पाकिस्तान से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक निजी स्कूल की जर्जर छत अचानक ढह जाने से कम से कम 27 मासूम बच्चों और एक महिला टीचर की जान चली गई। इस घटना ने एक बार फिर शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोलकर रख दी है।
अचानक मलबे में तब्दील हुआ स्कूल, चारों तरफ मच गया कोहराम
घटना उस समय हुई जब स्कूल परिसर में रोजाना की तरह कक्षाएं चल रही थीं। बच्चे पढ़ाई में व्यस्त थे और शिक्षक उन्हें पढ़ाने में जुटे थे, तभी अचानक स्कूल की छत भरभरा कर नीचे गिर पड़ी। छत के मलबे के नीचे कई बच्चे और स्कूल स्टाफ दब गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े।
रेस्क्यू अभियान और अस्पतालों में इमरजेंसी
घटना की सूचना मिलते ही रेस्क्यू 1122 की टीमें और सेना के जवान तुरंत मौके पर पहुंचे। राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर शुरू किया गया। मलबे को हटाकर फंसे हुए बच्चों और शिक्षकों को बाहर निकाला गया और नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया। अधिकारियों के मुताबिक, अस्पताल पहुंचने पर 27 बच्चों और एक महिला टीचर को मृत घोषित कर दिया गया। जान गंवाने वाले सभी बच्चे 13 साल या उससे कम उम्र के थे। कई घायल बच्चों की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जिसके चलते अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस हृदयविदारक हादसे ने कई परिवारों से उनके चिराग छीन लिए हैं। जर्जर इमारतों में चल रहे स्कूलों की सुरक्षा पर अब अभिभावक और आम नागरिक कड़े सवाल खड़े कर रहे हैं। बिना सुरक्षा मानकों के चल रहे ऐसे संस्थानों पर कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है।
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