राशन वितरण प्रणाली में धांधली से बढ़ा जनता का आक्रोश
देशभर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी पीडीएस को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए भले ही तमाम दावे किए जाते हों, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी कई सवाल खड़े करती है। हाल ही में राशन वितरण में हो रही कथित घटतौली और अनियमित्ताओं के खिलाफ कार्डधारकों का गुस्सा सड़क पर साफ देखने को मिला। राशन कार्डधारकों ने आरोप लगाया कि उन्हें कोटे की दुकानों से तय मात्रा में पूरा अनाज नहीं मिल रहा है, जिससे गरीब परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट पैदा हो रहा है।
यही नहीं, कई जगहों पर वजन में हेराफेरी और पारदर्शिता की कमी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। आम आदमी जब अपनी मेहनत की कमाई से राशन खरीदने पहुंचता है, तो उसे कोटेदार की मनमानी का शिकार होना पड़ता है। इसी अन्याय और व्यवस्था की उदासीनता के खिलाफ स्थानीय नागरिकों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन का रास्ता चुना।
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घटतौली के खिलाफ सड़कों पर उतरे पीड़ित कार्डधारक
प्रदर्शन के दौरान कार्डधारकों ने बताया कि उन्हें मिलने वाले खाद्यान्न में लगातार कटौती की जा रही है। जब इस बारे में कोटेदार से सवाल किया जाता है, तो संतोषजनक जवाब मिलने के बजाय अभद्रता की जाती है और राशन कार्ड निरस्त करने की धमकी दी जाती है। इस मनमानी से तंग आकर आखिरकार लोगों का सब्र जवाब दे गया और वे बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए।
प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर और प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए अपना रोष प्रकट किया। उनका साफ कहना था कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचने से पहले ही बिचौलिये और भ्रष्ट कोटेदार हड़प रहे हैं। इस तरह के मामलों से सरकार की छवि पर भी बट्टा लगता है और आम जनता का व्यवस्था से भरोसा उठने लगता है.
पारदर्शिता और डिजिटल व्यवस्था के दावों की खुली पोल
सरकार की ओर से डिजिटल तौल कांटे और ई-पॉस् मशीनों के जरिए राशन वितरण को पारदर्शी बनाने के लाख दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर तकनीकी खामियों और मानवीय मिलीभगत के चलते यह सिस्टम कई बार बेअसर साबित होता है। कार्डधारकों का आरोप है कि मशीनों में अंगूठा लगवाने के बाद भी उन्हें कम राशन थमाया जाता है। डिजिटल पर्ची न देना या कम वजन के पैकेट थमा देना आम बात हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र को मजबूत नहीं किया जाएगा और कोटेदारों पर सख्त कानूनी शिकंजा नहीं कसा जाएगा, तब तक ऐसी अनियमित्ताओं पर लगाम लगाना मुश्किल होगा। भ्रष्टाचार के इन मामलों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में अभी भी बहुत सुधार की गुंजाइश बाकी है।
अधिकारियों के आश्वासन के बाद शांत हुआ प्रदर्शन
प्रदर्शन की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आक्रोशित कार्डधारकों को शांत कराते हुए उनकी शिकायतें ध्यान से सुनीं। विभाग की ओर से यह भरोसा दिलाया गया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि कोई भी कोटेदार घटतौली या भ्रष्टाचार में लिفت पाया जाता है, तो उसका लाइसेंस तुरंत निरस्त कर दिया जाएगा।
"सार्वजनिक वितरण प्रणाली में किसी भी प्रकार की अनियमित्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कार्डधारकों की शिकायतों की गंभीरता से जांच कराई जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।"— स्थानीय खाद्य आपूर्ति अधिकारी
प्रशासनिक आश्वासन के बाद फिलहाल प्रदर्शनकारी शांत हुए हैं, लेकिन उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि यदि जल्द ही व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और दोषी कोटेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे इससे भी बड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
भविष्य के लिए सबक और सुधार की जरूरत
यह पूरी घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कागजी दावों से अलग धरातल पर अभी बहुत काम किया जाना बाकी है। खाद्यान्न वितरण जैसी बेहद संवेदनशील योजना में जरा सी भी लापरवाही सीधे तौर पर गरीबों के पेट पर लात मारने जैसी है। सरकार और प्रशासन को मिलकर एक ऐसा फुलप्रूफ मैकेनिज्म तैयार करना होगा, जिसमें पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता हो और किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार की गुंजाइश न बचे।
अंततः, जनता की जागरूकता ही इस तरह की कुप्रथाओं के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है। जब तक आम नागरिक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर मुखर नहीं होंगे, तब तक व्यवस्था में सुधार लाना कठिन होगा। इस आंदोलन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि एकजुटता के जरिए भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद की जा सकती है और भ्रष्ट तंत्र को जवाबदेह बनाया जा सकता है।


