पेट्रोल और डीजल की कीमतों में निजी कंपनी का बड़ा इजाफा
देशभर में ईंधन की खुदरा बिक्री करने वाली प्रमुख निजी कंपनी नायरा एनर्जी ने वाहन चालकों को एक बड़ा झटका दिया है। कंपनी ने पेट्रोल और डीजल के दामों में सीधी और भारी बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले के तहत पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। यह नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं, जिसका सीधा असर देश के विभिन्न हिस्सों में फैले इस निजी कंपनी के पंपों पर ईंधन भरवाने वाले उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
बाजार सूत्रों के अनुसार, इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों की वैश्विक कीमतों में आया उछाल है। नायरा एनर्जी देश के उन चुनिंदा निजी ईंधन प्रदाताओं में शामिल है जिनकी बाजार में मजबूत पकड़ है। कंपनी के इस कदम के बाद से ग्राहकों को अब अपनी गाड़ियों की टंकी फुल कराने के लिए पहले से अधिक रकम चुकानी होगी। इससे पहले भी इसी साल मार्च के महीने में इसी निजी कंपनी ने सबसे पहले कीमतों में संशोधन किया था, जिसके बाद अन्य कंपनियों पर भी दबाव बढ़ गया था।
फिलहाल देश भर में नायरा एनर्जी के सात हजार से ज्यादा फ्यूल स्टेशन संचालित हो रहे हैं। इन सभी केंद्रों पर संशोधित और बढ़ी हुई दरें लागू हो चुकी हैं। कंपनी की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि वैश्विक स्तर पर लागत बढ़ने की वजह से यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था ताकि परिचालन संतुलन बनाए रखा जा सके।
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सरकारी तेल कंपनियों के उपभोक्ताओं को मिली बड़ी राहत
एक तरफ जहां निजी क्षेत्र की कंपनी ने कीमतें बढ़ा दी हैं, वहीं देश की तीनों बड़ी सरकारी तेल कंपनियों यानी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने आम जनता को बड़ी राहत दी है। सरकारी कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर आज भी ईंधन के दाम पुराने स्तर पर ही बने हुए हैं। इनमें किसी भी प्रकार का कोई इजाफा नहीं किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी कंपनियों का यह फैसला आम चुनाव या अन्य आर्थिक वजहों के बजाय बाजार की लंबी अवधि की रणनीतियों का हिस्सा हो सकता है। चूंकि देश के अधिकांश नागरिक सरकारी पेट्रोल पंपों से ही ईंधन खरीदते हैं, इसलिए कीमतों में स्थिरता बने रहने से फिलहाल आम आदमी को बड़ी महंगाई से राहत मिली है। हालांकि, बाजार विश्लेषक यह भी मान रहे हैं कि यदि वैश्विक बाजार में अस्थिरता का दौर लंबा चला, तो सरकारी कंपनियां भी ज्यादा दिनों तक पुराने दामों पर टिके रहने में असमर्थ हो सकती हैं।
सरकारी पंपों पर कीमतें स्थिर रहने से परिवहन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी फौरी तौर पर राहत मिली है। यदि सरकारी स्तर पर भी दाम बढ़ाए जाते, तो रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम भी आसमान छूने लगते। फिलहाल देश के महानगरों समेत तमाम छोटे शहरों में सरकारी दरों पर ही पेट्रोल और डीजल मिल रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का बढ़ता दबाव
ईंधन की खुदरा कीमतों में इस उतार-चढ़ाव के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल का खेल सबसे अहम है। पिछले काफी समय से इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल का भाव 90 डॉलर प्रति बैरल या उससे ऊपर के स्तर पर स्थिर बना हुआ है। दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन में बाधाओं के चलते कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो वैश्विक स्तर पर किसी बड़े युद्ध या संकट से पहले क्रूड ऑयल का दाम औसतन 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हुआ करता था। लेकिन मौजूदा समय में यह कीमतें काफी ऊपर चली गई हैं। तेल विपणन कंपनियों का कहना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी नहीं आती, तब तक भारतीय कंपनियों पर भी लागत का दबाव लगातार बना रहेगा।
"अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लगातार ऊंचे बने हुए हैं, जिससे तेल कंपनियों पर कीमतों में संशोधन का भारी दबाव रहता है। यदि वैश्विक स्तर पर नरमी नहीं आई, तो आने वाले दिनों में और भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।" — ऊर्जा बाजार विशेषज्ञ
इस स्थिति के कारण न केवल भारत बल्कि दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ रहा है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में एक डॉलर की बढ़ोतरी भी देश के आयात बिल को भारी रूप से प्रभावित करती है।
प्रमुख महानगरों और शहरों में आज के ताजा ईंधन के दाम
देश के विभिन्न राज्यों और शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अलग-अलग होती हैं। इसकी मुख्य वजह केंद्र सरकार के टैक्स के अलावा राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले स्थानीय कर, वैट और ट्रांसपोर्टेशन लागत हैं। यही कारण है कि एक ही देश में होने के बावजूद अलग-अलग राज्यों में ईंधन के दाम में अंतर देखने को मिलता है।
आज की तारीख में देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल करीब 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा है। वहीं आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल का भाव 111.21 रुपये और डीजल का भाव 97.83 रुपये प्रति लीटर है। कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है, जबकि चेन्नई में पेट्रोल 107.76 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है।
अन्य प्रमुख शहरों की बात करें तो गुरुग्राम में पेट्रोल 102.97 रुपये, नोएडा में 101.77 रुपये, बेंगलुरु में 110.97 रुपये, हैदराबाद में 115.73 रुपये और लखनऊ में 113.81 रुपये प्रति लीटर के भाव पर उपलब्ध है। डीजल के मामले में भी इन शहरों में स्थानीय करों के अनुसार मामूली अंतर देखने को मिलता है।
क्या आने वाले दिनों में सरकारी कंपनियां भी बढ़ाएंगी दाम?
आम जनता के मन में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले दिनों में सरकारी तेल कंपनियां भी कीमतें बढ़ा देंगी? जानकारों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल का भाव इसी तरह ऊंचे स्तर पर बना रहा और निजी कंपनियों को मुनाफा कमाने के लिए दाम बढ़ाने पड़े, तो सरकारी कंपनियों पर भी व्यावसायिक दबाव बढ़ सकता है।
इसी साल मई के महीने में देश की तेल कंपनियों ने लगातार चार बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए थे, जिसके बाद घरेलू स्तर पर कीमतें करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर तक महंगी हो गई थीं। साल 2022 के बाद यह पहला मौका था जब तेल कंपनियों ने थोक और खुदरा दरों में इतनी बड़ी बढ़ोतरी की थी। हालांकि, उसके बाद से बाजार में स्थिरता लाने के प्रयास किए गए थे।
फिलहाल आम नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने नजदीki पेट्रोल पंप पर जाकर ताजा दरों की पुष्टि अवश्य कर लें, विशेषकर यदि वे निजी कंपनियों के फ्यूल स्टेशनों का उपयोग कर रहे हैं। भविष्य में महंगाई के मोर्चे पर क्या रुख रहता है, यह पूरी तरह से वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और कच्चे तेल की चाल पर ही निर्भर करेगा।








