राजधानी लखनऊ में गोमती नदी का उफान अब आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण पानी शहर के कई रिहायशी इलाकों और मैदानों में घुस गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि जो मैदान मात्र दो दिन पहले तक युवाओं की खेल गतिविधियों और क्रिकेट के रोमांच से गुलजार हुआ करते थे, वे आज पानी में डूबे नजर आ रहे हैं। द फ्रीलान्स की टीम ने जब मौके पर पहुंचकर जायजा लिया, तो पाया कि जलभराव के कारण लोगों का घरों से बाहर निकलना और पैदल चलना भी दूभर हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जलस्तर में अचानक हुई इस बढ़ोतरी ने उन्हें संभलने का मौका तक नहीं दिया। नदी के किनारे बसे इलाकों में पानी घरों की निचली मंजिलों तक पहुंच चुका है। लोग अपनी जरूरी चीजों को समेटकर सुरक्षित स्थानों की तरफ जाने को मजबूर हैं। प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच रही हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, लेकिन पानी का तेज बहाव राहत और बचाव कार्यों में बड़ी रुकावट बन रहा है। स्थानीय प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की है।
मैदानों पर गोमती का कब्जा और खेलकूद ठप
गोमती के इस उफान ने शहर के खेल प्रेमियों को भी निराश कर दिया है। जिन पार्कों और मैदानों में सुबह-शाम बच्चों और युवाओं की भीड़ हुआ करती थी, वहां अब चारों तरफ सिर्फ पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। क्रिकेट की पिचें और आउटफील्ड पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं। आसपास के दुकानदारों और छोटे कारोबारियों का कहना है कि पानी भरने से उनका रोजमर्रा का काम पूरी तरह ठप हो गया है। ग्राहकों का आना-जाना बंद हो गया है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है और लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जल निकासी के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई सड़कों पर पानी भर जाने के कारण यातायात भी प्रभावित हुआ है। लोग पानी के बीच से गुजरने को मजबूर हैं, जिससे दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। मौसम विभाग की चेतावनियों को देखते हुए आने वाले दिनों में प्रशासन की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
प्रशासनिक दावे और राहत कार्यों की जमीनी हकीकत
हालात से निपटने के लिए नगर निगम और जिला प्रशासन ने कुछ इलाकों में नावें चलानी शुरू कर दी हैं। इसके साथ ही प्रभावित लोगों तक खाने के पैकेट और पीने का पानी पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, कई इलाकों के लोगों का यह भी आरोप है कि समय पर मदद न मिलने के कारण उन्हें खुद ही अपने स्तर पर इंतजाम करने पड़ रहे हैं। बिजली के पोल और ट्रांसफॉर्मर पानी के करीब आने से सुरक्षा की दृष्टि से कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी काट दी गई है, जिससे लोगों की परेशानी और ज्यादा बढ़ गई है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, अगर बारिश का दौर और ऊपरी बांधों से पानी छोड़ने का सिलसिला जारी रहा, तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। फिलहाल शहर के तटवर्ती इलाकों में दहशत का माहौल है और लोग लगातार बदलते जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन की ओर से हेल्प डेस्क बनाए गए हैं, ताकि आपात स्थिति में लोगों को तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके, लेकिन जमीनी स्तर पर राहत और बचाव कार्य को अभी और तेज करने की सख्त जरूरत है।
आने वाले दिनों की चुनौतियां और एहतियाती कदम
नदी के किनारे बने धार्मिक स्थलों और आश्रमों तक भी पानी पहुंच चुका है, जिससे आवागमन के रास्ते बंद हो गए हैं। संतों और स्थानीय निवासियों को भी आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस आपदा ने एक बार फिर शहर के ड्रेनेज सिस्टम और गोमती के किनारे हुए अवैध निर्माणों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पर्यावरणविदों का मानना है कि नदी के प्राकृतिक प्रवाह में रुकावट के कारण ही बाढ़ का पानी इतनी तेजी से रिहायशी इलाकों में फैल रहा है।
आगामी दिनों में यदि जलस्तर कम नहीं होता है, तो बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों को भी प्रभावित क्षेत्रों में तैनात करने की मांग उठ रही है ताकि समय रहते पानी से होने वाली बीमारियों से लोगों को बचाया जा सके। द फ्रीलान्स इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए रखेगा और पल-पल की जमीनी अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा।






