बॉलीवुड के खूंखार खलनायक और अनसुने किस्से
बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे कलाकार हुए हैं जिन्होंने अपनी दमदार आवाज, खूंखार अंदाज और बेहतरीन अभिनय के दम पर सिल्वर स्क्रीन पर एक अलग ही छाप छोड़ी है। इनमें से एक नाम मुकेश ऋषि का भी है, जिन्हें दर्शक आज भी उनके खूंखार और खौफनाक किरदारों के लिए याद करते हैं। मुकेश ऋषि ने फिल्मों में भले ही विलेन की भूमिकाएं निभाई हों, लेकिन असल जिंदगी में उनका सफर और उनका अभिनेताओं के प्रति सम्मान बेहद प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने अपने करियर में एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्मों में काम किया और दर्शकों के दिलों में अपनी एक खास जगह बनाई।
मुकेश ऋषि के फिल्मी सफर में कई ऐसे किरदार शामिल हैं जिन्हें आज भी कल्ट क्लासिक माना जाता है। फिल्म 'गुंडा' का 'बुल्ला', 'जुड़वा' का 'रत्नलाल टाइगर', 'सूर्यवंशम' का 'देशराज ठाकुर', 'बंधन' का 'गजेंद्र' और 'घातक' में 'जीना' जैसे किरदारों ने पर्दे पर ऐसा खौफ पैदा किया कि दर्शक आज भी सिहर उठते हैं। लेकिन परदे पर क्रूर दिखने वाले ये कलाकार असल जिंदगी में बेहद शांत, जमीन से जुड़े और अपने सीनियर कलाकारों के प्रति अगाध श्रद्धा रखने वाले इंसान हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प वाकया उन्होंने अपने शुरुआती दिनों का साझा किया है, जब उनका सामना बॉलीवुड के 'हीमैन' धर्मेंद्र से हुआ था।
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साल 1992 की फिल्म 'हमला' और वह यादगार सेट
यह किस्सा साल 1992 में आई फिल्म 'हमला' की शूटिंग के दौरान का है। इस फिल्म में धर्मेंद्र मुख्य भूमिका में थे और उनके साथ मुकेश ऋषि भी एक महत्वपूर्ण खलनायक की भूमिका निभा रहे थे। यह वह दौर था जब मुकेश ऋषि इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रहे थे, जबकि धर्मेंद्र पहले से ही भारतीय सिनेमा के महानायक और सुपरस्टार बन चुके थे। सेट पर जब यह दोनों कलाकार आमने-सामने आए, तो एक ऐसी घटना घटी जिससे वहां मौजूद सभी लोग हैरान रह गए। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि एक नया अभिनेता किस तरह से इतने बड़े सुपरस्टार को नजरअंदाज कर सकता है।
मुकेश ऋषि ने एक इंटरव्यू के दौरान इस घटना से पर्दा उठाते हुए बताया कि जब वह सेट पर पहुंचे तो उन्होंने धर्मेंद्र को पहले ही देख लिया था। इसके बावजूद उन्होंने जानबूझकर धर्मेंद्र से मिलने या बात करने की कोशिश नहीं की। उस दौर के सुपरस्टार को इस तरह से इग्नोर करना कोई छोटी बात नहीं थी। सेट पर मौजूद अन्य लोग और क्रू मेंबर यह सोचकर हैरान थे कि आखिर मुकेश ऋषि के मन में चल क्या रहा है। क्या वे सच में अपने मिजाज के चलते ऐसा कर रहे थे या इसके पीछे कोई गहरी वजह थी?
बचपन के आइडल को देखकर घबरा गए थे मुकेश ऋषि
इस अजीब व्यवहार के पीछे की वजह बताते हुए मुकेश ऋषि ने खुद खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र उनके लिए सिर्फ एक सह-कलाकार नहीं, बल्कि उनके बचपन के हीरो थे। मुकेश ऋषि के मुताबिक, उनके शुरुआती दिनों में धर्मेंद्र उनके सबसे बड़े आइडल हुआ करते थे और उनकी अलमारी में धर्मेंद्र के पोस्टर चिपके रहते थे। ऐसे में जब उन्हें अपने ही आइडल के साथ स्क्रीन शेयर करने का मौका मिला, तो उनके मन में एक अजीब सा संकोच और घबराहट पैदा हो गई।
"धर्मेंद्र जी मेरे लिए बहुत बड़े स्टार रहे हैं। उनके पोस्टर मेरी अलमारी में लगे होते थे। फिल्म 'हमला' में मैं उनके साथ काम कर रहा था और यह हमारा पहला शूट था। अगर मैं शूट से पहले उनसे मिल लेता, तो मैं उस स्टारडम और सम्मान के प्रभाव से बाहर ही नहीं आ पाता।" — मुकेश ऋषि, अभिनेता
यही वजह थी कि मुकेश ऋषि ने अपने किरदार की गरिमा और सीन की डिमांड को ध्यान में रखते हुए खुद पर काबू रखा। उन्हें डर था कि अगर वे धर्मेंद्र से पहले मिल लेते, तो कैमरे के सामने उनके मन में जो झिझक या फैन मोमेंट का असर होता, वह उनके अभिनय को कमजोर कर देता। एक प्रोफेशनल एक्टर की तरह उन्होंने पहले अपनी लाइनें याद कीं, अपने सीन पर पूरा फोकस किया और बिना किसी व्यवधान के अपनी पहली शूटिंग पूरी की।
शूट खत्म होते ही धर्मेंद्र के पैरों में गिर पड़े थे मुकेश ऋषि
जैसे ही फिल्म 'हमला' का वह महत्वपूर्ण सीन पूरा हुआ और डायरेक्टर ने 'कट' कहा, मुकेश ऋषि का सारा तनाव छूमंतर हो गया। उन्होंने बिना एक पल गंवाए सीधा रुख किया उस शख्स की तरफ, जिनके वे बचपन से दीवाने थे। मुकेश ऋषि सीधे धर्मेंद्र के पास गए और उनके पैरों में गिर पड़े। उन्होंने बड़े ही अदब के साथ धर्मेंद्र को वह सारी बात बताई कि उन्होंने क्यों उनके साथ ऐसा बर्ताव किया और क्यों वे शूट से पहले उनसे मिलने से बच रहे थे।
धर्मेंद्र एक मंझे हुए और बड़े दिल वाले कलाकार हैं। उन्होंने मुकेश ऋषि की इस बात को बहुत ही सकारात्मक रूप से लिया और उनकी ईमानदारी तथा अभिनय के प्रति निष्ठा की तारीफ की। धर्मेंद्र समझ गए थे कि एक नए कलाकार के मन में उनके प्रति कितना सम्मान और डर था। इस घटना के बाद दोनों के बीच का रिश्ता और भी ज्यादा मजबूत हो गया। इसके बाद मुकेश ऋषि और धर्मेंद्र ने कई फिल्मों में एक साथ स्क्रीन साझा की, जिनमें 'जियो शान से' (1997), 'जुल्मोसितम' (1998), 'न्यायदाता' (1999) और 'लौह पुरुष' (1999) जैसी फिल्में प्रमुख रूप से शामिल हैं।
सिनेमा जगत में आपसी सम्मान का अनूठा उदाहरण
यह किस्सा आज की पीढ़ी के कलाकारों के लिए भी एक बड़ा सबक है कि कैसे सीनियर कलाकारों के प्रति सम्मान और अपने काम के प्रति ईमानदारी को एक साथ साधा जाता है। मुकेश ऋषि ने साबित कर दिया कि एक अच्छा कलाकार वही है जो कैमरे के सामने अपने किरदार के साथ सौ फीसदी न्याय करे, चाहे सामने कितना भी बड़ा सुपरस्टार क्यों न खड़ा हो। धर्मेंद्र और मुकेश ऋषि का यह किस्सा आज भी बॉलीवुड के गलियारों में बड़े ही प्यार और सम्मान के साथ याद किया जाता है, जो यह सिखाता है कि सफलता के साथ-साथ विनम्रता और बड़ों का आदर करना ही एक सच्चे कलाकार की पहचान होती है।






