नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश में लगातार बढ़ती महंगाई और हाल ही में रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट बढ़ाए जाने के बाद राजनीतिक पारा चढ़ गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और सड़क से लेकर संसद तक विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए हैं। शिमला और मुंबई समेत देश के कई बड़े शहरों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार की आर्थिक नीतियों को पूरी तरह फेल बताया। पार्टी का कहना है कि रोजमर्रा की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं और सरकार आम जनता की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय चुप्पी साधे बैठी है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने एक बयान जारी कर कहा है कि देश में महंगाई मैन मोदी का कहर लगातार जारी है जिससे गरीब और मध्यम वर्ग का जीना मुहाल हो गया है। जानकारों का मानना है कि रिजर्व बैंक के इस कदम से होम लोन और कार लोन की ब्याज दरें बढ़ जाएंगी जिसका सीधा असर आम आदमी की मासिक कमाई और बजट पर पड़ेगा। लोग पहले से ही बेरोजगारी और महंगाई से परेशान हैं और ऐसे में कर्ज महंगा होना जनता के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।
शिमला से मुंबई तक सड़कों पर उतरी कांग्रेस
पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से लेकर मायानगरी मुंबई तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं का गुस्सा सड़कों पर साफ दिखाई दिया। शिमला में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और बढ़े हुए दामों को तुरंत वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि गैस सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल और खाने-पीने की चीजों के दाम लगातार बढ़ने से रसोई का बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है। मुंबई में भी सिविल सोसाइटी संगठनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने महंगाई के खिलाफ आवाज उठाई और सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उनकी कमाई उतनी नहीं बढ़ रही है जितनी तेजी से महंगाई और टैक्स बढ़ रहे हैं।
दूसरी ओर, इस पूरे राजनीतिक हंगामे पर सत्ताधारी दल की तरफ से भी पलटवार किया गया है। सरकार से जुड़े नेताओं का तर्क है कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक उथल-पुथल और सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण महंगाई में यह बढ़ोतरी आई है। उनका दावा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और सरकार महंगाई को नियंत्रित करने के लिए लगातार कड़े कदम उठा रही है। रिजर्व बैंक के फैसलों को अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने और महंगाई को एक दायरे में रखने का जरूरी उपाय बताया जा रहा है ताकि देश का वित्तीय संतुलन बना रहे।
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ब्याज दर बढ़ने से आम आदमी की बढ़ी मुश्किलें
बैंकिंग और वित्तीय मामलों के जानकारों का कहना है कि रेपो रेट में बढ़ोतरी का सीधा असर बैंकों से लिए जाने वाले लोन पर पड़ता है। जब रेपो रेट बढ़ता है तो बैंक भी लोन की ब्याज दरें बढ़ा देते हैं जिससे ग्राहकों की मासिक किस्त यानी ईएमआई महंगी हो जाती है। एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए घर या गाड़ी का लोन चुकाना पहले से ही एक बड़ा आर्थिक बोझ होता है और ब्याज दरें बढ़ने से यह बोझ और अधिक भारी हो जाता है। शिमला और मुंबई जैसे महानगरों में रहने वाले नौकरीपेशा लोगों का कहना है कि उनके वेतन में मामूली बढ़ोतरी होती है जबकि खर्च हर महीने लगातार बढ़ता जा रहा है।
मैदान पर उतरी कांग्रेस पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने आम आदमी को राहत देने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो यह आंदोलन और अधिक तीव्र किया जाएगा। पार्टी जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की तैयारी कर रही है ताकि जनता के मुद्दों को और जोर-शोर से उठाया जा सके। आने वाले दिनों में यह राजनीतिक टकराव और गहराने की पूरी संभावना है क्योंकि विपक्षी दल इसे एक बड़े चुनावी मुद्दे के रूप में पेश करने की रणनीति बना रहे हैं।
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल और निष्कर्ष
द फ्रीलान्स की टीम द्वारा की गई जमीनी पड़ताल में यह बात सामने आई है कि आम नागरिक महंगाई और बढ़ते खर्चों को लेकर सचमुच बहुत परेशान है। बाजारों में सब्जी, दाल और अन्य जरूरी सामानों के दाम ऊंचे बने हुए हैं जिससे हर परिवार का मासिक बजट गड़बड़ा गया है। राजनीतिक दलों के लिए यह मुद्दा इस समय जनता का समर्थन हासिल करने का एक बड़ा जरिया बन गया है। हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार आने वाले दिनों में आम जनता को महंगाई से राहत दिलाने के लिए कौन सी नई आर्थिक योजनाएं लेकर आती है और रिजर्व बैंक अपनी अगली समीक्षा बैठक में क्या फैसले लेता है।




