छोटी बचत योजनाओं के निवेशकों के लिए बड़ा अपडेट
केंद्र सरकार ने देश के करोड़ों निवेशकों को राहत देते हुए पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) जैसी लोकप्रिय छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में किसी भी तरह के बदलाव से इनकार कर दिया है। वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, आगामी अक्टूबर से दिसंबर तक की तिमाही के लिए इन योजनाओं पर मिलने वाला रिटर्न पहले की तरह ही सुरक्षित और स्थिर बना रहेगा। जिन लोगों ने इन स्कीमों में अपना पैसा लगा रखा है, उन्हें अपनी पुरानी बचत पर किसी तरह के नुकसान का सामना नहीं करना पड़ेगा।
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम मध्यम वर्ग और दीर्घकालिक निवेशकों के बीच भरोसा बनाए रखने के लिहाज से बेहद अहम है। शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर सुरक्षित निवेश का जरिया तलाशने वाले आम नागरिक हमेशा इन सरकारी योजनाओं को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में ब्याज दरों का स्थिर रहना निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जिससे उनकी वित्तीय योजनाएं बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ती रहेंगी।
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PPF पर मिलता रहेगा 7.1% ब्याज, जानिए क्या हैं नियम
पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF में निवेश करने वालों के लिए यह लगातार कई तिमाहियों से चला आ रहा है कि इस पर मिलने वाली ब्याज दर 7.1 प्रतिशत पर ही टिकी हुई है। इस बार भी सरकार ने इसमें कोई फेरबदल नहीं किया है। जानकारों के अनुसार, PPF एक बेहद लोकप्रिय दीर्घकालिक निवेश साधन है, जिसकी मूल अवधि 15 साल की होती है। निवेशक चाहें तो इस अवधि के पूरा होने के बाद इसे पांच-पाँच साल के ब्लॉक में आगे भी बढ़ा सकते हैं।
इस योजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें निवेश की गई राशि, मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाली पूरी रकम टैक्स-फ्री होती है। इसे वित्तीय जगत में EEE (Exempt-Exempt-Exempt) की श्रेणी में रखा जाता है। कोई भी व्यक्ति एक वित्त वर्ष में न्यूनतम 500 रुपये से लेकर अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का निवेश इस खाते में कर सकता है। सरकार की गारंटी होने के कारण इसमें डूबेने का कोई जोखिम नहीं होता है, जो इसे आम आदमी की पहली पसंद बनाता है।
सुकन्या समृद्धि योजना पर भी बरकरार है शानदार रिटर्न
बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से चलाई जाने वाली सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) के निवेशकों को भी मौजूदा तिमाही में निराश नहीं होना पड़ा है। इस योजना के तहत मिलने वाली ब्याज दर को 8.2 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा गया है। यह योजना उन माता-पिता के लिए वरदान साबित हो रही है जो अपनी बेटियों की उच्च शिक्षा और शादी के खर्चों के लिए पहले से ही फंड तैयार करना चाहते हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, अगर कोई अभिभावक इस योजना में अनुशासित तरीके से हर महीने एक निश्चित राशि जमा करता है, तो मेच्योरिटी के वक्त एक बड़ा कॉर्पस तैयार हो जाता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई निवेशक नियमित रूप से हर महीने पांच हजार रुपये इस खाते में डालता है, तो लंबी अवधि में यह योजना लाखों रुपये का फंड बना कर देती है। इसमें भी टैक्स छूट का पूरा फायदा मिलता है, जिससे निवेशकों की बचत और अधिक बढ़ जाती है।
कैसे तय होती हैं छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें?
आम जनता के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि आखिर इन सरकारी योजनाओं के ब्याज का निर्धारण कैसे होता है। वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, छोटी बचत योजनाओं पर मिलने वाला ब्याज मुख्य रूप से उसी अवधि के सरकारी बॉन्ड (G-Sec) के यील्ड यानी रिटर्न से जुड़ा होता है। सरकार हर तीन महीने पर फॉर्मूला आधारित समीक्षा करती है और बाजार की स्थिति को ध्यान में रखते हुए दरों पर अंतिम फैसला लेती है।
यही वजह है कि सरकार हर तिमाही के अंत में इन आंकड़ों का विश्लेषण करती है। हालांकि पिछले कुछ समय से बाजार में स्थिरता को देखते हुए दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन तिमाही समीक्षा का यह नियम पारदर्शी तरीके से काम करता है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे निवेश से जुड़े अपने फैसले हमेशा अपने वित्तीय लक्ष्यों और योजनाओं के आधिकारिक नियमों को ध्यान में रखकर ही लें।
"सरकार छोटी बचत योजनाओं की समीक्षा हर तिमाही के आधार पर करती है। इस बार भी विभिन्न सामाजिक सुरक्षा और बचत योजनाओं की दरों को संतुलित रखते हुए पुराना रिटर्न ही जारी रखने का निर्णय लिया गया है, जिससे निवेशकों को किसी प्रकार की अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।" — आर्थिक मामलों का विभाग, वित्त मंत्रालय
अन्य छोटी बचत योजनाओं का क्या है हाल?
PPF और सुकन्या समृद्धि योजना के अलावा अन्य कई लोकप्रिय स्कीमों की दरों में भी कोई फेरबदल नहीं किया गया है। सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) पर 8.2 प्रतिशत का ब्याज मिलता रहेगा, जो बुजुर्ग निवेशकों के लिए नियमित आय का एक बेहतरीन साधन है। इसके अलावा नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) पर 7.7 प्रतिशत और किसान विकास पत्र पर 7.5 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलता रहेगा।
पोस्ट ऑफिस की टाइम डिपॉजिट स्कीम, मंथली इनकम स्कीम और रेकरिंग डिपॉजिट जैसी योजनाओं की दरें भी अपनी जगह पर स्थिर हैं। जानकारों का कहना है कि वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में जब मुद्रास्फीति और बाजार के अन्य कारक ऊपर-नीचे हो रहे हैं, तब छोटी बचत योजनाओं की ये स्थिर दरें मध्यम वर्गीय परिवारों और छोटे निवेशकों के लिए वित्तीय सुरक्षा कवच का काम कर रही हैं।








