कभी अचानक धरना, कभी थाने की ओर कूच, तो कभी बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे किसी मौके पर पहुंच जाना—राहुल गांधी की राजनीति में ‘सरप्राइज’ अब उनकी मुख्य रणनीति का हिस्सा बनता दिख रहा है। मोदी सरकार को लगातार घेरने के लिए राहुल गांधी जिस तरह के तौर-तरीके अपना रहे हैं, उसे राजनीतिक गलियारों में उनकी ‘गुरिल्ला पॉलिटिक्स’ कहा जा रहा है।
औचक एक्शन और कानों-कान खबर नहीं
राहुल गांधी के राजनीतिक कदमों में अब एक नया आक्रामकपन दिखाई देता है। औचक धरना देना, पुलिस थाने की ओर अचानक कूच करना या फिर बिना तामझाम के किसी संवेदनशील जगह पहुंच जाना—इन सबकी भनक अक्सर प्रशासनिक अमले और मीडिया को भी कानों-कान नहीं होती। सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने के लिए इस रणनीति में बड़े काफिले की जगह छोटे दस्तों या कभी-कभार अकेले पहुंचने पर जोर दिया जाता है।
भट्टा-पारसौल के दिनों में जब वह बाइक पर सवार होकर किसानों के बीच पहुंचे थे, तब इसकी शुरुआती झलक मिली थी। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में इस रणनीति की तीव्रता और धार काफी बढ़ गई है। राहुल गांधी का मानना है कि विरोधियों को सियासी रूप से मात देने के लिए उनकी कमजोरियों और अप्रत्याशित बिंदुओं पर चोट करना जरूरी है।
फिजिकल फिटनेस और मार्शल आर्ट्स का कनेक्शन
इस तरह की लगातार सक्रियता और धरना पॉलिटिक्स के लिए जबरदस्त शारीरिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। राहुल गांधी अपनी फिटनेस को लेकर बेहद सतर्क रहते हैं और व्यस्ततम कार्यक्रमों के बावजूद रोजाना कसरत के लिए समय निकालते हैं। उनके करीबियों का मानना है कि मार्शल आर्ट्स के प्रशिक्षण ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से ऐसे औचक कदमों के लिए तैयार किया है। 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान भी उनके शिविरों में फिटनेस और मार्शल आर्ट्स का अभ्यास नियमित हिस्सा हुआ करता था।
‘ब्रैंड मोदी’ के मुकाबले ‘एंटी-मोदी’ ब्रैंड की तलाश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी के सामने देश में एक मजबूत और स्थापित ‘ब्रैंड मोदी’ की चुनौती है। ऐसे में कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी के व्यक्तित्व को इसके बिल्कुल उलट एक जमीन से जुड़े, आक्रामक और संघर्षशील राजनीतिक ब्रैंड के रूप में पेश करने में जुटी है। एक तरफ नियंत्रित और स्थापित सत्ता का ब्रैंड है, तो दूसरी तरफ औचक एक्शन, सड़क पर उतरने और सीधे टकराव मोल लेने की राजनीति। जनता इस सियासी समीकरण को आने वाले समय में किस रूप में स्वीकार करती है, यह देखना दिलचस्प होगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने इस सियासी घटनाक्रम की स्वतंत्र समीक्षा 'The Freelance' द्वारा की गई है। यह रिपोर्ट विभिन्न राजनीतिक घटनाक्रमों और विश्लेषकों के इनपुट पर आधारित है।
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