फिल्मी पर्दे पर अपनी अदायगी और खूबसूरती से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली दिग्गज अभिनेत्री मनीषा कोइराला आज भी फिटनेस के मामले में नई पीढ़ी की अभिनेत्रियों को कड़ी टक्कर देती हैं। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को सफलतापूर्वक मात देने के बाद उन्होंने अपनी जीवनशैली में जो सकारात्मक बदलाव किए, वे वाकई अनुकरणीय हैं। आज 56 वर्ष की आयु में भी वह बेहद ऊर्जावान, फिट और सक्रिय नजर आती हैं। उनका मानना है कि यदि लंबी और स्वस्थ जिंदगी चाहिए, तो अपनी सेहत के प्रति लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
बढ़ती उम्र के साथ अक्सर लोग जोड़ों के दर्द, थकान और ऊर्जा की कमी की शिकायत करने लगते हैं, लेकिन मनीषा इन सब से कोसों दूर हैं। उनकी इस बेहतरीन शारीरिक स्थिति के पीछे एक बेहद अनुशासित दिनचर्या और सकारात्मक सोच छिपी है। आइए जानते हैं कि वह कौन से फिटनेस नियम हैं जिन्हें अपनाकर मनीषा कोइराला इस उम्र में भी इतनी फिट और तंदुरुस्त बनी हुई हैं।
मोबिलिटी और स्ट्रेचिंग से रखती हैं जोड़ों को मजबूत
शरीर में लचीलापन बनाए रखने और जोड़ों की सेहत को दुरुस्त रखने के लिए मनीषा अपनी वर्कआउट डायरी में मोबिलिटी और स्ट्रेचिंग को सबसे ऊपर रखती हैं। मोबिलिटी एक्सरसाइज की मदद से उनके शरीर के जोड़ों का मूवमेंट बेहतर होता है, जिससे उठने-बैठने, झुकने या मुड़ने जैसी शारीरिक क्रियाएं बेहद आसान हो जाती हैं। इसके साथ ही, स्ट्रेचिंग करने से उनकी मांसपेशियों की जकड़न कम होती है और शरीर में रक्त का संचार सुचारू रूप से चलता है।
केवल लचीलेपन तक ही सीमित नहीं, बल्कि मांसपेशियों को मजबूत और टोन रखने के लिए वह स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का भी नियमित अभ्यास करती हैं। फिटनेस एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि बढ़ती उम्र में हड्डियों और मांसपेशियों की ताकत बनाए रखने के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग बेहद जरूरी होती है, जिसे मनीषा ने अपनी दिनचर्या का स्थायी हिस्सा बना लिया है।
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रोजाना योग और ध्यान से साधती हैं मानसिक संतुलन
शारीरिक फिटनेस के साथ-साथ मानसिक शांति और आत्मिक सुकून के लिए मनीषा कोइराला योग को बहुत अहम मानती हैं। वह हर रोज लगभग 40 मिनट तक योगासनों का अभ्यास करती हैं। योग के तुरंत बाद वह मेडिटेशन यानी ध्यान लगाती हैं, जिससे उनका फोकस और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है।
भागदौड़ भरी जिंदगी और मानसिक तनाव के बीच योग और ध्यान उन्हें मानसिक रूप से शांत और स्थिर रखते हैं। उनका मानना है कि जब तक आपका मन शांत और खुश नहीं रहेगा, तब तक आप शारीरिक रूप से भी पूरी तरह स्वस्थ महसूस नहीं कर सकते। योग से शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और आंतरिक अंगों की कार्यप्रणाली भी बेहतर होती है।
प्रकृति के बीच आउटडोर एक्टिविटीज का शौक
जिम की चार दीवारों के बाहर खुली हवा में समय बिताना मनीषा को बेहद पसंद है। जब भी उनके पास फुर्सत के पल होते हैं, वह ताजी हवा में वॉक करना या साइकिल चलाना पसंद करती हैं। ये दोनों ही गतिविधियां कार्डियोवस्कुलर हेल्थ के लिए वरदान मानी जाती हैं।
साइकिलिंग और वॉकिंग करने से न सिर्फ मेटाबॉलिज्म तेज होता है, बल्कि कैलोरी भी तेजी से बर्न होती है। प्रकृति के सान्निध्य में बिताए गए ये पल उनके मूड को तरोताजा रखते हैं और उन्हें मानसिक रूप से तनावमुक्त बनाते हैं। यही वजह है कि वह बिना किसी थकान के पूरे दिन तरोताजा महसूस करती हैं।
कैसा होता है मनीषा कोइराला का खानपान?
खानपान के मामले में मनीषा बेहद सादगी पसंद इंसान हैं। वह पूरी तरह से शाकाहारी आहार लेती हैं, जिसमें प्रोटीन, फाइबर और पोषक तत्वों का संतुलन स्पष्ट रूप से झलकता है। उनका साफ कहना है कि उम्र के हर पड़ाव पर शरीर की जरूरतें बदलती हैं, इसलिए किसी भी जटिल या कठिन डाइट को आंख मूंदकर फॉलो करने के बजाय हमेशा सिंपल और पौष्टिक खाना चाहिए।
"बढ़ती उम्र के साथ आपका शरीर बदलता है, इसलिए किसी भी कठिन डाइट को फॉलो करने के बजाय सिंपल खाना खाओ लेकिन अच्छा खाओ। स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी पूंजी है।" — मनीषा कोइराला, अभिनेत्री
उनकी सुबह की शुरुआत गुनगुने पानी के साथ होती है। नाश्ते में वह ताजे फल और स्प्राउट्स लेना पसंद करती हैं। दोपहर के भोजन में घर का बना दाल, चावल, रोटी और हरी सब्जियां शामिल होती हैं, जबकि शाम के वक्त वह स्नैक्स के रूप में ड्राई फ्रूट्स खाती हैं। उनका डिनर बहुत हल्का और सोने से काफी समय पहले होता है। इसके अलावा, वह दिनभर में भरपूर मात्रा में पानी और हरी सब्जियों का फ्रेश जूस पीती हैं ताकि शरीर अंदर से हाइड्रेटेड रहे।
डेयरी प्रोडक्ट्स से दूरी और अल्कलाइन वॉटर का इस्तेमाल
अपने खानपान में वह डेयरी उत्पादों, विशेष रूप से दूध का सेवन बहुत सीमित मात्रा में करती हैं। इसके साथ ही, वह ग्लूटेन-फ्री आहार को प्राथमिकता देती हैं। शरीर में पीएच स्तर और एसिडिटी को संतुलित रखने के लिए उन्होंने अपने घर पर विशेष रूप से अल्कलाइन वॉटर मशीन लगवाई है, और वह हमेशा यही पानी पीती हैं।
नींद के मामले में भी वह कोई कोताही नहीं बरतती हैं। रोजाना कम से कम 6 से 7 घंटे की गहरी और गुणवत्तापूर्ण नींद उनके दैनिक रूटीन का अनिवार्य हिस्सा है। उनका दृढ़ विश्वास है कि जीवन में काम और जिम्मेदारियां हमेशा बनी रहेंगी, लेकिन यदि शरीर स्वस्थ नहीं है तो कोई भी उपलब्धि मायने नहीं रखती।







