कंगना रनोट पर राजीव मसंद का तीखा बयान, कहा- अब वह सिर्फ एक मजाक हैं
बॉलीवुड की बेबाक एक्ट्रेस और वर्तमान में हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से सांसद कंगना रनोट अक्सर अपने बयानों के चलते सुर्खियों में रहती हैं। इसी बीच, फिल्म क्रिटिक से धर्मा कॉर्नरस्टोन एजेंसी (DCA) के मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) बने राजीव मसंद ने कंगना को लेकर एक बेहद तीखी टिप्पणी की है। राजीव मसंद का कहना है कि कंगना रनोट अब केवल एक मजाक बनकर रह गई हैं, हालांकि वह बतौर अभिनेत्री उनके काम को जरूर याद करते हैं।
राजीव मसंद का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों के बीच का पुराना वाकयुद्ध और मतभेद एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। सिनेमा जगत और मीडिया गलियारों में इस टिप्पणी के बाद से लगातार नई बहस छिड़ गई है कि क्या एक दौर की बेहतरीन अदाकारा अब अपने राजनीतिक और सामाजिक बयानों के कारण अपनी कला से दूर होती जा रही हैं।
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पुराना है राजीव मसंद और कंगना रनोट का छत्तीस का आंकड़ा
फिल्म समीक्षक राजीव मसंद और कंगना रनोट के बीच विवाद नया नहीं है। जब राजीव मसंद फिल्म पत्रकारिता में सक्रिय थे, तब कंगना ने उन पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म और गुटबाजी को लेकर छिड़ी बहस के दौरान कंगना ने राजीव मसंद, करण जौहर और आदित्य चोपड़ा पर खुलेआम निशाना साधा था। कंगना का आरोप था कि ये लोग फिल्म इंडस्ट्री में एक खास कैंप चलाते हैं और चुनिंदा स्टार किड्स को बढ़ावा देते हैं।
उस दौरान कंगना ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोलते हुए लिखा था कि राजीव मसंद ने उनके और सुशांत सिंह राजपूत के खिलाफ सबसे जहरीली और बेबुनियाद बातें लिखी हैं। एक्ट्रेस ने यह भी कहा था कि पत्रकार रहते हुए मसंद हमेशा औसत दर्जे के स्टार किड्स की चापलूसी करते थे और अच्छी फिल्मों को भी जानबूझकर खराब रेटिंग या नेगेटिव रिव्यू देते थे।
कंगना के बॉलीवुड कैंप वाले आरोपों पर राजीव मसंद का पलटवार
हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू के दौरान राजीव मसंद ने कंगना रनोट द्वारा लगाए गए उन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि बॉलीवुड के बड़े फिल्ममेकर्स ने उन्हें कभी आगे बढ़ने का मौका नहीं दिया। मसंद का मानना है कि यह एक गढ़ी हुई कहानी है जिसे बार-बार दोहराना बहुत आसान होता है, लेकिन हकीकत इससे काफी अलग है।
"मुझे नहीं पता। यह बस एक शानदार कहानी है, जिसे बार-बार दोहराते रहना आसान है। लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता। चलिए, सच का सामना करते हैं- बॉलीवुड सफलता की इज्जत करता है। बहुत से लोगों के लिए शुरुआत में चीजें मुश्किल रही हैं, लेकिन एक बार जब आप सफल हो जाते हैं तो ऐसा नहीं होता।" — राजीव मसंद, फिल्म क्रिटिक एवं कॉर्पोरेट कार्यकारी
राजीव ने साफ शब्दों में कहा कि फिल्म इंडस्ट्री हमेशा से उगते सूरज को सलाम करती है। उनके मुताबिक, जो भी कलाकार बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल करता है या अपनी काबिलियत साबित करता है, इंडस्ट्री खुद उसे काम देने के लिए आगे आती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कंगना के बयानों में अब उनकी कला से ज्यादा उनके विवादित तेवर हावी हो चुके हैं।
फिल्मी परदे की 'क्वीन' से लेकर राजनीति के मैदान तक का सफर
कंगना रनोट ने अपने फिल्मी करियर में 'क्वीन', 'तनु वेड्स मनु', 'फैशन' और 'मणिकर्णिका' जैसी कई शानदार फिल्मों में बेजोड़ अभिनय करके दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई है। उनकी अभिनय क्षमता पर कभी किसी को संदेह नहीं रहा है। हालांकि, पिछले कुछ सालों में उन्होंने फिल्मों के साथ-साथ राजनीति में भी सक्रिय प्रवेश किया है और भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर सांसद चुनी गई हैं।
राजनीति में आने के बाद से कंगना का ध्यान फिल्मों की तुलना में राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर ज्यादा केंद्रित हो गया है। उनके आलोचकों का मानना है कि एक संजीदा अभिनेत्री के रूप में उनकी जो छवि थी, वह अब लगातार होने वाले विवादों की भेंट चढ़ती जा रही है।
सिनेमा जगत में तापसी पन्नू और अन्य हस्तियों से भी रहे हैं टकराव
कंगना रनोट का विवादों से पुराना नाता रहा है। राजीव मसंद के अलावा वह तापसी पन्नू, स्वरा भास्कर, दिलजीत दोसांझ और मशहूर गीतकार जावेद अख्तर जैसे कई दिग्गज कलाकारों के साथ सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर भिड़ चुकी हैं। तापसी पन्नू के साथ उनका विवाद तब शुरू हुआ था जब तापसी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि कंगना को अपनी बात रखने के लिए थोड़ा फिल्टर इस्तेमाल करना चाहिए। इसके बाद दोनों अभिनेत्रियों के बीच सोशल मीडिया पर जमकर जुबानी जंग देखने को मिली थी।
बहरहाल, राजीव मसंद की इस ताज़ा टिप्पणी ने एक बार फिर बॉलीवुड के अंदरूनी समीकरणों और मीडिया के साथ कलाकारों के रिश्तों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। देखना यह होगा कि कंगना रनोट इस बयान पर किस तरह की प्रतिक्रिया देती हैं।








