देश के शिक्षा तंत्र और सरकारी महकमों में पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला जम्मू-कश्मीर के ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर से जुड़ा है, जहां एक शख्स ने बिना किसी वैध नियुक्ति के पूरे तेरह साल तक सरकारी शिक्षक के पद पर नौकरी की और हर महीने नियमित रूप से सरकारी खजाने से तनख्वाह वसूलता रहा। इस चौंकाने वाले मामले का खुलासा तब हुआ जब शिक्षा विभाग के भीतर प्रशासनिक स्तर पर दस्तावेजों की गहन छानबीन की गई।
कश्मीर स्कूल शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में एक कड़ा और बड़ा आदेश जारी करते हुए रावलपोरा, श्रीनगर के रहने वाले इम्तियाज अहमद की पूरी सेवा को सिरे से खारिज कर दिया है। निदेशालय के आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, आरोपी की साल 2013 की कथित नियुक्ति को अब शुरू से ही शून्य और गैर-कानूनी करार दे दिया गया है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद से शिक्षा विभाग के भीतर हड़कंप मचा हुआ है और यह जांच की जा रही है कि आखिर इतने लंबे समय तक इस फर्जीवाड़े की भनक जिम्मेदार अधिकारियों को क्यों नहीं लगी।
ऐसे खुला 13 साल पुराने फर्जीवाड़े का पूरा सच
शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, इम्तियाज अहमद का नाम श्रीनगर के निशात इलाके में स्थित गगरिबल के बालक मध्य विद्यालय में शिक्षक के रूप में दर्ज था। दस्तावेजों के दस्तावेजों में उसे प्रयोगशाला सहायक के रूप में 2 अप्रैल 2013 के एक कथित सरकारी आदेश के आधार पर सेवा में शामिल दिखाया गया था। इसके अलावा, तीन अप्रैल 2013 को स्कूल शिक्षा कश्मीर निदेशालय के नाम से एक पुष्टि आदेश भी फाइल में जोड़ा गया था, जिससे उसकी नौकरी को पूरी तरह वैध करार दिया जाता रहा।
हालांकि, खेल तब बिगड़ा जब विभाग ने सेवा रिकॉर्ड की रूटीन चेकिंग के साथ-साथ विशेष आंतरिक जांच शुरू की। जब अधिकारियों ने उन आदेशों की असलियत खंगालनी शुरू की जिनके आधार पर इम्तियाज की नियुक्ति और बाद की पदोन्नति हुई थी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। जांच में यह अकाट्य तथ्य सामने आया कि जिन सक्षम अधिकारियों के नाम और दस्तखत इन दस्तावेजों पर दर्ज थे, उन्होंने अपनी तरफ से कभी इस तरह का कोई आदेश जारी ही नहीं किया था। यानी पूरा का पूरा ढांचा कागजी और फर्जी दस्तावेजों के दम पर खड़ा किया गया था।
संबंधित खबरें
फरार रहने के बाद शुरू हुई गहराई से प्रशासनिक जांच
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इम्तियाज अहमद पिछले कुछ समय से विभागीय रडार पर था क्योंकि वह बिना किसी पूर्व सूचना या वैध अनुमति के पिछले साल यानी 21 फरवरी 2024 से लगातार ड्यूटी से अनुपस्थित चल रहा था। जब उसकी इस लंबी गैरहाजिरी पर विभाग ने शिकंजा कसना शुरू किया और उसके सेवा अभिलेखों की फाइलें बाहर निकाली गईं, तब जाकर इस बड़े पैमाने पर रचे गए फर्जीवाड़े की परतें एक-एक करके उधड़नी शुरू हुईं।
विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया और पाया कि केवल नियुक्ति ही नहीं, बल्कि वर्ष 2018 में उसकी पदोन्नति से जुड़े कागजात भी पूरी तरह संदिग्ध और अनधिकृत पाए गए। किसी भी प्राधिकारी की मुहर या वास्तविक अनुमोदन के बिना सरकारी तंत्र में इतने लंबे समय तक जड़े जमाए रखना इस बात की ओर इशारा करता है कि इस फर्जीवाड़े में कुछ अंदरूनी लोगों की मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता है। फिलहाल शिक्षा विभाग ने इस प्रकरण की आंतरिक और प्रशासनिक स्तर पर और भी गहराई से पड़ताल शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस खेल में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
सभी वित्तीय लाभों की होगी सख्त रिकवरी
कश्मीर स्कूल शिक्षा निदेशालय द्वारा 3 सितंबर 2026 को जारी आदेश संख्या 347-डीएसईके के तहत यह स्पष्ट कर दिया गया है कि इम्तियाज अहमद को विभाग में टिके रहने के दौरान जो भी वेतन, भत्ते और अन्य वित्तीय लाभ मिले हैं, उन सबकी पाई-पाई वापस वसूली जाएगी। सरकार ने निर्देश दिया है कि अवैध रूप से सरकारी खजाने से निकाली गई इस पूरी धनराशि को वसूलने के लिए कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से शुरू की जाए।
"शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड में फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी पाने और वेतन उठाने का यह मामला बेहद गंभीर है। आरोपी की पूरी नियुक्ति को शून्य घोषित कर दिया गया है और अब तक दिए गए समस्त वेतन व भत्तों की वसूली की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।" — शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कश्मीर
इस घटना के सामने आने के बाद अब राज्यभर के शिक्षा संस्थानों और सरकारी विभागों में दस्तावेजों की सेफ्टी और वेरिफिकेशन प्रक्रिया को लेकर नए सिरे से बहस छिड़ गई है। आम नागरिकों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि यदि शुरुआती दौर में ही कड़े कदम उठाए जाते और दस्तावेजों का सही से भौतिक व तकनीकी सत्यापन होता, तो इस प्रकार के फर्जीवाड़े को तेरह साल तक पनपने का मौका ही नहीं मिलता।
भविष्य के लिए प्रशासन ने उठाए कड़े कदम
इस पूरे प्रकरण के उजागर होने के बाद स्कूल शिक्षा निदेशालय ने घाटी के तमाम जिलों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड का ऑडिट कराने के संकेत दिए हैं। प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि कहीं अन्य जिलों में भी ऐसे फर्जी और जाली आदेशों के सहारे नौकरियां तो नहीं चलाई जा रही हैं। सरकार की इस सख्ती से उन लोगों में खौफ का माहौल है जो अनुचित साधनों या फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरियों का आनंद ले रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में केवल रिकवरी और बर्खास्तगी ही काफी नहीं है, बल्कि इस फर्जीवाड़े की जड़ तक पहुंचकर उन सभी जालसाजों और मददगारों को भी बेनकाब किया जाना चाहिए जिन्होंने सरकारी मुहरों और दफ्तरों के नाम का दुरुपयोग कर इस आपराधिक कृत्य को अंजाम दिया। पुलिस और जांच एजेंसियां भी इस मामले में अपनी ओर से आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही हैं ताकि दोषियों को सजा मिल सके।








