नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजनीति में इन दिनों 'रिजीम चेंज' यानी सत्ता परिवर्तन को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के एक बयान पर कांग्रेस पार्टी ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। राजनाथ सिंह ने कुछ दिन पहले एक मंच से कहा था कि विपक्ष का मुख्य उद्देश्य देश में केवल सत्ता बदलना है। उनके इस बयान के बाद सियासी गलियारों में बहस तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने इसे लेकर सरकार पर जोरदार हमला बोला है और कहा है कि लोकतंत्र में चुनाव के जरिए सत्ता बदलना ही मुख्य काम होता है।
इस पूरे विवाद के केंद्र में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा हैं। पवन खेड़ा ने राजनाथ सिंह के बयान पर तंज कसते हुए उन्हें 'जग्गा जासूस' कह दिया। खेड़ा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि आखिर राजनाथ सिंह इस तरह की बातें क्यों कर रहे हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि हम गर्व से कहते हैं कि हमारा मकसद रिजीम चेंज है। कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि यह बदलाव किसी गलत तरीके से नहीं बल्कि देश के संविधान और चुनाव के माध्यम से लाया जाएगा।
चुनाव के जरिए सत्ता बदलने पर क्यों छिड़ी बहस?
कांग्रेस पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष का काम ही सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ आवाज उठाना होता है। पवन खेड़ा ने सवाल उठाया कि अगर विपक्ष चुनाव लड़कर सरकार बदलना चाहता है तो इसमें आपत्ति क्यों होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की जनता महंगाई, बेरोजगारी और तमाम मुद्दों से परेशान है। ऐसे में जनता के समर्थन से चुनाव जीतकर सरकार बदलना ही विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है। कांग्रेस ने इसे लेकर केंद्र सरकार पर डरने का आरोप भी लगाया है।
दूसरी तरफ सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी का मानना है कि विपक्ष का यह रवैया देशहित में नहीं है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है। वे केवल सरकार को हटाने के लिए साजिशें रच रहे हैं। राजनाथ सिंह के बयान को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है जहां उन्होंने विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाए थे। दोनों पक्षों के बीच चल रहे इस तीखे संवाद ने राजनीतिक तापमान को काफी बढ़ा दिया है। आगामी चुनावों को देखते हुए यह मुद्दा और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
राजनाथ सिंह के बयान पर कांग्रेस का खुला ऐलान
पवन खेड़ा ने अपने तीखे तेवर जारी रखते हुए यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी इस रास्ते से पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि हम लगातार जनता के बीच जा रहे हैं। जनता की समस्याओं को उठा रहे हैं और आने वाले समय में भी बदलाव लाकर रहेंगे। कांग्रेस नेताओं का यह रुख साफ करता है कि वे इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं हैं। वे इसे जनता के लोकतांत्रिक अधिकार के रूप में देख रहे हैं।
जमीनी स्तर पर भी इस बयानबाजी का असर देखने को मिल रहा है। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है। दोनों ही दल इस पर अपनी-अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस जहां इसे लोकतंत्र की खूबसूरती बता रही है, वहीं भाजपा इसे विपक्ष की सत्ता की भूख करार दे रही है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और जमीनी अपडेट आप तक पहुंचाती रहेगी।
राजनीतिक दलों की आगे की रणनीति और जनता का रुख
इस ताजा विवाद के बाद दोनों प्रमुख दलों ने अपनी कमर कस ली है। कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। सोशल मीडिया से लेकर टीवी डिबेट तक इसी मुद्दे पर चर्चा हो रही है। आम जनता भी इस बात को लेकर अपने अलग-अलग विचार रख रही है। एक तरफ जहां सरकार के समर्थक इसे स्थिरता से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं विपक्ष के समर्थक बदलाव को समय की मांग बता रहे हैं।
आने वाले चुनावी राज्यों में इस बयान का क्या असर होगा, यह देखने वाली बात होगी। लेकिन यह साफ है कि 'रिजीम चेंज' का यह बयान भारतीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। नेता अपनी सुविधानुसार इसके मायने निकाल रहे हैं। द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि जनता इन बयानों के बीच अपनी असल समस्याओं के समाधान की उम्मीद लगाए बैठी है। राजनीति के इस दंगल में देखना यह है कि ऊंट किस करवट बैठता है।




