मेरठ का बहुचर्चित नीला ड्रम हत्याकांड और अदालत का ऐतिहासिक फैसला
देशभर में सनसनी फैलाने वाले मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड मामले में अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने पति की निर्मम हत्या कर उसके शव को नीले ड्रम में छिपाने की वीभत्स घटना में पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को दोषी करार दिया है। इस सनसनीखेज फैसले के बाद से पूरे इलाके में एक बार फिर उस खौफनाक वारदात की चर्चाएं तेज हो गई हैं, जिसने हर किसी की रूह को कंपा दिया था। अदालत के इस फैसले को न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
अभियोजन पक्ष के वकीलों के अनुसार, इस पूरे मामले में लंबी कानूनी प्रक्रिया चली है और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने ठोस सबूतों के आधार पर यह दोषसिद्ध फैसला सुनाया है। हालांकि, अदालत ने अभी सजा की घोषणा नहीं की है और इसके लिए अगली तारीख तय कर दी गई है। मामले से जुड़े तमाम पहलुओं पर लगातार नजर बनाए रखने वाले कानूनी जानकारों का मानना है कि इस तरह के अपराध समाज में भय का माहौल पैदा करते हैं, इसलिए अदालत का यह रुख बेहद अहम माना जा रहा है।
दोषी ठहराए जाने के बाद दोनों आरोपियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत की कार्यवाही में हिस्सा लिया। जेल सूत्रों के मुताबिक, फैसले के दिन मुस्कान और साहिल काफी शांत नजर आए और उन्होंने अपने बचाव में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। ऐसा माना जा रहा है कि दोनों आरोपी इस बात से पूरी तरह मानसिक रूप से तैयार थे कि अदालत उन्हें इस जघन्य अपराध में दोषी ठहराएगी।
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ट्रायल के दौरान पेश किए गए 1000 पन्नों के दस्तावेज और गवाहों के बयान
इस बहुचर्चित मुकदमे की सुनवाई किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही है। पुलिस और अभियोजन पक्ष ने अदालत में मजबूती से अपना पक्ष रखते हुए करीब 1000 पन्नों की एक विस्तृत चार्जशीट दाखिल की थी। इस चार्जशीट में वे तमाम तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्य शामिल थे, जिन्होंने मुस्कान और साहिल के गुनाह की हर परत को बेनकाब कर दिया था। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से कुल 22 से अधिक गवाहों को अदालत के सामने पेश किया गया, जिन्होंने अपनी गवाही से पूरे मामले की सच्चाई सामने रखी।
अदालत में इस हाई-प्रोफाइल केस का ट्रायल जुलाई 2025 में शुरू हुआ था, जो लगभग 13 महीनों तक लगातार चला। इस लंबी समयावधि के दौरान कुल 126 तारीखों पर सुनवाई हुई, जिसमें दोनों पक्षों के वकीलों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। हर तारीख पर देश की निगाहें इस बात पर टिकी थीं कि आखिर इस खौफनाक अपराध का अंजाम क्या होगा। पुलिस द्वारा जुटाई गई कड़ियों और फोरेंसिक रिपोर्ट ने अदालत के सामने ऐसा जाल बुना जिससे आरोपियों के पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचा।
मुस्कान और साहिल के सरकारी अधिवक्ताओं की टीम ने अदालत में उनके बचाव के लिए कुछ कमजोर ग्राउंड्स रखने की कोशिश जरूर की, लेकिन मजबूत साक्ष्यों के आगे उनका हर दांव फेल हो गया। वकीलों के मुताबिक, पुलिस द्वारा जुटाए गए डिजिटल साक्ष्य, कॉल डिटेल्स और चश्मदीद गवाहों के बयानों ने इस मामले को पूरी तरह से अकाट्य बना दिया था, जिसके चलते अदालत ने दोनों को दोषी करार देने में ज्यादा वक्त नहीं लगाया।
क्या था पूरा घटनाक्रम, कैसे रची गई थी सौरभ राजपूत की खौफनाक साजिश
यह पूरा खौफनाक वाकया साल 2025 की शुरुआत में सामने आया था, जब मेरठ के एक साधारण परिवार में छिपी खूनी साजिश का पर्दाफाश हुआ था। पुलिस की जांच के अनुसार, मृतक सौरभ राजपूत कुछ समय पहले ही लंदन से अपने घर लौटा था, जिसके बाद उसकी पत्नी मुस्कान ने उसके स्वागत में पार्टी का आयोजन भी किया था। लेकिन परदे के पीछे कुछ और ही खिचड़ी पक रही थी। मुस्कान के अपने प्रेमी साहिल के साथ अवैध संबंध थे, और सौरभ इन दोनों के बीच सबसे बड़ा कांटा बन रहा था।
साजिश के तहत 3 मार्च 2025 की रात को मुस्कान ने खाने में सौरभ को भारी मात्रा में नींद की गोलियां दे दीं। जब सौरभ गहरी नींद में चला गया, तो उसने अपने प्रेमी साहिल को घर पर बुला लिया। दोनों ने मिलकर बेरहमी से सौरभ की हत्या कर दी। हत्या के इस घिनौने कृत्य को छिपाने के लिए उन्होंने बेहद शातिर तरीका अपनाया। शव को ठिकाने लगाने के लिए उन्होंने आरी से सौरभ के शरीर के कई टुकड़े किए और उन्हें एक बड़े नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम में ठूंस दिया। इसके बाद सबूत मिटाने के लिए उस ड्रम के अंदर सीमेंट भरकर उसे पूरी तरह सील कर दिया गया ताकि बदबू न फैले।
वारदात को अंजाम देने के बाद बेखौफ हुए दोनों आरोपी अपनी बेटी को परिवार के पास छोड़कर हिमाचल प्रदेश घूमने चले गए थे। लेकिन कहते हैं कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं। जब पुलिस ने गुमशुदगी और शक के आधार पर जांच शुरू की, तो परत-दर-परत सच्चाई बाहर आने लगी। पुलिस ने जब घर की तलाशी ली और वह नीला ड्रम बरामद किया, तो उसे खोलते ही पुलिस अधिकारियों के भी होश उड़ गए।
अदालत में अब सजा के बिंदु पर होगी अगली सुनवाई, टिकी हैं निगाहें
दोषसिद्धि का फैसला आने के बाद अब सभी की निगाहें आगामी 14 अक्टूबर पर टिकी हैं, जिस दिन अदालत इस मामले में सजा का ऐलान करेगी। कानूनी प्रावधानों के तहत दोषसिद्धि और सजा सुनाना दो अलग-अलग चरण होते हैं, और अदालत ने दोषियों को उनके अपराध की गंभीरता को देखते हुए सजा पर अपना पक्ष रखने का मौका देने के लिए अगली तारीख निर्धारित की है। अभियोजन पक्ष ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला दिया है जो समाज के ताने-बाने को प्रभावित करने वाले अपराधों से जुड़े हैं।
मृतक सौरभ राजपूत के परिवार ने शुरू से ही यह मांग की है कि इस जघन्य और क्रूरता से भरे अपराध के लिए मुस्कान और साहिल को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। पीड़ित परिवार के वकीलों ने अदालत के समक्ष यह दलील दी है कि यह मामला 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' यानी सबसे दुर्लभ मामलों की श्रेणी में आता है, क्योंकि इसमें सुनियोजित तरीके से रिश्तों का कत्ल किया गया है।
"अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुनने के बाद मुस्कान और साहिल को हत्या का दोषी करार दिया है। अभियोजन पक्ष की ओर से इस मामले में अधिकतम सजा यानी मृत्युदंड की मांग की जा रही है, ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए। आगामी 14 अक्टूबर को सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी।" — के.के. चौबे, अभियोजन पक्ष के वकील
यह मामला न केवल मेरठ बल्कि पूरे देश के लिए एक ऐसा सबक बन गया है जो मानवीय संवेदनाओं के पतन को दर्शाता है। एक पत्नी द्वारा अपने ही पति को इस तरह मौत के घाट उतारकर नीले ड्रम में सीमेंट से सील करने की यह घटना आज भी लोगों की रूह कंपा देती है। अब न्याय के मंदिर से आने वाले अंतिम फैसले यानी सजा के ऐलान का इंतजार पूरे देश को है, जो यह तय करेगा कि इन दोनों अपराधियों को उनके इस अमानवीय कृत्य के लिए क्या सजा मिलती है।








