वर्चुअल रियलिटी की दुनिया में मेटा का बड़ा दांव, पेश किए बेहद हल्के ग्लासेस
तकनीकी जगत की दिग्गज कंपनी मेटा ने वर्चुअल रियलिटी के अनुभव को पूरी तरह से बदलने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। कैलिफोर्निया के मेनलो पार्क में आयोजित कंपनी के बहुप्रतीक्षित एनुअल कनेक्ट इवेंट के दौरान मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने एक ऐसा उत्पाद दुनिया के सामने रखा है जो आने वाले समय में टेक मार्केट का रुख बदल सकता है। यह नया उत्पाद कोई भारी-भरकम हेडसेट नहीं बल्कि बेहद स्लिम और हल्के वर्चुअल रियलिटी ग्लासेस हैं, जिन्हें आम चश्मे की तरह आसानी से पहना जा सकता है।
पारंपरिक रूप से वर्चुअल रियलिटी उपकरणों के साथ सबसे बड़ी समस्या उनका भारी वजन और लंबे समय तक पहनने पर होने वाली असुविधा रही है। एप्पल के विजन प्रो जैसे डिवाइस अपनी बेहतरीन तकनीक के बावजूद अपने वजन और भारी डिजाइन के कारण आम उपयोगकर्ताओं के लिए हर समय इस्तेमाल करना आसान नहीं बनाते हैं। मेटा ने इसी खामी को दूर करते हुए इन नए ग्लासेस को इस तरह डिजाइन किया है कि उपयोगकर्ता इन्हें बिना किसी थकान के घंटों इस्तेमाल कर सकें।
इस इवेंट के दौरान जुकरबर्ग ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी ने फिलहाल मेटावर्स से अपना फोकस थोड़ा हटाकर व्यावहारिक और दैनिक जीवन में आसानी से उपयोग होने वाले हार्डवेयर उपकरणों पर केंद्रित किया है। तकनीक प्रेमियों के बीच इस घोषणा के बाद से ही जबर्दस्त चर्चा शुरू हो गई है और हर कोई इस नए गैजेट के बाजार में आने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।
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महज 100 ग्राम से कम वजन, सामान्य चश्मे जैसा अहसास
मेटा के इन नए वर्चुअल रियलिटी ग्लासेस की सबसे बड़ी खासियत उनका वजन है। जुकरबर्ग ने खुद मंच से जानकारी दी कि इन ग्लासेस का वजन 100 ग्राम से भी कम है। यह एक साधारण नजर के चश्मे या धूप के चश्मे के वजन के लगभग बराबर है। बाजार में उपलब्ध अन्य वीआर हेडसेट की तुलना में यह डिवाइस बेहद कॉम्पैक्ट और पोर्टेबल है, जिसे कहीं भी आसानी से अपने साथ ले जाया जा सकता है।
इंजीनियरिंग के लिहाज से इतने कम वजन में वीआर तकनीक को फिट करना एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। कंपनी ने इसके डिस्प्ले, लेंस और इंटरनल सर्किटरी को इस तरह से कस्टमाइज किया है कि डिवाइस की परफॉर्मेंस पर कोई असर न पड़े और वह वजन में भी बिल्कुल हल्का रहे। उपयोगकर्ता इसे पहनकर आराम से फिल्में देख सकते हैं, वीडियो गेम का आनंद ले सकते हैं और वर्चुअल स्क्रीन पर अपने ऑफिस के काम या कंप्यूटिंग से जुड़े कार्य कर सकते हैं।
इतनी हल्की डिवाइस होने के कारण इसे पहनने वाले को सिर दर्द या गर्दन में खिंचाव जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा, जो आमतौर पर भारी हेडसेट इस्तेमाल करने पर होती हैं। यह खूबी इसे बाजार में मौजूद अन्य उत्पादों से सीधे तौर पर अलग और बेहतर बनाती है।
कीमत और लॉन्चिंग को लेकर क्या है कंपनी की योजना
बात करें कीमत की तो मेटा ने इन ग्लासेस को प्रीमियम सेगमेंट के तहत उतारा है। इनकी कीमत 1299 अमेरिकी डॉलर रखी गई है, जो भारतीय मुद्रा के हिसाब से लगभग 1,24,513 रुपये बैठती है। हालांकि यह कीमत थोड़ी ज्यादा लग सकती है, लेकिन वीआर तकनीक और इसमें मिलने वाले एडवांस फीचर्स को देखते हुए इसे प्रीमियम टेक बायर्स के लिए एक बेहतरीन विकल्प माना जा रहा है।
मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने घोषणा की है कि इन नए वीआर ग्लासेस की कमर्शियल सेल अगले साल यानी 2026 के पहले क्वार्टर में शुरू कर दी जाएगी। शुरुआती दौर में यह चुनिंदा बाजारों में उपलब्ध होंगे और धीरे-धीरे इसका दायरा वैश्विक स्तर पर बढ़ाया जाएगा। कंपनी का मानना है कि जैसे-जैसे लोग इस हल्के डिजाइन के आदी होंगे, वैसे-वैसे वीआर तकनीक का दायरा घरों और दफ्तरों में तेजी से फैलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह डिवाइस बाजार में एक नया ट्रेंड सेट कर सकती है, क्योंकि यह भारी हेडसेट के मुकाबले उपयोगकर्ताओं को ज्यादा सहजता और स्वतंत्रता प्रदान करती है।
पेटीएम फाउंडर विजय शेखर शर्मा भी हुए नए गैजेट के मुरीद
मेटा के इस नए गैजेट की चमक केवल विदेशी बाजारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारत में भी तकनीकी दिग्गजों ने इसकी जमकर तारीफ की है। देश की प्रमुख डिजिटल पेमेंट कंपनी पेटीएम के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय शेखर शर्मा ने इन नए ग्लासेस पर अपनी उत्सुकता जाहिर की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस डिवाइस से जुड़ा एक वीडियो साझा किया और इसकी खूबियों की खुलकर सराहना की है।
विजय शेखर शर्मा ने अपने पोस्ट में लिखा कि यह वह तमाम खूबियां समेटे हुए है जो एप्पल विजन प्रो में होनी चाहिए थीं या हो सकती थीं। उनकी इस प्रतिक्रिया ने भारतीय टेक कम्युनिटी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
"All that Apple Vision Pro could/ should have been. Meta will launch, next level, Meta VR glasses this year." — विजय शेखर शर्मा, फाउंडर पेटीएम
यह बयान इस बात का प्रमाण है कि भारतीय उद्योग जगत के दिग्गज भी वैश्विक स्तर पर हो रहे तकनीकी बदलावों पर बारीक नजर रख रहे हैं और नए उत्पादों की क्षमता को भली-भांति समझ रहे हैं। पेटीएम प्रमुख का इस प्रकार समर्थन करना मेटा के इस उत्पाद के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन माना जा रहा है।
एप्पल विजन प्रो से सीधी टक्कर और भविष्य की राह
मेटा के इन नए ग्लासेस का सीधा मुकाबला सीधे तौर पर एप्पल के बहुचर्चित विजन प्रो हेडसेट से माना जा रहा है। दोनों उपकरणों के बीच सबसे बड़ा अंतर आकार, वजन और कीमत का है। जहां एप्पल का विजन प्रो एक भारी-भरकम डिवाइस है और जिसकी कीमत करीब 3,700 अमेरिकी डॉलर है, वहीं मेटा ने बेहद कम कीमत और पंख जैसे हल्के वजन के साथ मैदान में उतरकर बाजी अपने पाले में खींचने की कोशिश की है।
इस कनेक्ट इवेंट के दौरान मेटा ने केवल वीआर ग्लासेस ही नहीं, बल्कि एक अन्य दिलचस्प गैजेट भी पेश किया। कंपनी ने एक छोटा टूल पेश किया जिसे चाबी के छल्ले में आसानी से लगाया जा सकता है और जिसमें मेटा का खुद का Muse AI एजेंट मौजूद है। इसमें रियल-टाइम वॉयस मोड का सपोर्ट भी मिलता है, जो उपयोगकर्ताओं को बोलकर निर्देश देने और तुरंत जवाब पाने की सुविधा देता है।
इन सभी घोषणाओं से यह साफ जाहिर होता है कि मेटा आने वाले दिनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वर्चुअल रियलिटी के क्षेत्र में अपने उत्पादों को आम इंसान के दैनिक जीवन का सबसे अहम हिस्सा बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। तकनीक के जानकारों का मानना है कि आने वाला साल वियरेबल गैजेट्स और वीआर मार्केट के लिए बेहद रोमांचक होने वाला है।





