संस्थागत और एंकर निवेशकों के लिए यह बोली प्रक्रिया अक्टूबर के मध्य में, संभवतः दशहरा से ठीक पहले शुरू हो सकती है। इसके बाद मुख्य सार्वजनिक निर्गम 21 अक्टूबर को आम जनता और खुदरा निवेशकों के लिए खुलने की उम्मीद है। निवेशक इस आईपीओ में 23 अक्टूबर तक अपनी बोलियां लगा सकेंगे, जो इस पर दांव लगाने का अंतिम दिन हो सकता है।
शेयरों के आवंटन यानी अलॉटमेंट की प्रक्रिया अक्टूबर के आखिरी सप्ताह तक पूरी होने की संभावना है, और इसी महीने के अंत तक जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर आधिकारिक रूप से सूचीबद्ध हो सकते हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास वर्तमान में जियो प्लेटफॉर्म्स की लगभग 66.4 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि मेटा और गूगल जैसी तकनीकी दिग्गज कंपनियां भी इसमें रणनीतिक हिस्सेदार हैं।
कर्ज मुक्ति और भविष्य की डिजिटल रणनीति
रिलायंस जियो द्वारा इस आईपीओ के जरिए जुटाई जाने वाली भारी रकम का एक बड़ा हिस्सा कंपनी पर मौजूद कर्ज को चुकाने में उपयोग किए जाने की योजना है। कंपनी अपने टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर को और अधिक उन्नत बनाने के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5G एडवांस सर्विसेज, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल एंटरप्राइज सॉल्यूशंस पर अपना फोकस तेजी से बढ़ा रही है। हाल के वर्षों में भारत में डेटा क्रांति लाने वाली इस कंपनी ने देश के कोने-कोने तक इंटरनेट की पहुंच को सुगम बनाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि जियो का यह इश्यू पूरी तरह से नए शेयरों पर आधारित है, इसलिए इससे मिलने वाला शत-प्रतिशत फंड सीधे कंपनी के खातों में जाएगा। इससे कंपनी की बैलेंस शीट और अधिक मजबूत होगी तथा भविष्य के बड़े तकनीकी प्रोजेक्ट्स को वित्तपोषित करने में आसानी होगी। यही वजह है कि खुदरा निवेशकों से लेकर बड़े म्यूचुअल फंड्स तक सभी इस ऐतिहासिक आईपीओ पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं और सही समय पर आवेदन करने के लिए अपनी वित्तीय तैयारियां पूरी कर रहे हैं।







