सामान्य तौर पर सितंबर का महीना भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई का समय माना जाता है। इस अवधि तक आते-आते बारिश की रफ्तार काफी धीमी पड़ जाती है और लोग उमस भरी गर्मी से राहत की उम्मीद करने लगते हैं। लेकिन इस बार सितंबर के आखिरी हफ्ते ने मौसम के तमाम पुराने समीकरणों को उलट कर रख दिया है। देश के विभिन्न हिस्सों में अचानक शुरू हुई झमाझम बारिश ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में जलभराव जैसी समस्याओं ने इस साल के मानसून को बेहद खास और अप्रत्याशित बना दिया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस मौसम में होने वाली इस भारी बारिश के पीछे कई मौसमी प्रणालियों का एक साथ सक्रिय होना मुख्य वजह है। मानसून की वापसी के समय बंगाल की खाड़ी से उठने वाली नमी वाली हवाएं जब उत्तर भारत की तरफ बढ़ीं, तो पूर्वी और मध्य भारत के कई जिलों में अचानक बादल जमकर बरसे। ओडिशा से लेकर उत्तर प्रदेश और बिहार तक नदियां उफान पर हैं, जबकि पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रहे भूस्खलन ने यातायात और जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।
पश्चिमी विक्षोभ और पाकिस्तान का मौसमी कनेक्शन
इस असामान्य मौसम के पीछे एक बड़ा कारण पश्चिमी विक्षोभ यानी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस है। आमतौर पर पश्चिमी विक्षोभ सर्दियों के मौसम में सक्रिय होते हैं और उत्तर भारत में बारिश या बर्फबारी लाते हैं। ये सिस्टम भूमध्य सागर से उठते हैं और पाकिस्तान के रास्ते भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवेश करते हैं। लेकिन वर्तमान परिस्थिति में, यह पश्चिमी विक्षोभ सितंबर के आखिरी दिनों में सक्रिय हो गया है।
जब पाकिस्तान के रास्ते आने वाली इन ठंडी हवाओं का सामना बंगाल की खाड़ी से आ रही नम और गर्म हवाओं से हुआ, तो दोनों के बीच एक जबरदस्त टकराव देखने को मिला। निचले स्तर पर नमी खींचने वाले कम दबाव के क्षेत्र और ऊपरी स्तर पर ठंडी हवाओं के मिलन से वायुमंडल में भारी अस्थिरता पैदा हो गई। इसी परस्पर क्रिया के परिणामस्वरूप पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के साथ-साथ सीजन की पहली बर्फबारी भी दर्ज की गई है, जिसने ठंड की आहट समय से पहले ही दे दी है।
"वर्तमान समय में बंगाल की खाड़ी का कम दबाव का क्षेत्र और पश्चिमी विक्षोभ आपस में टकराए हैं। इससे वातावरण में अत्यधिक अस्थिरता आई है, जिसके कारण मानसून की विदाई के वक्त भी उत्तर और मध्य भारत में भारी बारिश का दौर देखने को मिल रहा है।" — मौसम वैज्ञानिक, भारतीय मौसम विभाग
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इन राज्यों में बारिश का अलर्ट और तापमान में गिरावट
मौसम विभाग ने आने वाले कुछ दिनों के लिए उत्तर-पश्चिम भारत के कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और चंडीगढ़ जैसे इलाकों में अगले दो से तीन दिनों तक तेज हवाओं के साथ बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है। नमी की उपलब्धता पहले से ही प्रचुर मात्रा में होने के कारण यह बारिश सामान्य से अधिक तीव्र हो सकती है।
चंडीगढ़ और उसके आसपास के मैदानी इलाकों में हुई अचानक वर्षा से तापमान में सात डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है जिससे लोगों को सितंबर के अंत में ही सिहरन महसूस होने लगी है। मौसम विभाग का मानना है कि आने वाले महीनों में अल-नीनो का प्रभाव भी सक्रिय रह सकता है, जो आगामी सर्दियों के मिजाज को पूरी तरह से प्रभावित कर सकता है।
जलवायु परिवर्तन और बदलता मौसमी चक्र
वैज्ञानिकों का स्पष्ट रूप से मानना है कि इस प्रकार की अत्यधिक और अप्रत्याशित मौसमी घटनाएं सीधे तौर पर ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का परिणाम हैं। मानसून के पैटर्न में आ रहे लगातार बदलावों के कारण अब सूखा और बाढ़ जैसी अतिवादी स्थितियां आम होती जा रही हैं। कभी सूखे जैसे हालात पैदा करने वाला अल-नीनो प्रभाव अचानक स्थानीय दबाव प्रणालियों के कारण भारी बारिश में बदल जाता है।
आम नागरिकों के लिए यह जरूरी है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों पर लगातार नजर रखें और सफर के दौरान सतर्कता बरतें। प्रशासन भी संभावित जलभराव और पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। आने वाले दिनों में यह मौसमी बदलाव देश के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है, इसलिए सतर्क रहना ही सबसे बड़ा बचाव है।







