ट्रेनों में खौफ का पर्याय बना 'साइको किलर' चढ़ा पुलिस के हत्थे
भारतीय रेलवे में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है। ट्रेनों में यात्रियों को निशाना बनाकर न सिर्फ उनका कीमती सामान छीना जाता था, बल्कि उन्हें चलती हुई बोगी से नीचे फेंकने वाले एक कुख्यात अपराधी को आखिरकार कानून की लंबी बांहों ने दबोच ही लिया है। आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) और जीआरपी (राजकीय रेलवे पुलिस) की संयुक्त टीम ने एक बड़े ऑपरेशन के तहत आरोपी रोहित तिवारी को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से धर दबोचा है।
इस खतरनाक अपराधी को पुलिस महकमे में 'साइको किलर' के तौर-तरीकों वाला आरोपी माना जा रहा है, क्योंकि उसकी कार्यशैली बेहद खौफनाक और क्रूर थी। वह यात्रियों से लूटपाट करने के बाद सबूत मिटाने और गवाहों को रास्ते से हटाने के लिए उन्हें चलती ट्रेन के गेट से नीचे धकेल देता था। इस गिरफ्तारी से रेलवे प्रशासन और यात्रियों ने थोड़ी राहत की सांस ली है, लेकिन इस तरह के अपराधों ने एक बार फिर ट्रेन सफर की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
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ऐसे रची गई गिरफ्तारी की साजिश, तकनीक बनी पुलिस का सबसे बड़ा हथियार
पिछले कुछ दिनों से दानापुर रेल मंडल के विभिन्न इलाकों में यात्रियों के साथ हो रही ऐसी वारदातों ने पुलिस की नींद उड़ा रखी थी। हाल ही में जगजीवन हाल्ट के पास ट्रेन में हुई एक सनसनीखेज घटना के बाद रेल पुलिस और आरपीएफ ने इस मामले को सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाते हुए एक विशेष संयुक्त टास्क फोर्स का गठन किया था। इस टीम में जीआरपी पटना, जीआरपी दानापुर और आरपीएफ आरा के तेज-तर्रार अधिकारी व जवान शामिल थे।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस बार अपराधियों के पास से सामान बरामद न होने के पुराने तरीके से हटकर पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और मोबाइल लोकेशन का सहारा लिया। जैसे ही संदिग्ध की सटीक लोकेशन उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में ट्रेस हुई, संयुक्त पुलिस टीम ने बिना एक पल गंवाए वहां के लिए कूच कर दिया। प्रयागराज में स्थानीय खुफिया तंत्र की मदद से जाल बिछाकर आरोपी रोहित तिवारी को दबोच लिया गया। गिरफ्तारी के बाद से ही उसे कड़ी सुरक्षा के बीच सड़क मार्ग और ट्रेन के जरिए पटना लाया जा रहा है।
बिहार के भोजपुर जिले से जुड़े हैं इस खूंखार अपराधी के तार
पकड़ा गया आरोपी रोहित तिवारी मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले का रहने वाला बताया जा रहा है। वह शाहपुर प्रखंड के अंतर्गत आने वाले बरिसवन गांव का निवासी है। उसके गृह क्षेत्र और आसपास के इलाकों में भी इस तरह की घटनाओं के बाद सनसनी फैल गई है। स्थानीय लोग इस बात से हैरान हैं कि उनके ही क्षेत्र का एक युवक इतना बड़ा और शातिर रेल अपराधी कैसे बन गया।
दानापुर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले पटना जंक्शन से लेकर आरा, बक्सर, डीडीयू और आगे जबलपुर तक के रेलखंडों पर उसकी संदिग्ध गतिविधियों को खंगाला जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसने अपने आपराधिक सफर की शुरुआत कब और कैसे की थी। उसके परिवार और पृष्ठभूमि के बारे में भी स्थानीय पुलिस से समन्वय स्थापित कर जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उसके नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।
"ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस शातिर अपराधी की गिरफ्तारी से कई अनसुलझे मामलों से पर्दा उठेगा। हम यह भी जांच कर रहे हैं कि इस खौफनाक खेल में उसके साथ और कौन-कौन लोग शामिल थे। पटना लाने के बाद उससे गहन पूछताछ की जाएगी।" — वरिष्ठ रेल पुलिस अधिकारी, दानापुर रेल मंडल
चलती ट्रेन से यात्रियों को फेंकने का खौफनाक तरीका
रोहित तिवारी के काम करने का तरीका बेहद खौफनाक और क्रूर था। वह आमतौर पर रात के समय या कम भीड़भाड़ वाले रूट पर चलने वाली ट्रेनों के जनरल या स्लीपर कोच में सफर करने वाले अकेले यात्रियों को अपना निशाना बनाता था। यात्रियों के पास मौजूद मोबाइल फोन, नकदी, और जेवरात छीनने के बाद वह पीड़ित को बंधक बनाने या चुप कराने के बजाय सीधे ट्रेन के खुले दरवाजे के पास खींच ले जाता था।
कई मामलों में यात्रियों ने जब इसका कड़ा विरोध किया, तो उसने बेरहमी से उन्हें चलती हुई रफ्तार वाली ट्रेन से नीचे पटरियों पर फेंक दिया। इस क्रूरता के कारण कई यात्रियों की जान चली गई, तो कई गंभीर रूप से घायल होकर दिव्यांग हो गए। चूंकि पीड़ित या तो मारे जाते थे या गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल पहुंच जाते थे, इसलिए पुलिस के पास चश्मदीद गवाहों और ठोस सबूतों की भारी कमी रहती थी। इसी वजह से यह साइको किलर लंबे समय तक कानून की नजरों से बचता रहा।
आपराधिक नेटवर्क और संभावित साथियों की तलाश में जुटी पुलिस
प्रयागराज से गिरफ्तार किए जाने के बाद जब आरोपी को पटना लाया जा रहा है, तो रेल पुलिस और आरपीएफ की संयुक्त पूछताछ टीम पूरी तरह तैयार बैठी है। पटना पहुंचते ही उससे लंबी और कड़ी पूछताछ का सिलसिला शुरू होगा। पुलिस मुख्य रूप से यह जानने का प्रयास करेगी कि उसने अब तक कुल कितनी वारदातों को अंजाम दिया है और उसके द्वारा लूटा गया सामान आखिरकार कहां और किसे बेचा जाता था।
इसके साथ ही यह भी जांच का मुख्य बिंदु है कि इस सनसनीखेज अपराध में रोहित अकेला था या उसके साथ कोई संगठित गिरोह काम कर रहा था। चोरी के सामान को ठिकाने लगाने वाले सोनार या रिसीवर कौन हैं, पुलिस इस बात का भी पता लगाएगी। हाल ही में बिहार-यूपी बॉर्डर पर हुई एक अन्य जघन्य घटना (जिसमें नितिन यादव नामक युवक को चलती ट्रेन से अगवा कर हत्या कर दी गई थी और शव चार टुकड़ों में मिला था) से भी इसके संभावित संबंधों को खंगाला जा रहा है।
आगे की कानूनी कार्रवाई और पुलिस का आगामी खुलासा
रेल सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस गिरफ्तारी के बाद आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है। रेलवे थानों में दर्ज उन तमाम पेंडिंग मामलों की फाइलें दोबारा खोली जा रही हैं, जिनमें यात्रियों के रहस्यमय तरीके से गायब होने या पटरियों पर लाश मिलने की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। पुलिस का मानना है कि रोहित तिवारी से पूछताछ के बाद रेल यात्रियों को लूटने वाले एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश हो सकता है।
बुधवार को दानापुर रेल पुलिस की ओर से एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किए जाने की आधिकारिक सूचना दी गई है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस इस पूरे ऑपरेशन की सफलता, आरोपी के गुनाह करने के तरीकों और अब तक की गई जांच के सभी अहम सबूतों को मीडिया के सामने रखेगी। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद रेलवे प्रशासन भी यात्रियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी करने पर विचार कर रहा है।



