वाशिंगटन/नई दिल्ली — 'द फ्रीलान्स' की विशेष रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में होने वाले मिड-टर्म चुनावों से ठीक पहले अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा तनाव पैदा हो गया है। पेंटागन ने अपनी सेना को ईरान के खिलाफ संभावित बड़े हमलों की तैयारी करने का सीधा आदेश दे दिया है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी इस बड़ी हलचल के बाद दुनिया भर की खुफिया एजेंसियां और कूटनीतिक विशेषज्ञ सतर्क हो गए हैं। अमेरिकी प्रशासन की ओर से हालांकि अभी तक किसी तय तारीख का ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन सैन्य तैयारियों का यह निर्देश इस बात का संकेत है कि मध्य पूर्व में स्थिति किसी भी वक्त बदल सकती है।
देश और दुनिया के प्रमुख मीडिया घरानों से सामने आ रही रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन ने इस गोपनीय और गंभीर रणनीतिक कदम को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शीर्ष सैन्य अधिकारियों के बीच हुई बैठकों के बाद सेना को अपनी पोजीशन मजबूत करने को कहा गया है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे पुराने तनाव के बीच इस आदेश को बहुत बड़ा भू-राजनीतिक कदम माना जा रहा है। मिड-टर्म चुनावों से पहले इस तरह की सैन्य गतिविधि का घरेलू राजनीतिक समीकरणों पर भी गहरा असर पड़ सकता है, जिस पर विश्लेषकों की पैनी नजर बनी हुई है।
व्हाइट हाउस और पेंटागन की रणनीति के मायने
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार इस पूरी योजना के तहत मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी युद्धपोतों, विमान वाहक पोतों और सैन्य अड्डों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सेना का पूरी तरह तैयार रहना जरूरी है। अमेरिका के इस रुख से खाड़ी देशों में भी चिंता का माहौल बन गया है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर अमेरिका लंबे समय से आक्रामक रुख अपनाता रहा है, लेकिन चुनाव के मुहाने पर इस तरह की तैयारी ने युद्ध की आशंकाओं को हवा दे दी है.
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि अमेरिकी घरेलू राजनीति में मिड-टर्म चुनावों का बहुत बड़ा महत्व होता है। कई बार सरकारें जनता का ध्यान भटकाने या अपनी ताकत दिखाने के लिए ऐसे बड़े कदम उठाती हैं। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का एक वर्ग यह भी मान रहा है कि यह सिर्फ ईरान पर दबाव बनाने की एक कूटनीतिक चाल हो सकती है, ताकि तेहरान को किसी भी आक्रामक कदम से रोका जा सके। फिर भी, सेना को सीधे तौर पर हमले की तैयारी का आदेश देना एक बहुत गंभीर बात है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता है।
ईरान की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर असर
पेंटागन के इस ताजा निर्देश के बाद तेहरान की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रिया आने की पूरी संभावना जताई जा रही है। ईरानी सैन्य नेतृत्व पहले ही चेतावनी दे चुका है कि यदि अमेरिका या उसके सहयोगी देशों ने किसी भी तरह का दुस्साहस किया, तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। ईरान के पास भी अपनी रक्षा के लिए मिसाइल और ड्रोन तकनीक का बड़ा जखीरा है, जिससे क्षेत्र में संघर्ष छिड़ने पर भारी तबाही मच सकती है। संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के देश इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद बारीकी से नजर रख रहे हैं और दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं।
वैश्विक बाजार और कच्चे तेल की कीमतों पर भी इस तनाव का असर साफ दिखने लगा है। खाड़ी के रास्तों से होने वाले तेल के व्यापार पर यदि कोई संकट आता है, तो पूरी दुनिया में महंगाई और ईंधन संकट बढ़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से ही आयात करता है। 'द फ्रीलान्स' की टीम इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही पेंटागन या व्हाइट हाउस की तरफ से कोई नया आधिकारिक बयान आएगा, पाठकों तक सबसे पहले सटीक जानकारी पहुंचाई जाएगी।
आगे क्या होगा और किन बातों पर रखनी होगी नजर
आने वाले कुछ दिन अमेरिकी राजनीति और मध्य पूर्व के भविष्य के लिए बहुत ज्यादा संवेदनशील रहने वाले हैं। मिड-टर्म चुनावों के नजदीक आने के साथ ही राजनीतिक बयानबाजी और सैन्य गतिविधियां दोनों तेज हो सकती हैं। आम जनता और निवेशकों के लिए यह समय बेहद सावधानी से हर खबर पर नजर रखने का है। 'द फ्रीलान्स' अपने पाठकों से वादा करता है कि वह बिना किसी सनसनीखेज दावे के केवल पुष्ट और जमीनी तथ्यों पर आधारित सच ही सामने लाता रहेगा। इस अंतरराष्ट्रीय तनाव के हर नए पहलू से हम आपको लगातार अवगत कराते रहेंगे।






