होम/देश/मोरक्को चुनाव में बड़ी जीत के बाद फंसा सरकार बनाने का पेंच: जानिए क्या है पूरा सियासी समीकरण
देशपढ़ने में समय: 5 मिनट

मोरक्को चुनाव में बड़ी जीत के बाद फंसा सरकार बनाने का पेंच: जानिए क्या है पूरा सियासी समीकरण

मोरक्को के आम चुनावों में ऑथेंटिसिटी एंड मॉडर्नटी पार्टी ने सबसे ज्यादा सीटें हासिल की हैं, लेकिन बहुमत का जादुई आंकड़ा दूर होने के चलते नई सरकार के गठन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। देश के सामने आर्थिक चुनौतियों के साथ-साथ फीफा वर्ल्ड कप 2030 की मेजबानी की बड़ी जिम्मेदारी भी है।
The Freelance ब्यूरो
TheFreelance ब्यूरो
26 सितंबर 2026 • अपडेटेड
🌐Read in English →
शेयर करें:
मोरक्को चुनाव में बड़ी जीत के बाद फंसा सरकार बनाने का पेंच: जानिए क्या है पूरा सियासी समीकरण
📷 मोरक्को चुनाव में बड़ी जीत के बाद फंसा सरकार बनाने का पेंच: जानिए क्या है पूरा सियासी समीकरण — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • ऑथेंटिसिटी एंड मॉडर्नटी पार्टी (PAM) ने 395 में से 97 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में अपनी स्थिति दर्ज कराई है।
  • बहुमत का स्पष्ट आंकड़ा न मिलने के कारण पार्टी को सरकार बनाने के लिए अन्य दलों के साथ गठबंधन की जुगत भिड़ानी होगी।
  • आने वाली सरकार के कंधों पर देश की बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और साल 2030 के फुटबॉल वर्ल्ड कप की तैयारियों का भारी दबाव रहेगा।
प्रायोजित • SPONSOREDVoterAction Campaign Suite
VoterAction - कागज़ पर नहीं, ऐप पर लड़े जाते हैं चुनाव | अभियान की पूरी कमान

मोरक्को की राजनीति में बड़ा उलटफेर: चुनाव नतीजों के बाद भी सरकार गठन पर सस्पेंस

उत्तर अफ्रीकी देश मोरक्को में हाल ही में संपन्न हुए आम चुनावों के नतीजे सामने आ चुके हैं, लेकिन चुनावी जंग जीतने के बाद भी राजनीतिक गलियारों में हलचल थमी नहीं है। यहां की सियासत में एक दिलचस्प मोड़ आ गया है क्योंकि सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने वाले दल के सामने अब संसद के भीतर बहुमत साबित करने की चुनौती खड़ी हो गई है। देश की जनता ने अपना फैसला इलेक्टोरल बैलेट के जरिए सुना दिया है, मगर राजनीतिक दलों के बीच समीकरण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाए हैं।

इस चुनाव में ऑथेंटिसिटी एंड मॉडर्नटी पार्टी (PAM) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सबसे अधिक सीटें अपने नाम की हैं। कुल 395 सीटों वाली संसद में इस पार्टी ने 97 सीटों पर कब्जा जमाया है। इसके बावजूद, बहुमत के जादुई आंकड़े से पार्टी अभी भी दूर है। ऐसे में चुनाव जीतने के बाद भी सरकार बनाने का असली कूटनीतिक खेल अब शुरू हुआ है, जहां छोटे दलों और संभावित सहयोगियों की भूमिका बेहद अहम हो गई है।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

संबंधित खबरें

चुनाव में धांधली का दावा: विपक्ष मैदान छोड़कर बैठे या फिर चुनाव लड़कर वैधता न दे

चुनाव में धांधली का दावा: विपक्ष मैदान छोड़कर बैठे या फिर चुनाव लड़कर वैधता न दे

दस हजार से कम में आया धांसू स्मार्टफोन: लंबी बैटरी और मिलिट्री-ग्रेड मजबूती, जानें हर खास बात

दस हजार से कम में आया धांसू स्मार्टफोन: लंबी बैटरी और मिलिट्री-ग्रेड मजबूती, जानें हर खास बात

लोकतंत्र पर बड़ा संकट या राजनीतिक बयानबाजी? चुनावों में कथित फर्जीवाड़े के आरोपों पर गरमाई सियासत

लोकतंत्र पर बड़ा संकट या राजनीतिक बयानबाजी? चुनावों में कथित फर्जीवाड़े के आरोपों पर गरमाई सियासत

डॉ. मनदीप भंडारी को मिली CBSE की कमान: जानिए कौन हैं तेजतर्रार IAS अधिकारी, अमरनाथ श्राइन बोर्ड से क्या है नाता

डॉ. मनदीप भंडारी को मिली CBSE की कमान: जानिए कौन हैं तेजतर्रार IAS अधिकारी, अमरनाथ श्राइन बोर्ड से क्या है नाता

बैंक डकैती में बड़ा खुलासा: सुरक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति, न अलार्म था और न ही मजबूत पहरा

बैंक डकैती में बड़ा खुलासा: सुरक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति, न अलार्म था और न ही मजबूत पहरा

आज का मौसम: दिल्ली, यूपी, बिहार सहित प्रमुख शहरों में कैसा रहेगा हाल (26 सितंबर 2026)

आज का मौसम: दिल्ली, यूपी, बिहार सहित प्रमुख शहरों में कैसा रहेगा हाल (26 सितंबर 2026)

सावधान! बैंक जाने से पहले जान लें नया नियम: इस रविवार भी खुले रहेंगे बैंक, हड़ताल के चलते बड़ा बदलाव

सावधान! बैंक जाने से पहले जान लें नया नियम: इस रविवार भी खुले रहेंगे बैंक, हड़ताल के चलते बड़ा बदलाव

करोड़ों की लागत से बनी सड़क भ्रष्टाचार की भेंट: हाथ से उखड़ गया डामर, वीडियो वायरल होने पर महकमे में हड़कंप

करोड़ों की लागत से बनी सड़क भ्रष्टाचार की भेंट: हाथ से उखड़ गया डामर, वीडियो वायरल होने पर महकमे में हड़कंप

विवादों के साए में चुनावी सफलता और दलों का नया सियासी गणित

दिलचस्प बात यह है कि PAM की यह जीत ऐसे समय में आई है जब पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता गंभीर कानूनी विवादों और आपराधिक मामलों की सुर्खियों में रहे थे। इसके बावजूद, जनता ने पार्टी के पक्ष में मतदान किया और इसने पिछली बार की तुलना में अपनी स्थिति को और मजबूत किया है। दूसरी तरफ, पिछली हुकूमत में शामिल नेशनल रैली ऑफ इंडिपेंडेंट (RNI) पार्टी को इस बार चुनावी नुकसान उठाना पड़ा है और उसे केवल 66 सीटें ही मिल सकी हैं। वहीं, जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (PJD) ने सुधार करते हुए अपनी सीटों की संख्या में इजाफा किया है।

संसदीय लोकतंत्र के नियमों के अनुसार, केवल चुनाव जीतना ही काफी नहीं होता, बल्कि सदन के पटल पर संख्या बल का समर्थन होना अनिवार्य है। PAM के पास अकेले दम पर सरकार चलाने लायक सीटें नहीं हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी के लिए राह आसान नहीं होगी क्योंकि पारंपरिक प्रतिद्वंद्विता के चलते कई बड़े दलों के साथ उसका तालमेल बैठना मुश्किल नजर आता है। विपक्षी खेमे से आ रहे बयानों ने भी स्थिति को और अधिक उलझा दिया है।

"चुनावी सफलता महज एक शुरुआत है। असली परीक्षा तब शुरू होती है जब आपको एक स्थिर सरकार देनी होती है और देश की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना पड़ता है।" — राजनीतिक विश्लेषक, मोरक्को

गठबंधन की पेचीदगियां और संभावित चेहरों पर टिकी निगाहें

पूर्ण बहुमत न मिलने की स्थिति में अब सभी की निगाहें तीसरे स्थान पर रहने वाली इस्तिक्लाल पार्टी और अन्य क्षेत्रीय दलों पर टिक गई हैं। सरकार के गठन के लिए PAM को इन दलों के साथ गहन बातचीत करनी होगी और वैचारिक मतभेदों को दरकिनार कर साझा एजेंडा तैयार करना होगा। गठबंधन की इस बिसात में किस दल को मंत्रिमंडल में क्या हिस्सेदारी मिलती है, यह आने वाले दिनों की राजनीति तय करेगी।

संवैधानिक प्रावधानों के तहत देश के शाह मोहम्मद षष्ठम उस दल से प्रधानमंत्री पद के लिए नाम तय करेंगे जिसने सबसे अधिक सीटें जीती हैं। इस रेस में कुछ प्रमुख नाम सबसे आगे चल रहे हैं। पार्टी की कमान संभाल रहीं फातिमा-जहरा मंसूरी का नाम शीर्ष पर है, और यदि उनके नाम पर मुहर लगती है तो देश को अपनी पहली महिला प्रधानमंत्री मिलने का ऐतिहासिक अवसर प्राप्त होगा। इसके अलावा खेल प्रशासन से जुड़े फौजी लकजा का नाम भी चर्चा में बना हुआ है।

नई सरकार के सामने खड़ी हैं बड़ी आर्थिक और वैश्विक चुनौतियां

जो भी दल सत्ता की बागडोर संभालेगा, उसके रास्ते में फूलों की शैया नहीं बल्कि कांटों भरा ताज होगा। मोरक्को को आने वाले वर्षों में वैश्विक स्तर पर एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी निभानी है। देश साल 2030 के फुटबॉल वर्ल्ड कप की सह-मेजबानी करने जा रहा है, जिसके लिए बुनियादी ढांचे के विकास पर भारी-भरकम निवेश किया जाना है। इस मेगा इवेंट की वजह से राजनीतिक हलकों में आगामी प्रशासन को 'वर्ल्ड कप सरकार' के रूप में भी देखा जा रहा है।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की चमक-धमक के बीच देश के भीतर आम नागरिकों की बुनियादी समस्याएं मुंह बाए खड़ी हैं। देश के युवा लगातार बढ़ती बेरोजगारी, न्यूनतम वेतन की सीमाओं, महंगाई और बेहतर शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव को लेकर आंदोलित रहे हैं। पिछले दिनों हुए विरोध प्रदर्शन इस बात का गवाह हैं कि जनता अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट होने वाली नहीं है। इस बार के चुनाव में मतदान प्रतिशत का गिरकर 38 प्रतिशत पर पहुंचना भी इस बात का संकेत है कि एक वर्ग विशेष का चुनावी प्रक्रिया से मोहभंग हो रहा है, जिसे नई सरकार के लिए एक बड़ी चेतावनी के तौर पर देखा जाना चाहिए।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
विज्ञापन एवं अनुशंसित सामग्री • RECOMMENDED

संबंधित खबरें (Related Articles)

चुनाव में धांधली का दावा: विपक्ष मैदान छोड़कर बैठे या फिर चुनाव लड़कर वैधता न देNATIONAL

चुनाव में धांधली का दावा: विपक्ष मैदान छोड़कर बैठे या फिर चुनाव लड़कर वैधता न दे

25 सित॰
दस हजार से कम में आया धांसू स्मार्टफोन: लंबी बैटरी और मिलिट्री-ग्रेड मजबूती, जानें हर खास बातNATIONAL

दस हजार से कम में आया धांसू स्मार्टफोन: लंबी बैटरी और मिलिट्री-ग्रेड मजबूती, जानें हर खास बात

26 सित॰
लोकतंत्र पर बड़ा संकट या राजनीतिक बयानबाजी? चुनावों में कथित फर्जीवाड़े के आरोपों पर गरमाई सियासतNATIONAL

लोकतंत्र पर बड़ा संकट या राजनीतिक बयानबाजी? चुनावों में कथित फर्जीवाड़े के आरोपों पर गरमाई सियासत

26 सित॰
डॉ. मनदीप भंडारी को मिली CBSE की कमान: जानिए कौन हैं तेजतर्रार IAS अधिकारी, अमरनाथ श्राइन बोर्ड से क्या है नाताNATIONAL

डॉ. मनदीप भंडारी को मिली CBSE की कमान: जानिए कौन हैं तेजतर्रार IAS अधिकारी, अमरनाथ श्राइन बोर्ड से क्या है नाता

26 सित॰
बैंक डकैती में बड़ा खुलासा: सुरक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति, न अलार्म था और न ही मजबूत पहराNATIONAL

बैंक डकैती में बड़ा खुलासा: सुरक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति, न अलार्म था और न ही मजबूत पहरा

26 सित॰
आज का मौसम: दिल्ली, यूपी, बिहार सहित प्रमुख शहरों में कैसा रहेगा हाल (26 सितंबर 2026)NATIONAL

आज का मौसम: दिल्ली, यूपी, बिहार सहित प्रमुख शहरों में कैसा रहेगा हाल (26 सितंबर 2026)

26 सित॰
सावधान! बैंक जाने से पहले जान लें नया नियम: इस रविवार भी खुले रहेंगे बैंक, हड़ताल के चलते बड़ा बदलावNATIONAL

सावधान! बैंक जाने से पहले जान लें नया नियम: इस रविवार भी खुले रहेंगे बैंक, हड़ताल के चलते बड़ा बदलाव

26 सित॰
करोड़ों की लागत से बनी सड़क भ्रष्टाचार की भेंट: हाथ से उखड़ गया डामर, वीडियो वायरल होने पर महकमे में हड़कंपNATIONAL

करोड़ों की लागत से बनी सड़क भ्रष्टाचार की भेंट: हाथ से उखड़ गया डामर, वीडियो वायरल होने पर महकमे में हड़कंप

26 सित॰