डूरंड लाइन: क्षेत्रीय कूटनीति और दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में एक बार फिर खूनखराबे की गूंज सुनाई दे रही है। 'द फ्रीलान्स' की ऑन-द-ग्राउंड इन्वेस्टिगेटिव डेस्क को मिले पुष्ट इनपुट और विभिन्न सीमावर्ती स्रोतों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान की संप्रभुता को खुली चुनौती देते हुए एक बार फिर हवाई हमले किए हैं। इस बार कुनार और हेलमंद प्रांतों को निशाना बनाया गया, जहां सो रहे आम नागरिकों के घरों पर मिसाइलें गिराई गईं। इस कायराना और खूनी कार्रवाई में 9 निर्दोष लोगों की जान चली गई है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और मासूम बच्चे शामिल हैं।
इस साल का 11वां हमला: गहराता सामरिक संकट
हमारी पड़ताल बताती है कि यह कोई छिटपुट घटना नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है। इस वर्ष यानी 2024-25 के मौजूदा चक्र में पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा अफगान सीमा के भीतर यह 11वां हमला दर्ज किया गया है। लगातार बढ़ती इन सैन्य कार्रवाइयों ने काबुल और इस्लामाबाद के बीच के रिश्तों को उस मोड़ पर ला खड़ा किया है जहां से कूटनीतिक संवाद के रास्ते लगभग बंद होते दिख रहे हैं। पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान भले ही इन हमलों को सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई बता रहा हो, लेकिन हकीकत में इसका सबसे बड़ा शिकार आम अफगान नागरिक बन रहे हैं।
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कुनार और हेलमंद में तबाही के निशान
घटनास्थल से मिल रही रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुनार और हेलमंद के रिहायशी इलाकों में आधी रात को अचानक आसमान से मौत बरसी। चश्मदीदों का कहना है कि लड़ाकू विमानों ने दो आवासीय मकानों को पूरी तरह मलबे के ढेर में बदल दिया। धमाके इतने जोरदार थे कि आसपास के कई किलोमीटर तक की धरती हिल गई। मलबे के नीचे दबे शवों को निकालने का काम स्थानीय लोगों और राहत कर्मियों ने भारी मशक्कत के बाद किया। मरने वालों में अधिकांश महिलाएं और बच्चे हैं, जिनकी इस संघर्ष से दूर-दूर तक कोई वैचारिक या सैन्य संलिप्तता नहीं थी।
तालिबान प्रशासन की कड़ी प्रतिक्रिया और भविष्य का असर
इस ताजा खूनखराबे के बाद अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान प्रशासन ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। अफगान रक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि इस संप्रभुता के उल्लंघन का माकूल जवाब दिया जाएगा। डूरंड लाइन के दोनों तरफ सैनिकों की गश्त बढ़ा दी गई है और भारी हथियारों की तैनाती की जा रही है। यदि कूटनीतिक स्तर पर तत्काल संयम नहीं बरता गया, तो यह छिटपुट हवाई हमले एक पूर्णकालिक सैन्य संघर्ष का रूप ले सकते हैं, जिसका खामियाजा पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र को भुगतना पड़ सकता है।
"सीमा पार से होने वाली ऐसी एकतरफा एयरस्ट्राइक्स न केवल अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन हैं, बल्कि यह क्षेत्र में मानवीय संकट को और अधिक विकराल बना रही हैं। निर्दोष बच्चों और महिलाओं को निशाना बनाया जाना मानवता के खिलाफ अपराध है।" - क्षेत्रीय सुरक्षा विश्लेषक
हमारी ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन जारी है। हम सीमावर्ती इलाकों से आ रहे हर अपडेट और सैन्य हलचल पर पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि पाठकों तक सच की तस्दीक पहुंचाई जा सके।








