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करोड़ों की लागत से बनी सड़क भ्रष्टाचार की भेंट: हाथ से उखड़ गया डामर, वीडियो वायरल होने पर महकमे में हड़कंप

प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत दो करोड़ से अधिक की लागत से बनाई गई ग्रामीण सड़क अपनी पहली ही बारिश और शुरुआती महीनों में उखड़ने लगी है। ग्रामीणों द्वारा हाथ से डामर की परत उखाड़े जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद निर्माण एजेंसियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
The Freelance ब्यूरो
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26 सितंबर 2026 • अपडेटेड
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करोड़ों की लागत से बनी सड़क भ्रष्टाचार की भेंट: हाथ से उखड़ गया डामर, वीडियो वायरल होने पर महकमे में हड़कंप
📷 करोड़ों की लागत से बनी सड़क भ्रष्टाचार की भेंट: हाथ से उखड़ गया डामर, वीडियो वायरल होने पर महकमे में हड़कंप — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत दो करोड़ छह लाख रुपये की लागत से बनाई गई है सड़क.
  • निर्माण के महज तीन महीने के भीतर ही ऊपरी परत पपड़ी की तरह उखड़ने लगी.
  • ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में मानकों की अनदेखी कर घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया.
  • वीडियो वायरल होने के बाद महकमे ने लैब टेस्ट कराया, जिसमें सब कुछ ठीक होने का दावा किया जा रहा है.

करोड़ों की लागत से बनी सड़क पर उठ रहे गंभीर सवाल

देश के ग्रामीण इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ने और विकास की रफ्तार को तेज करने के लिए सरकारें पानी की तरह पैसा बहा रही हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। ताजा मामला एक ऐसी ग्रामीण सड़क से जुड़ा है, जिसे भारी-भरकम बजट खर्च करके तैयार किया गया था, लेकिन उद्घाटन के कुछ ही महीनों बाद वह अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। सड़क की खस्ता हालत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ग्रामीण अपने हाथों से ही इसकी डामर की परत को उखाड़ते हुए नजर आ रहे हैं। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद से इलाके में प्रशासनिक अमले और ठेकेदारों की मिलीभगत को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

यह पूरा मामला प्रधानमंत्री जनमन योजना से जुड़ा हुआ है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का खाका खींचा गया था। चिमरा मेन रोड से बरभांवर मिडिल स्कूल तक जाने वाली इस महत्वपूर्ण सड़क के निर्माण पर दो करोड़ छह लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च की जानी थी। मकसद साफ था कि स्कूल जाने वाले बच्चों और आसपास के गांवों के लोगों को आवागमन में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। हालांकि, ठेकेदार और संबंधित निर्माण एजेंसी ने इस नेक मकसद को अपनी कमाई का जरिया बना लिया, जिसका नतीजा आज सबके सामने है।

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हाथ से डामर उखाड़ते ग्रामीणों का वीडियो हुआ वायरल

विकास कार्यों में किस स्तर पर लीकेज और भ्रष्टाचार होता है, इसका जीता-जागता उदाहरण इस सड़क पर साफ देखा जा सकता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें स्थानीय ग्रामीण सड़क की डामर वाली ऊपरी परत को अपने हाथों से पापड़ की तरह उखाड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में साफ दिख रहा है कि सड़क पर बिछाई गई डामर की लेयर इतनी कमजोर है कि उसे किसी भारी मशीन या औजार की भी जरूरत नहीं पड़ रही है, बल्कि आम लोग मामूली ताकत से ही उसे खींचकर अलग कर रहे हैं।

इस वीडियो के वायरल होने के बाद से स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि जब उन्होंने पहली बार सड़क की ऐसी हालत देखी, तो उन्हें अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण के दौरान न तो सही मात्रा में सामग्री का इस्तेमाल किया गया और न ही रोलर से ठीक तरह से कॉम्पैक्शन किया गया। नतीजा यह हुआ कि सड़क बनने के महज तीन महीने बाद ही उसका वजूद खतरे में पड़ गया और वह उधड़ने लगी।

महकमे के दावों और जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का फर्क

जैसे ही सड़क उखड़ने का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा, वैसे ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अधिकारी हरकत में आ गए। आनन-फानन में तकनीकी टीम को मौके पर भेजा गया और सड़क के अलग-अलग हिस्सों से कोर कटिंग करवाकर लैब टेस्ट के लिए नमूने जुटाए गए। अधिकारियों ने आरडी 750 और 2480 मीटर की दूरी पर जाकर जांच-पड़ताल की।

विभाग के कार्यपालन अभियंता और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों का दावा है कि शुरुआती लैब टेस्ट में सब कुछ मानकों के अनुरूप पाया गया है। उनका कहना है कि बेस कोर्स, इमल्शन और डामर की मात्रा निर्धारित प्रावधानों के अनुसार ही इस्तेमाल की गई थी। इसके अलावा सीसी सड़क, डब्ल्यूबीएम और अर्थवर्क का कॉम्पैक्शन भी तकनीकी पैमानों पर खरा उतरा है। हालांकि, अधिकारी यह भी दलील दे रहे हैं कि सड़क के एक हिस्से को जानबूझकर किसी औजार या नुकीली चीज से नुकसान पहुंचाया गया है, जिससे विभाग की छवि खराब हो सके।

"सड़क निर्माण से जुड़े सभी तकनीकी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। मौके पर कोर कटिंग कराई गई है और लैब रिपोर्ट में बेस व डामर की मात्रा तय मानकों के मुताबिक पाई गई है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।" — विकास कुमार कौशिक, कार्यपालन अभियंता, पीएमजीएसवाय

ठेकेदार की कार्यशैली और प्रशासनिक सुस्ती पर उठ रहे सवाल

इस पूरी परियोजना का जिम्मा मेसर्स एनसी नाहर नामक ठेका कंपनी को सौंपा गया था। ग्रामीण इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी मुहैया कराने के लिए इस तरह के प्रोजेक्ट बेहद अहम माने जाते हैं, लेकिन जब इस तरह की लापरवाही सामने आती है तो पूरी व्यवस्था कटघरे में खड़ी हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठेकेदार की इस घटिया कार्यशैली पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले दिनों में यह सड़क पूरी तरह से गड्ढों में तब्दील हो जाएगी और जनता का करोड़ों रुपया पानी में बह जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कागजी कोर कटिंग और लैब टेस्ट के भरोसे लीपापोती करने के बजाय स्वतंत्र जांच कमेटी से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष पड़ताल कराई जानी चाहिए। जब ग्रामीण खुद यह साबित कर रहे हैं कि सड़क की गुणवत्ता बेहद घटिया है, तो महकमे को अपनी पीठ थपथपाने के बजाय जमीनी हकीकत को स्वीकार करना चाहिए। भ्रष्टाचार के इन काले बादलों के बीच अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोषियों के खिलाफ कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई होती है या फिर मामले को फाइलों में ही दफना दिया जाता है।

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