द फ्रीलान्स की विशेष ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट। पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे भीषण आंतरिक और बाहरी दबावों से गुजर रहा है। भू-राजनीतिक मानचित्र पर इस्लामाबाद की पकड़ तेजी से ढीली पड़ती दिख रही है, और इसका सबसे बड़ा प्रमाण पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और बलूचिस्तान से आ रही झकझोर देने वाली खबरें हैं। एक तरफ जहां स्थानीय जनता पाकिस्तानी फौज के दमनकारी चक्र से तंग आ चुकी है, वहीं सशस्त्र विद्रोही संगठन भी अब सीधी और आक्रामक टक्कर पर उतर आए हैं।
PoK में फूटा सब्र का बांध: LoC पार कर भारत आने की उठ रही मांग
मुजफ्फराबाद से लेकर गिलगित-बाल्टिस्तान तक, पाकिस्तानी सेना की ज्यादतियों के खिलाफ जनता सड़कों पर उतर आई है। दशकों से बुनियादी अधिकारों से वंचित और सेना के अत्याचारों को झेल रहे नागरिकों का गुस्सा अब चरम पर है। स्थानीय रिपोर्ट्स और खुफिया इनपुट्स के मुताबिक, PoK के कई हिस्सों में लोग इतने आक्रोशित हैं कि वे नियंत्रण रेखा (LoC) की तारबंदी को खुद ही उखाड़ फेंकने की तैयारी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का यह जनसैलाब अब सीधे तौर पर भारत की सीमाओं की ओर रुख करने की बात कर रहा है, जो पाकिस्तानी सियासत और फौज के लिए एक सुरक्षात्मक दुस्वप्न जैसा है।
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बलूचिस्तान में BLA की महिला ब्रिगेड का कहर
दूसरी ओर, दक्षिण-पश्चिम में बलूचिस्तान के मोर्चे पर पाकिस्तानी सेना को एक और बड़ा सामरिक झटका लगा है। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) की महिला ब्रिगेड, जिसे स्थानीय स्तर पर 'शेरनियां' कहा जाता है, ने पाकिस्तानी फौज पर घातक हमला बोला है। सामने आए वीडियो और रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सटीक और भीषण कार्रवाई में पाकिस्तानी सेना के कम से कम 9 सैनिक मारे गए हैं। BLA द्वारा इस प्रकार की महिला लड़ाका यूनिट का सक्रिय होना और सैन्य चौकियों को नेस्तनाबूद करना यह साबित करता है कि पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान की खुफिया और मैदानी पकड़ कितनी कमजोर हो चुकी है।
सैन्य तानाशाही के खिलाफ सुलगता असंतोष
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की रीढ़ उसकी वही सेना है जो लंबे समय से देश के संसाधनों का दोहन करती आई है और असंतोष को कुचलती रही है। लेकिन अब PoK का नागरिक असंतोष और बलूच विद्रोहियों का सशस्त्र प्रतिरोध इस बात का संकेत है कि जनता अब डरने को तैयार नहीं है। मानवाधिकारों के उल्लंघन, भारी महंगाई, और जबरन गायब किए जाने (Enforced Disappearances) की घटनाओं ने सामान्य नागरिकों के दिलों से फौज का खौफ पूरी तरह मिटा दिया है।
सीमाओं पर बढ़ता तनाव और भविष्य की भू-राजनीति
इन दोनों मोर्चों पर घटित हो रही घटनाएं दक्षिण एशिया के रणनीतिक समीकरणों को गहराई से प्रभावित कर सकती हैं। यदि PoK में हालात बेकाबू होते हैं और जनता वास्तव में LoC की तरफ बढ़ती है, तो भारतीय सुरक्षा बलों और कूटनीति के लिए भी यह एक नई और संवेदनशील स्थिति होगी। वहीं, बलूचिस्तान में विद्रोही तेवर तेज होने से पाकिस्तानी फौज का मनोबल टूट रहा है। 'द फ्रीलान्स' की इस पड़ताल से साफ है कि पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अब ताश के पत्तों की तरह बिखरने की कगार पर है।






