सेवा संकल्प अभियान के तहत सजा विकास भवन परिसर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में देश भर में विभिन्न रचनात्मक और लोक-कल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में स्थानीय स्तर पर नागरिकों को जागरूक करने और उनकी रचनात्मक प्रतिभा को मंच देने के उद्देश्य से एक अनूठी पहल देखने को मिली। प्रशासनिक अधिकारियों और बेसिक शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयासों से एक ऐसा आयोजन किया गया, जिसने कला और जन-जागरूकता का एक बेहतरीन संगम पेश किया। इस विशेष आयोजन के जरिए समाज के हर वर्ग तक सरकारी नीतियों के संदेश को पहुंचाने का अनूठा प्रयास किया गया।
कार्यक्रम की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए विकास भवन परिसर को दुल्हन की तरह सजाया गया था। यहां चारों तरफ रंग-बिरंगे फूलों और आकर्षक रंगों से सजी कलाकृतियां लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई थीं। इस आयोजन में न केवल प्रशासनिक अमले ने बल्कि आम जनता और विद्यार्थियों ने भी बढ़-चढ़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस प्रकार के आयोजनों से शासन और जनता के बीच की दूरियां कम होती हैं और लोग प्रशासनिक योजनाओं के प्रति अधिक जागरूक बनते हैं।
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा कार्यक्रम सेवा संकल्प अभियान का एक अहम हिस्सा था, जो निर्धारित तिथियों के भीतर सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है। इस दौरान पूरा परिसर उत्सव के रंग में रंगा नजर आया और हर किसी की जुबान पर प्रतिभागियों की कला की तारीफ थी।
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मीना मंच की बेटियों और शिक्षिकाओं ने दिखाई अद्भुत कला
इस रंगोली प्रतियोगिता की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले मीना मंच की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। जनपद के सभी 18 विकास खंडों यानी ब्लॉकों से आई टीमों ने अपनी कला का जादू बिखेरा। महिला शिक्षिकाओं और छात्राओं ने मिलकर ऐसी शानदार रंगोलियां बनाईं, जिन्हें देखकर हर कोई दंग रह गया। हर एक ब्लॉक की टीम ने अपनी कला के माध्यम से समाज सुधार और विकास का संदेश देने का पूरा प्रयास किया।
प्रतिभागियों ने अपनी कल्पना शक्ति का इस्तेमाल करते हुए रंगोली के रंगों के जरिए योजनाओं के ताने-बाने को जमीन पर उतार दिया। किसी ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश उकेरा तो किसी ने स्वच्छता अभियान की महत्ता को रेखांकित किया। बालिकाओं और महिलाओं की इस भारी भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि यदि उन्हें सही मंच और प्रोत्साहन मिले, तो वे अपनी प्रतिभा से हर किसी को प्रभावित कर सकती हैं।
इस आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय विद्यालयों के शिक्षकों और मार्गदर्शकों की भी अहम भूमिका रही। उन्होंने हफ्तों पहले से ही प्रतिभागियों को तैयार करना शुरू कर दिया था ताकि वे प्रतियोगिता के दिन बेहतरीन प्रदर्शन कर सकें। इस सामूहिक प्रयास ने मीना मंच के उद्देश्यों को एक नई ऊंचाई प्रदान की है।
'विकसित भारत 2047' की परिकल्पना को मिला रंगों का साथ
इस प्रतियोगिता का सबसे मुख्य और चर्चित आकर्षण 'विकसित भारत 2047' की संकल्पना पर आधारित रंगोलियां थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के सपने को इन रंगोलियों के माध्यम से बेहद खूबसूरती से दर्शाया गया। प्रतिभागियों ने भविष्य के भारत का जो स्वरूप अपनी कला में गढ़ा, वह देखने लायक था। आधुनिक बुनियादी ढांचे, उन्नत तकनीक, मजबूत अर्थव्यवस्था और हरित ऊर्जा जैसे विषयों को रंगों के जरिए जमीन पर उतार दिया गया।
इन कलाकृतियों में यह दर्शाने का प्रयास किया गया कि आने वाले दशकों में देश किस प्रकार हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर और शक्तिशाली बनेगा। अंतरिक्ष अनुसंधान से लेकर कृषि आधुनिकीकरण तक, हर एक पहलू को रंगोली के बारीकियुक्त डिजाइनों में पिरोया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की दृश्य कलाओं के माध्यम से जब युवा पीढ़ी जुड़ती है, तो उनके भीतर राष्ट्र निर्माण के प्रति एक अलग ही ऊर्जा और प्रतिबद्धता पैदा होती है।
आम नागरिकों ने भी इन रंगोलियों के सामने खड़े होकर तस्वीरें खिंचवाईं और इस परिकल्पना को बहुत करीब से महसूस किया। यह केवल एक प्रतियोगिता नहीं बल्कि आने वाले भारत के सुनहरे भविष्य का एक जीवंत दस्तावेज प्रतीत हो रहा था, जिसे साधारण रंगों और असीम उत्साह के साथ तैयार किया गया था।
जिलाधिकारी ने किया निरीक्षण, सराहा हुनर
कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका ने विकास भवन परिसर पहुंचकर सभी 18 ब्लॉकों द्वारा बनाई गई रंगोलियों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने एक-एक रंगोली के पास जाकर उसकी बारीकियों को देखा और प्रतिभागियों से उनके विचारों के बारे में जानकारी ली। जिलाधिकारी ने बच्चों और शिक्षिकाओं के इस प्रयास की खुलकर प्रशंसा की और कहा कि इस तरह के आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
"जनपद के सभी 18 ब्लॉकों की टीमों ने इस प्रतियोगिता में बहुत ही शानदार प्रदर्शन किया है। रंगोलियों के माध्यम से केंद्र व राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और 'विकसित भारत 2047' की परिकल्पना को बेहद सुंदरता और सटीकता के साथ उकेरा गया है। यह प्रयास सराहनीय है।" — सरनीत कौर ब्रोका, जिलाधिकारी
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अंजुलता और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल सिंह समेत विभाग के तमाम वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने भी विजेता और प्रतिभागी टीमों का उत्साहवर्धन किया। जिला प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि भविष्य में भी इस तरह के रचनात्मक आयोजनों को निरंतर बढ़ावा दिया जाएगा ताकि जमीनी स्तर पर जनभागीदारी को और अधिक मजबूत किया जा सके।
निष्कर्ष और आगे की राह
यह रंगोली प्रतियोगिता केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि प्रशासनिक योजनाओं और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का एक सशक्त माध्यम साबित हुई। मीना मंच के जरिए महिलाओं और बच्चों में छिपी कलात्मक प्रतिभा को जो मंच मिला, उसने पूरे जिले में एक सकारात्मक संदेश दिया है। 'विकसित भारत 2047' के संकल्प को जब जन-जन तक इस रचनात्मक शैली में पहुंचाया जाता है, तो उसका प्रभाव दूरगामी होता है। इस प्रकार के आयोजन अन्य जिलों के लिए भी एक बेहतरीन प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं, जहां कला और विकास को एक साथ जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है।







