बॉलीवुड अभिनेता और निर्देशक रणदीप हुड्डा के लिए हालिया समय बेहद खास और गौरवशाली रहा है। उनकी पहली निर्देशित फिल्म 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' को 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में 'बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर' के सम्मान से नवाजा गया है। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की घोषणा के बाद रणदीप हुड्डा अपनी फिल्म और इस प्रोजेक्ट के पीछे की पूरी सोच को लेकर खुलकर मीडिया के सामने आए। उन्होंने बताया कि किस तरह से वीर सावरकर के जीवन को पर्दे पर उतारना उनके लिए एक व्यक्तिगत और वैचारिक जिम्मेदारी की तरह था, जिसे उन्होंने पूरी शिद्दत के साथ निभाया है।
आजादी के इतिहास पर रणदीप हुड्डा की बेबाक टिप्पणी
गुजरात में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान रेड कार्पेट पर बातचीत करते हुए रणदीप हुड्डा ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास पर एक गहरी और विचारोत्तेजक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि देश की आम जनमानस में यह एक आम धारणा बन चुकी है कि भारत को केवल अहिंसा के रास्ते पर चलकर ही आजादी मिली है। हालांकि, उनका मानना है कि वास्तविकता इससे कहीं अधिक व्यापक और जटिल है। देश की आजादी की लड़ाई में सशस्त्र क्रांति का भी एक बहुत बड़ा और निर्णायक योगदान रहा है, जिसे कई बार मुख्यधारा के इतिहास में अपेक्षित तवज्जो नहीं मिल पाई।
रणदीप ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि सशस्त्र क्रांति के इस इतिहास से केवल वीर सावरकर ही नहीं, बल्कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित कई महान क्रांतिकारी और सेनानी जुड़े हुए थे। उन्होंने कहा कि उनके मन में लंबे समय से यह टीस थी कि नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के इस दूसरे पहलू से भी पूरी तरह अवगत कराया जाना चाहिए। फिल्म 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' के जरिए उन्होंने इसी अनसुने और दबे हुए इतिहास को बड़े पर्दे पर जीवंत करने का साहसिक प्रयास किया है, ताकि लोग जान सकें कि देश की स्वतंत्रता के लिए कितनों ने किस स्तर पर संघर्ष किया था।
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वीर सावरकर को बताया क्रांतिकारी संघर्ष का मुख्य प्रेरक
सावरकर के व्यक्तित्व और उनके योगदान के बारे में बात करते हुए रणदीप हुड्डा ने उन्हें उस दौर के क्रांतिकारी संघर्ष का मुख्य 'इन्फ्लुएंसर' करार दिया। उनका कहना था कि सावरकर के विचार और उनकी रणनीतियां उस समय के युवाओं को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि उनकी फिल्म का मूल उद्देश्य किसी राजनीतिक विवाद को जन्म देना नहीं, बल्कि इतिहास के उस हिस्से को सामने लाना था जिस पर बहुत कम चर्चा की जाती है।
"मेरे हिसाब से यह बहुत जरूरी था, क्योंकि सबको लगता है हिंदुस्तान को आजादी सिर्फ अहिंसा से मिली है। ऐसा कुछ नहीं। एक सशस्त्र क्रांति भी हुई थी, जिससे सुभाष चंद्र बोस से लेकर सावरकर तक कई लोग जुड़े थे।" — रणदीप हुड्डा, अभिनेता एवं निर्देशक
रणदीप ने यह भी स्वीकार किया कि इस फिल्म को बनाना उनके लिए शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण सफर था। सावरकर के किरदार को पर्दे पर उतारने के लिए उन्होंने अपने शरीर में जो चौंकाने वाला ट्रांसफॉर्मेशन किया था, उसका उनके स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव पड़ा था। लेकिन उनका मानना है कि जब किसी कला को जनता का समर्थन और इस तरह के राष्ट्रीय पुरस्कार मिलते हैं, तो वह सारी मुश्किलें और तकलीफें अपने आप भूल जाती हैं।
72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स की भव्य तैयारियां
इस बार 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स की घोषणा और आयोजन को लेकर फिल्म जगत में एक अलग ही उत्साह देखने को मिल रहा है। इस साल यह प्रतिष्ठित समारोह देश की राजधानी दिल्ली से बाहर निकलकर गुजरात की धरती पर आयोजित हो रहा है। आयोजन स्थल के रूप में दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा यानी 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' के प्रांगण को चुना गया है, जो इस समारोह की भव्यता में चार चांद लगा रहा है.
करीब 75 मिनट तक चलने वाले इस भव्य कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने के लिए प्रशासन और आयोजकों द्वारा व्यापक तैयारियां की गई हैं। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के बस बे एरिया में एक विशाल जर्मन एल्युमिनियम स्ट्रक्चरल डोम तैयार किया जा रहा है, जिसमें देश भर से आने वाले लगभग 1,000 विशिष्ट मेहमानों के बैठने की आरामदायक व्यवस्था की गई है। नर्मदा जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में सुरक्षा, यातायात, मेहमानों के आगमन और वीवीआईपी प्रोटोकॉल को लेकर कई दौर की उच्च स्तरीय बैठकें हो चुकी हैं, ताकि पूरा आयोजन सुचारू रूप से संपन्न हो सके।
सिनेमा जगत के अन्य विजेताओं की सूची
72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में केवल रणदीप हुड्डा ही नहीं, बल्कि कई अन्य बेहतरीन फिल्मों और कलाकारों को भी उनके शानदार काम के लिए सम्मानित किया जा रहा है। चर्चित राजनीतिक पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म 'आर्टिकल 370' को बेस्ट फीचर फिल्म का प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला है, जबकि 'भंगार' को बेस्ट नॉन-फीचर फिल्म और 'राम-नामी' को बेस्ट डॉक्यूमेंट्री का खिताब दिया गया है।
अभिनय श्रेणी की बात करें तो दिग्गज अभिनेता ममूटी को फिल्म 'ब्रह्मयुगम' के लिए और युवा स्टार कार्तिक आर्यन को 'चंदू चैंपियन' में उनकी दमदार अदायगी के लिए बेस्ट एक्टर के अवॉर्ड से नवाजा जाएगा। वहीं, 'आर्टिकल 370' में अपने बेहतरीन अभिनय का प्रदर्शन करने वाली अभिनेत्री यामी गौतम को बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड मिलने जा रहा है। इन तमाम पुरस्कारों के साथ इस बार का नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स समारोह भारतीय सिनेमा के विविधीकरण और बेहतरीन कहानियों की जीत का प्रतीक बन गया है।








