दिल्ली के पार्कों में धार्मिक आयोजनों के लिए बदले नियम, पांच साल पुरानी परंपरा होगी अनिवार्य
देश की राजधानी दिल्ली में सार्वजनिक पार्कों के इस्तेमाल को लेकर स्थानीय प्रशासन ने दिशा-निर्देशों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा उठाए गए इस कदम का सीधा असर उन आयोजकों पर पड़ेगा जो सामाजिक, सांस्कृतिक या धार्मिक कार्यक्रमों के लिए निगम के पार्कों की बुकिंग कराते हैं। अधिकारियों के अनुसार, अब व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से कड़े प्रावधान लागू किए गए हैं ताकि स्थानीय निवासियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
संशोधित नियमों के अनुसार, अब किसी भी पार्क में पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान या अन्य बड़े आयोजनों की अनुमति तभी दी जाएगी जब उस विशेष स्थल पर पिछले कम से कम पांच वर्षों से लगातार ऐसे कार्यक्रम आयोजित होते रहे हों। यदि कोई नया आवेदक किसी ऐसे पार्क में आयोजन की मांग करता है जहां इस प्रकार की कोई पूर्व परंपरा नहीं रही है, तो उसकी अर्जी पर विचार नहीं किया जाएगा। इस नीति का मुख्य उद्देश्य पार्कों के मूल स्वरूप को बचाना और स्थानीय निवासियों के लिए पार्क की उपलब्धता को सुनिश्चित करना है।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि आए दिन पार्कों में होने वाले आयोजनों के कारण हर3-चार दिन में बुकिंग को लेकर विवाद और स्थानीय स्तर पर असंतोष की शिकायतें मिल रही थीं। पार्कों में टहलने आने वाले वरिष्ठ नागरिकों और खेलकूद करने वाले बच्चों के लिए जगह कम पड़ जाती थी। इसे ध्यान में रखते हुए निगम ने यह स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं ऐतिहासिक या पारंपरिक स्थलों पर आयोजनों की छूट होगी जो लंबे समय से इस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल होते आ रहे हैं।
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डीडीए का बड़ा कदम: राजधानी के 300 पार्कों का सुरक्षा ऑडिट पूरा, बढ़ाई गई रोशनी और गश्त
एक तरफ जहां एमसीडी ने आयोजनों के नियमों को कड़ा किया है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने भी उपराज्यपाल के विशेष निर्देशों के बाद राजधानी के पार्कों की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करना शुरू कर दिया है। शाम के समय पार्कों में सुरक्षा को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए डीडीए ने एक व्यापक सुरक्षा अभियान चलाया है। इसके तहत अब तक लगभग 300 पार्कों का विस्तृत सुरक्षा ऑडिट पूरा कर लिया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि इन पार्कों में सुरक्षा का जायजा लेने के बाद कमियों को दूर किया जा रहा है। शाम ढलते ही पार्कों में अंधेरा होने के कारण असामाजिक तत्वों के जमावड़े की खबरें आम थीं, जिसपर रोक लगाने के लिए पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था (लाइटिंग) सुनिश्चित की जा रही है। इसके साथ ही, पार्कों के भीतर और आसपास सुरक्षा गार्डों की गश्त को भी बढ़ा दिया गया है ताकि सुबह और शाम की सैर करने वाले लोग पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर सकें।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखा गया है। डीडीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा ऑडिट के दौरान जिन पार्कों में चारदीवारी टूटी पाई गई थी या जहां मुख्य द्वारों पर सुरक्षा कर्मियों की कमी थी, वहां तत्काल प्रभाव से सुधार कार्य शुरू कर दिए गए हैं। सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और स्थानीय पुलिस थानों के साथ समन्वय स्थापित कर गश्त बढ़ाने की योजना पर भी तेजी से काम चल रहा है।
स्थानीय नागरिकों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) की क्या है प्रतिक्रिया
प्रशासन के इन नए और कड़े फैसलों पर स्थानीय लोगों और आरडब्ल्यूए की तरफ से मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। जहां एक ओर पार्कों में सुरक्षा बढ़ने और असामाजिक तत्वों पर नकेल कसने के फैसले का स्वागत किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर आयोजनों की पाबंदियों को लेकर कुछ स्थानीय समितियों में चर्चा का दौर जारी है। जानकारों का मानना है कि इन बदलावों से पार्कों का रखरखाव बेहतर होगा और हरित क्षेत्रों का दोहन रुकेगा।
स्थानीय स्तर पर पार्कों के रखरखाव और पर्यावरण संरक्षण को लेकर काम करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि दिल्ली के पार्क केवल आयोजन स्थल नहीं हैं, बल्कि यह शहर के फेफड़े हैं। ऐसे में वहां लगातार होने वाले आयोजनों से घास, पौधे और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है। पांच साल की पुरानी शर्त लागू होने से अनावश्यक दबाव कम होगा और केवल पारंपरिक मेलजोल वाले आयोजनों को ही जगह मिल पाएगी।
"राजधानी के पार्कों में आने वाले हर नागरिक की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। डीडीए के पार्कों का सुरक्षा ऑडिट पूरा हो चुका है और कमियों को तेजी से सुधारा जा रहा है ताकि परिवार और बच्चे बिना किसी डर के पार्कों का आनंद ले सकें।" — वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, डीडीए
पार्कों के भविष्य और प्रबंधन पर क्या होगा दीर्घकालिक असर
इन तमाम बदलावों से यह स्पष्ट होता है कि आने वाले समय में दिल्ली के पार्कों का उपयोग अधिक अनुशासित तरीके से होगा। नियमों के कड़े होने से अवैध कब्जों और अनाधिकृत बुकिंग पर लगाम लगेगी। वहीं, सुरक्षा ऑडिट के जरिए पार्कों में बुनियादी सुविधाओं जैसे कि पेयजल, शौचालय और रोशनी की स्थिति में भी सुधार देखने को मिल रहा है। प्रशासन का यह साझा प्रयास दिल्लीवासियों के दैनिक जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि नियमों के क्रियान्वयन के दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि स्थानीय नागरिकों और सांस्कृतिक समितियों के साथ किसी प्रकार का संवादहीनता का माहौल न बने। नियमों की पारदर्शिता से ही जनता और प्रशासन के बीच विश्वास मजबूत होगा और दिल्ली के हरित क्षेत्र सुरक्षित रह सकेंगे।








