पड़ोसी देश नेपाल की न्यायपालिका और राजनीतिक गलियारों में उस समय सनसनी फैल गई जब देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश को अचानक कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने अपने शिकंजे में ले लिया। काठमांडू की क्राइम ब्रांच यूनिट ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए पूर्व मुख्य न्यायाधीश चोलेन्द्र शमशेर जंग बहादुर राणा को उनके निजी आवास से हिरासत में ले लिया। इस घटना के बाद से ही कूटनीतिक और न्यायिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है कि आखिर इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के पीछे की असली वजह क्या है।
काठमांडू क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई
रविवार की सुबह तड़के काठमांडू पुलिस की अपराध शाखा की एक विशेष टीम ने महाराजगंज इलाके में स्थित चोलेन्द्र शमशेर के घर पर दस्तक दी। अधिकारियों के अनुसार, उनके खिलाफ स्थानीय थाने और क्राइम ब्रांच में कुछ गंभीर शिकायतें दर्ज कराई गई थीं, जिसके आधार पर यह कानूनी कदम उठाया गया है। हालांकि, शुरुआती दौर में पुलिस अधिकारियों ने उन शिकायतों की विषय-वस्तु और आरोपों के बारे में मीडिया के सामने खुलकर कुछ भी कहने से परहेज किया है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश से जुड़ी शिकायतों की गहन पड़ताल की जा रही है और जल्द ही इस मामले में तमाम दस्तावेजों और तथ्यों को सार्वजनिक किया जाएगा। फिलहाल उन्हें पूछताछ और शुरुआती औपचारिकताएं पूरी करने के लिए सुरक्षित हिरासत में रखा गया है। इस कार्रवाई ने नेपाल के प्रशासनिक और राजनीतिक तंत्र में हिला कर रख दिया है, क्योंकि किसी देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुखिया रहे शख्स पर इस तरह की कार्रवाई होना बेहद दुर्लभ और संवेदनशील मामला माना जाता है।
संबंधित खबरें
महाभियोग और निलंबन का लंबा इतिहास
चोलेन्द्र शमशेर जंग बहादुर राणा का कार्यकाल हमेशा से विवादों और चर्चाओं के केंद्र में रहा है। जनवरी 2019 में जब उन्होंने नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला था, तब देश की न्यायिक व्यवस्था में बड़े सुधारों की उम्मीद की जा रही थी। हालांकि, फरवरी 2022 में उनके खिलाफ संसद में महाभियोग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई, जिसके चलते संवैधानिक प्रावधानों के तहत वे स्वतः ही अपने पद से निलंबित हो गए थे।
इस महाभियोग प्रस्ताव के आने के बाद से ही वे अदालती लड़ाइयों और प्रशासनिक जांच के घेरे में आ गए थे। उनके कार्यकाल के दौरान न्यायपालिका के भीतर वकीलों और जजों के बीच आपसी कलह खुलकर सामने आई थी, जिसने नेपाल की राजनीति में भी भूचाल ला दिया था। लंबे समय तक चली इन प्रशासनिक और कानूनी लड़ाइयों ने उनके पूरे करियर पर एक बड़ा दाग लगा दिया था, जिसका असर उनके सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
संसद भंग करने के फैसले से जुड़े थे बड़े राजनीतिक समीकरण
पूर्व मुख्य न्यायाधीश राणा के करियर का सबसे बड़ा मोड़ वह था जब उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के उस विवादास्पद फैसले को पलट दिया था जिसमें संसद को भंग कर दिया गया था। राणा की अध्यक्षता वाली संवैधानिक बेंच ने ओली के फैसले को पूरी तरह से असंवैधानिक करार देते हुए खारिज कर दिया था। इस ऐतिहासिक फैसले ने नेपाल की राजनीति की दिशा ही बदल दी थी और देश में नए राजनीतिक गठजोड़ का रास्ता साफ हुआ था।
उसी फैसले के परिणामस्वरूप नेपाली कांग्रेस और माओवादी पार्टियों के गठबंधन के नेता शेरबहादुर देउवा के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ था। जानकारों का मानना है कि उस दौर के फैसलों ने नेपाल की राजनीति में कई ऐसे धड़े खड़े कर दिए थे जो अदालत के फैसलों से सीधे तौर पर प्रभावित हुए थे। राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच उस समय बने तनावपूर्ण रिश्ते आज भी अप्रत्यक्ष रूप से इन घटनाओं को प्रभावित कर रहे हैं।
हालिया कानूनी राहत और पेंशन विवाद
गिरफ्तारी से कुछ समय पहले ही चोलेन्द्र शमशेर को न्यायालयी मोर्चे पर एक बड़ी राहत मिली थी। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनके पेंशन और रिटायरमेंट से जुड़े तमाम बकाये पैसों को रिलीज करने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह माना था कि उनके खिलाफ लाया गया महाभियोग प्रस्ताव अपने तार्किक और संवैधानिक अंजाम तक नहीं पहुंच पाया था, क्योंकि संसद का कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह प्रस्ताव निष्प्रभावी हो गया था।
"न्यायपालिका की गरिमा और कानून की सर्वोच्चता सर्वोपरि है, लेकिन इस तरह के मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना जांच एजेंसियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है ताकि न्याय प्रणाली पर आम जनता का भरोसा कायम रहे।" — कानूनी विश्लेषक, काठमांडू
इस वित्तीय और प्रशासनिक राहत के तुरंत बाद अचानक पुलिस द्वारा उन्हें हिरासत में लिया जाना इस बात का संकेत है कि उनके खिलाफ कानूनी शिकंजा अभी पूरी तरह से कसा हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्राइम ब्रांच की पूछताछ में कौन-कौन से नए तथ्य सामने आते हैं और नेपाल की न्यायपालिका इस हाई-प्रोफाइल मामले में क्या रुख अपनाती है।








