नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की अर्थव्यवस्था और बढ़ती कीमतों को काबू में रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 प्रतिशत बढ़ाने का फैसला लिया गया है। साल 2023 के बाद यह पहला मौका है जब ब्याज दरों में सीधा इजाफा किया गया है। इस ताजा बढ़ोतरी के बाद अब रेपो रेट बढ़कर 5.5 प्रतिशत पर पहुंच गया है। इस फैसले का सीधा मतलब यह है कि बैंकों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाएगा और वे इसका बोझ आम जनता पर डालेंगे।
रिजर्व बैंक के इस कदम से देश के करोड़ों होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वाले ग्राहकों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। बैंक अब बहुत जल्द अपने लोन पर ब्याज दरों को बढ़ा देंगे, जिससे हर महीने चुकाई जाने वाली ईएमआई यानी किस्त की रकम बढ़ जाएगी। जिन लोगों ने पहले से ही浮ते हुए यानी वेरिएबल ब्याज दरों पर कर्ज ले रखा है, उनकी मासिक जेब का बजट अब गड़बड़ा जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि खुदरा महंगाई को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक के पास यह कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया था, ताकि बाजार में पैसों के प्रवाह को थोड़ा धीमा किया जा सके।
होम लोन और रियल एस्टेट बाजार पर पड़ेगा सीधा असर
ब्याज दरें बढ़ने से देश के रियल एस्टेट सेक्टर को भी बड़ा झटका लग सकता है। पिछले कुछ महीनों से मकानों की बिक्री में तेजी देखने को मिल रही थी, लेकिन होम लोन महंगा होने से अब नए खरीदार थोड़ा पीछे हट सकते हैं। जब बैंक होम लोन पर ज्यादा ब्याज वसूलेंगे, तो फ्लैट और मकान खरीदना आम आदमी के लिए और ज्यादा खर्चीला हो जाएगा। बिल्डर्स और प्रॉपर्टी डेवलपर्स का मानना है कि इस फैसले से आवास बाजार की रफ्तार थोड़ी सुस्त हो सकती है, क्योंकि ईएमआई बढ़ने से मध्यम वर्ग के खरीदारों की क्रय शक्ति सीधे तौर पर प्रभावित होगी।
बैंकिंग सेक्टर से जुड़े जानकारों का कहना है कि रेपो रेट में इस बढ़ोतरी का असर केवल कर्ज लेने वालों पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी कराने वाले निवेशकों को भी फायदा मिल सकता है। बैंक अब अपनी जमा योजनाओं पर ब्याज दरों में इजाफा कर सकते हैं, जिससे बचत करने वाले लोगों को कुछ राहत जरूर मिलेगी। हालांकि, बाजार में नकदी की स्थिति को संतुलित करने के लिए आरबीआई गवर्नर ने आगामी महीनों में भी आर्थिक आंकड़ों पर पैनी नजर रखने के संकेत दिए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर और कदम उठाए जा सकें।
संबंधित खबरें
आम आदमी के मासिक बजट पर बढ़ जाएगा वित्तीय दबाव
राजधानी दिल्ली समेत देश के अन्य महानगरों में अपने सपनों का आशियाना बनाने वाले आम लोगों के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है। पहले से ही रसोई के सामान और रोजमर्रा की चीजों की महंगाई से जूझ रहे परिवारों के लिए लोन की बढ़ी हुई किस्तें भारी पड़ेंगी। एक तरफ जहां महंगाई कम करने के लिए यह नीतिगत बदलाव जरूरी बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ आम आदमी को अपने घर का बजट चलाने के लिए अब ज्यादा पैसे का इंतजाम करना होगा। वित्तीय सलाहकारों का सुझाव है कि कर्जधारकों को अपनी ईएमआई को मैनेज करने के लिए पहले से ही वित्तीय योजना तैयार रखनी चाहिए।
द फ्रीलान्स की टीम द्वारा जुटाई गई जमीनी जानकारी के अनुसार, देश के प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों ने आरबीआई के इस फैसले के बाद अंदरखाने अपनी रणनीतियां बनानी शुरू कर दी हैं। आने वाले कुछ ही हफ्तों में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक लोन की नई दरें आधिकारिक तौर पर लागू कर देंगे। ऐसे में ग्राहकों के पास यह विकल्प भी होगा कि वे अपने मौजूदा लोन को कम ब्याज दर वाले दूसरे बैंकों में ट्रांसफर कराने के विकल्पों पर विचार करें। कुल मिलाकर, रिजर्व बैंक के इस फैसले ने वित्तीय बाजार में हलचल पैदा कर दी है और आने वाले दिनों में इसका पूरा असर भारतीय अर्थव्यवस्था के हर कोने में साफ दिखाई देगा।



