कीव/मास्को — रूस और यूक्रेन के बीच पिछले कुछ महीनों से ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को लेकर एक अनकहा समझौता चल रहा था। अब यह सीजफायर पूरी तरह टूट चुका है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि उनके सैनिक अब रूसी तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा केंद्रों पर बड़े पैमाने पर हमले करेंगे। इस ताजा घटनाक्रम से दोनों देशों के बीच चल रहा युद्ध एक बार फिर से ज्यादा खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है।
बीते कुछ हफ्तों से दोनों तरफ से शांति वार्ता की उम्मीदें जताई जा रही थीं, लेकिन जमीनी हालात अब बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं। यूक्रेन का मानना है कि रूस लगातार उसकी नागरिक बस्तियों और बिजलीघरों को निशाना बना रहा है। इसके जवाब में कीव ने अब रूस की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले तेल और गैस सेक्टर पर फिर से प्रहार करने की पूरी तैयारी कर ली है।
रूस की तेल रिफाइनरी बनीं अगला मुख्य निशाना
यूक्रेनी सेना ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए उन ठिकानों को ढूंढना शुरू कर दिया है जो रूसी युद्ध के बजट को सीधा पैसा देते हैं। रूसी तेल रिफाइनरियां और ईंधन डिपो इस योजना के केंद्र में हैं। पिछले हमलों में यूक्रेनी ड्रोनों ने रूसी रिफाइनरियों को भारी नुकसान पहुंचाया था, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में हड़कंप मच गया था। अब एक बार फिर वैसे ही हमलों की आशंका से ऊर्जा बाजार में डर का माहौल बन गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि इन हमलों से रूस की पेट्रोल और डीजल सप्लाई प्रभावित होगी। इससे रूसी सेना की रसद आपूर्ति पर भी बुरा असर पड़ेगा। हालांकि, मॉस्को ने भी चेतावनी दी है कि यदि यूक्रेन ने उसके ऊर्जा संयंत्रों पर हमले नहीं रोके, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। रूसी रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उनकी सेना हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत पर इसका असर
रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा सीजफायर टूटने का सीधा असर पूरी दुनिया के बाजारों पर पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतें फिर से ऊपर जाने लगी हैं। यदि युद्ध का दायरा और बढ़ता है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं, यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है। सरकार और तेल कंपनियां इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी देशों के नेता स्थिति को संभालने की कोशिश में जुटे हैं। लेकिन जमीन पर दोनों देशों की जिद और फौजी तैयारियां किसी बड़े समझौते की तरफ इशारा नहीं कर रही हैं। आने वाले दिनों में यह संघर्ष और भी ज्यादा भीषण रूप ले सकता है, जिससे आम नागरिकों की मुश्किलें और बढ़ेंगी।
युद्ध के मैदान में बदलता रणनीतिक समीकरण
द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, इस सीजफायर के टूटने से युद्ध का अगला चरण बेहद खूनी हो सकता है। यूक्रेन के पास अब लंबी दूरी के ड्रोन और मिसाइलें हैं जो रूस के भीतर तक मार कर सकती हैं। वहीं रूस भी अपनी वायु रक्षा प्रणाली को और मजबूत करने में लगा हुआ है। दोनों तरफ से हो रही यह बयानबाजी और सैन्य तैयारियां इस बात का संकेत देती हैं कि शांति का रास्ता अभी बहुत दूर है।


