यमुना किनारे बेला एस्टेट पहुंचे राहुल गांधी, एसआईआर प्रक्रिया को लेकर खड़े किए गंभीर सवाल
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हाल ही में दिल्ली के यमुना खादर क्षेत्र में स्थित बेला एस्टेट की झुग्गी बस्ती का औचक दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वहां रहने वाले आम नागरिकों से मुलाकात की और उनकी परेशानियों को बहुत करीब से समझा। यह इलाका लंबे समय से झुग्गी-झोपड़ियों के लिए जाना जाता है, जहां हजारों की संख्या में गरीब और मजदूर वर्ग के लोग अपना जीवन बसर करते हैं। राहुल गांधी के इस दौरे का मुख्य उद्देश्य हाल ही में शुरू हुई वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) के बाद पैदा हुई समस्याओं का जायजा लेना था।
दौरे के दौरान स्थानीय निवासियों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि किस तरह प्रशासनिक प्रक्रियाओं के फेरबदल में उनके लोकतांत्रिक अधिकार छीने जा रहे हैं। लोगों का कहना था कि वे दशकों से इस क्षेत्र में निवास कर रहे हैं और पिछले सभी विधानसभा व लोकसभा चुनावों में उन्होंने अपने मताधिकार का इस्तेमाल भी किया है। इसके बावजूद ताज़ा मतदाता सूची से उनके नाम गायब कर दिए गए हैं, जिससे उनके सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
इस पूरी स्थिति को लेकर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक वीडियो भी साझा किया है। इसमें उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह प्रक्रिया आम गरीबों की आवाज और उनकी ताकत को कुचलने का एक सुनियोजित तरीका है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाज के सबसे कमजोर वर्ग के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है जिनके पास पहले से ही संसाधनों की भारी कमी है।
संबंधित खबरें
वोटर लिस्ट से गायब हुए 727 नाम, एक झुग्गी के लोगों का दर्द
बेला एस्टेट बस्ती में हुए इस दौरे के दौरान चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। राहुल गांधी द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, इस पूरी बस्ती में कुल 728 मतदाता रहते हैं। लेकिन एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट सामने आई, तो उसमें से 727 लोगों के नाम गायब मिले। सूची में केवल एक ही व्यक्ति का नाम शेष बचा है, जिसे लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी और रोष व्याप्त है।
वहां के निवासियों ने बताया कि साल 2023 में उनके आशियाने उजाड़ दिए गए थे और उनके घरों पर बुलडोजर चला दिया गया था। इसके बावजूद वे लोग कहीं अन्यत्र नहीं गए और यहीं रहकर संघर्ष कर रहे हैं। पिछले लोकसभा चुनाव 2024 और दिल्ली के चुनावों में भी इन लोगों ने अपने वोट डाले थे, लेकिन अब प्रशासनिक फेरबदल के कारण उन्हें मतदाता सूची से ही बाहर कर दिया गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के बड़े पैमाने पर नाम कटने से चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। मतदाता सूची किसी भी लोकतंत्र की रीढ़ होती है, और यदि एक ही स्थान से सैकड़ों लोगों के नाम अचानक हटा दिए जाएं, तो यह व्यवस्था की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
मौके से एसडीएम को फोन कर लगाई क्लास, बोले- घर न होने से नहीं छिनता वोट का अधिकार
झुग्गीवासियों के बीच बैठकर ही राहुल गांधी ने आक्रामक रुख अपनाया और मौके से ही संबंधित एसडीएम को फोन लगा दिया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह कांग्रेस नेता अधिकारी से तीखे सवाल कर रहे हैं। उन्होंने एसडीएम को याद दिलाया कि मकान होना या न होना, किसी भी नागरिक के मताधिकार से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं है।
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के उस बयान का भी हवाला दिया जिसमें यह कहा गया था कि 'हाउस नंबर 0' बेघर और आश्रयहीन लोगों के लिए होता है। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन ने किस नियम के तहत 727 लोगों के नाम सूची से हटा दिए, इस पर अधिकारी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। बातचीत के दौरान स्थिति तब और गरमा गई जब राहुल गांधी ने अधिकारी को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि नियमों के विपरीत काम हुआ है तो इसके परिणाम गंभीर होंगे।
"यमुना किनारे बेला एस्टेट में 728 लोग रहते हैं। एसआईआर के बाद वोटर लिस्ट में सिर्फ एक नाम बचा और बाकी 727 नाम काट दिए गए। यह सिर्फ प्रक्रिया की गड़बड़ी नहीं, बल्कि गरीबों से उनकी इकलौती ताकत छीनने की साजिश है।" — राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद
दिल्ली समेत देश भर में एसआईआर प्रक्रिया पर बढ़ा राजनीतिक और सामाजिक घमासान
दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों में भी विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट आने के बाद लगभग 47.5 लाख नाम कम हुए हैं। कुल मतदाताओं की संख्या जो पहले करीब 1.45 करोड़ थी, वह घटकर अब लगभग 97 लाख पर आ गई है। इसके अलावा 33 लाख से अधिक मतदाताओं को उनके फॉर्म में विसंगतियों के चलते नोटिस भेजे गए हैं।
इस बड़े पैमाने पर हो रही नामों की छंटनी के खिलाफ अब नागरिक समाज भी मुखर होने लगा है। हाल ही में देश के दो हजार से अधिक प्रतिष्ठित नागरिकों, जिनमें कई पूर्व नेवी चीफ और सैन्य अधिकारी शामिल हैं, ने देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने एसआईआर की वैधता और पूरी प्रक्रिया की समीक्षा होने तक इस पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। साथ ही चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
निष्कर्ष और आगे की प्रशासनिक कार्रवाई
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के नाम इस सूची से छूट गए हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के पास आवेदन कर सकते हैं। आयोग ने यह भी घोषणा की है कि दिल्ली में फाइनल वोटर लिस्ट आगामी 4 दिसंबर को जारी की जाएगी। तब तक बूथ लेवल ऑफिसर्स घर-घर जाकर दस्तावेजों का सत्यापन करने का काम करेंगे।
बहरहाल, राहुल गांधी के इस दौरे और बेला एस्टेट के मामले ने प्रशासनिक मशीनरी की कार्यप्रणाली को एक बार फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव आयोग आगामी दिनों में इन शिकायतों का किस प्रकार समाधान करता है और क्या वास्तव में छूटे हुए मतदाताओं को उनका लोकतांत्रिक अधिकार वापस मिल पाता है या नहीं।






