राजस्थान में शहरी निकाय चुनावों के बीच सियासी पारा हाई
राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर से 'हॉर्स ट्रेडिंग' और पार्षदों की खरीद-फरोख्त की सुगबुगाहट तेज हो गई है। राज्य के कुल 273 शहरी निकायों में आज वोटिंग और वोटों की गिनती का दौर एक साथ चल रहा है। आज ही तमाम निकायों के नतीजे भी सामने आ रहे हैं, जिससे सियासी दलों की धड़कनें तेज हैं। उदयपुर, बीकानेर, अजमेर, पाली और अलवर समेत 5 बड़े शहरों में मेयर पद के लिए कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। इसके साथ ही 41 नगर परिषदों और 227 नगर पालिकाओं के लिए भी चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर है।
जैसे-जैसे चुनावी नतीजे सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे राज्य के अलग-अलग हिस्सों से सनसनीखेज खबरें और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। सबसे बड़ा घमासान तिजारा क्षेत्र में पार्षदों को लेकर मच गया है। मतदान के ठीक दिन पार्षदों के अचानक गायब होने से सूबे की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके बाद राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है।
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तिजारा में कांग्रेस के 18 पार्षद गायब, हरियाणा सीमा पर हंगामा
शहरी निकाय चुनाव के मतदान और नतीजों के बीच तिजारा से एक बड़ी खबर सामने आई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी ने गंभीर दावा किया है कि उसके 18 पार्षद जो हिमाचल प्रदेश में ठहरे हुए थे, वे हरियाणा के रास्ते राजस्थान वापस लौट रहे थे, लेकिन रास्ते में ही वे अचानक गायब हो गए हैं। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सत्ताधारी पार्टी के इशारे पर उनके पार्षदों को हरियाणा सीमा के पास रोका गया है और उन्हें अगवा या प्रलोभित करने की कोशिश की जा रही है।
इस पूरे मामले पर हरियाणा पुलिस ने कांग्रेस के इन तमाम दावों का खंडन किया है। पुलिस का कहना है कि उनकी सीमा में ऐसा कोई भी अनधिकृत घटनाक्रम या पार्षदों को रोके जाने की बात सामने नहीं आई है। हालांकि, कांग्रेस पार्टी इस सफाई से संतुष्ट नहीं है और उसने फौरन कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस ने तुरंत राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिससे मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर ली हैं।
हाईकोर्ट का सख्त रुख, भिवाड़ी एडीएम को सौंपी गई जांच
पार्षदों के गायब होने और खरीद-फरोख्त के अंदेशे को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट में त्वरित सुनवाई हुई। अदालत ने इस संवेदनशील मामले का संज्ञान लेते हुए भिवाड़ी के अतिरिक्त जिला कलेक्टर (ADM) को कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने एडीएम से कहा है कि वह इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें और जल्द से जल्द अपनी विस्तृत रिपोर्ट सीधे राज्य चुनाव आयोग को सौंपें। अदालत के इस निर्देश के बाद प्रशासनिक अमले में भी हड़कंप मच गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निकाय चुनावों में बोर्ड गठन के लिए पार्षदों की संख्या बेहद अहम होती है। जरा सा बहुमत का आंकड़ा इधर-उधर होने पर सत्ता की बाजी पलट सकती है, और यही वजह है कि दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने पार्षदों को सुरक्षित रखने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। अब सबकी नजरें चुनाव आयोग और प्रशासनिक रिपोर्ट पर टिकी हैं कि आखिर गायब हुए पार्षद कहां और किस हाल में मिलते हैं।
अजमेर काउंटिंग सेंटर के बाहर भिड़े बीजेपी और कांग्रेस कार्यकर्ता
एक तरफ जहां तिजारा में पार्षद गायब होने से सनसनी फैली है, वहीं दूसरी तरफ अजमेर में काउंटिंग सेंटर के बाहर भी जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। अजमेर नगर निगम भवन के बाहर मतगणना के दौरान उस वक्त तनाव पैदा हो गया, जब कांग्रेस पार्षदों के साथ देहात कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष भूपेंद्र राठौड़ ने अंदर प्रवेश करने की कोशिश की। बीजेपी नेताओं ने इस एंट्री पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे नियमों के खिलाफ बताया।
देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामा शुरू हो गया। हालात को बेकाबू होते देख पोलिंग बूथ और मतगणना केंद्र के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात करना पड़ा। पुलिस अधिकारियों ने बीच-बचाव कर दोनों पक्षों को शांत कराया। स्थिति को तनावपूर्ण देखते हुए अतिरिक्त जाब्ता भी बुलाया गया ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे और मतगणना की प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हो सके।
विपक्ष का गंभीर आरोप: 'सत्ता के बल पर चुनाव जीतना चाहती है बीजेपी'
अजमेर और तिजारा की घटनाओं के बाद कांग्रेस नेताओं ने राज्य की बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने खुलकर कहा है कि बीजेपी अपनी हार की बौखलाहट में सत्ता का घोर दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पोलिंग बूथों और काउंटिंग सेंटर्स पर टकराव और अराजकता के लिए सीधे तौर पर सत्तारूढ़ दल जिम्मेदार है।
"बीजेपी लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर सिर्फ और सिर्फ सत्ता के दम पर निकाय चुनाव जीतना चाहती है। हमारे पार्षदों को डराया-धमकाया जा रहा है और जनता के जनादेश को मोड़ने की कोशिश हो रही है, जिसे कांग्रेस पार्टी कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।" — प्रताप सिंह खाचरियावास, कांग्रेस नेता
निकाय चुनावों का व्यापक परिदृश्य और आगे की सियासी तस्वीर
आपको बता दें कि राजस्थान में इन दिनों शहरी निकायों के चुनाव चरणबद्ध तरीके से संपन्न हो रहे हैं। इससे पहले हुए कुछ चरणों के परिणामों में बीजेपी ने बढ़त हासिल की थी, जबकि कांग्रेस को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। राज्य में सात नगर निगमों सहित कुल 305 नगरीय निकायों में महापौर, सभापति और अध्यक्ष पद के लिए घमासान जारी है। 21 सितंबर और 22 सितंबर को प्रमुख पदों के लिए चुनाव हुए थे, और अब बचे हुए स्थानों पर भी चुनाव व परिणाम सामने आ रहे हैं।
इससे पहले जोधपुर मेयर चुनाव में भी 10 निर्दलीय पार्षदों के 'किंगमेकर' बनने की खबर आई थी, जहां दोनों प्रमुख दलों के पास स्पष्ट बहुमत नहीं था। ऐसे में इन छोटे चुनावों में एक-एक पार्षद की कीमत बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। फिलहाल, राजस्थान के इन निकाय चुनावों के नतीजे और पार्षदों की खरीद-फरोख्त के आरोप राज्य की राजनीति में एक नया भूचाल ला चुके हैं, जिसका असर आने वाले दिनों में और अधिक देखने को मिल सकता है।



