बांदा में समाजवादी छात्र सभा का बड़ा अभियान, छात्राओं के बीच पहुंचे युवा नेता
उत्तर प्रदेश की राजनीति में युवाओं को अपने पाले में लाने और वैचारिक रूप से जोड़ने की कवायद लगातार तेज हो चुकी है। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी के छात्र संगठन यानी समाजवादी छात्र सभा ने अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए जमीनी स्तर पर संपर्क साधना शुरू कर दिया है। हाल ही में बांदा सदर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले राजकीय महिला डिग्री कॉलेज परिसर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम को 'छात्र-नौजवान पीडीए जागरूकता एवं सदस्यता अभियान' का नाम दिया गया था, जिसके माध्यम से सीधे तौर पर कॉलेज की छात्राओं से संवाद स्थापित किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य केंद्र बिंदु आधुनिक शिक्षा प्रणाली, रोजगार के नए अवसरों और महिला सुरक्षा के साथ-साथ उनके उज्ज्वल भविष्य से जुड़े तमाम बुनियादी मुद्दे रहे। संगठन के प्रतिनिधियों का मानना है कि जब तक युवा वर्ग विशेषकर बेटियां अपनी बात मुखर होकर नहीं रखेंगी, तब तक नीतियों में बदलाव लाना संभव नहीं है। इस दौरान कॉलेज परिसर में बड़ी संख्या में छात्राओं की उपस्थिति देखने को मिली, जिन्होंने पूरी उत्सुकता के साथ इस संवाद सत्र में अपनी हिस्सेदारी दर्ज कराई।
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शिक्षा और रोजगार के मोर्चे पर छात्राओं ने रखी अपनी बेबाक राय
संवाद सत्र के दौरान जब मंच खुला तो छात्राओं ने भी बिना किसी झिझक के अपनी पढ़ाई-लिखाई और भविष्य को लेकर आने वाली अड़चनों को साझा किया। उन्होंने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की कमियों, उच्च शिक्षा के बाद रोजगार की अनिश्चितता और परिसरों में मिलने वाली सुविधाओं पर खुलकर अपने विचार रखे। कई छात्राओं ने बताया कि डिग्री पूरी होने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती सही दिशा और रोजगार के अवसरों की कमी की होती है।
आयोजकों ने छात्राओं की इन तमाम बातों और सुझावों को बेहद गंभीरता के साथ नोट किया। छात्र सभा के नेताओं ने उन्हें आश्वस्त किया कि युवाओं और छात्रों की इन जायज मांगों को न केवल संगठन के मंचों पर उठाया जाएगा, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भी इनकी पैरवी की जाएगी ताकि जमीनी स्तर पर सुधार की गुंजाइश बन सके। छात्राओं का यह जुड़ाव इस बात का संकेत था कि युवा पीढ़ी अब अपने अधिकारों को लेकर पहले से कहीं अधिक जागरूक हो चुकी है।
पीडीए (PDA) फार्मूले के जरिए युवाओं को जोड़ने की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समाजवादी पार्टी इन दिनों अपने 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण को धार देने के लिए लगातार शिक्षण संस्थानों और युवाओं के बीच पहुंच रही है। इसी रणनीति के तहत बांदा के इस महिला डिग्री कॉलेज में भी सदस्यता अभियान चलाया गया। संगठन के पदाधिकारियों ने छात्राओं को समाजवादी छात्र सभा के वैचारिक उद्देश्यों से अवगत कराया और बताया कि किस तरह से पिछड़ों, शोषितों और युवाओं के हक के लिए यह मंच हमेशा से संघर्ष करता आया है।
वक्ताओं ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि छात्र और नौजवान किसी भी देश और समाज की सबसे बड़ी और ऊर्जावान शक्ति होते हैं। इतिहास गवाह है कि जब-जब युवाओं ने किसी बदलाव की ठानी है, तब-तब व्यवस्था को उनकी बात सुनने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इसी सोच के तहत इस जागरूकता अभियान का विस्तार किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक छात्र-नौजवानों को जोड़कर उन्हें उनके अधिकारों के प्रति सचेत किया जा सके।
संगठन विस्तार और भविष्य की रूपरेखा पर चर्चा
इस पूरे आयोजन का एक अन्य महत्वपूर्ण उद्देश्य समाजवादी छात्र सभा की कॉलेज इकाई को मजबूत करना और नई छात्राओं को संगठन से जोड़ना था। सदस्यता अभियान के दौरान अनेक छात्राओं ने उत्साह दिखाते हुए संगठन की सदस्यता ग्रहण की। पदाधिकारियों ने उन्हें पार्टी की नीतियों और छात्र हितों के लिए चलाए जाने वाले आगामी आंदोलनों व कार्यक्रमों की रूपरेखा से भी परिचित कराया।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने कॉलेज प्रशासन और सभी छात्राओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह अभियान सिर्फ बांदा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में जिले के अन्य शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों में भी इसका विस्तार किया जाएगा। युवाओं और खासकर छात्राओं की बढ़ती भागीदारी यह बताती है कि आने वाले समय में छात्र राजनीति के समीकरणों में शिक्षा और रोजगार के मुद्दे सबसे ऊपर रहने वाले हैं।
"शिक्षा और रोजगार आज के युवाओं की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। जब तक हमारे छात्र और नौजवान मजबूत नहीं होंगे, तब तक समाज का संपूर्ण विकास संभव नहीं है। हमारा यह अभियान बेटियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उनकी हर आवाज को बुलंद करने के लिए लगातार जारी रहेगा।" — समाजवादी छात्र सभा, पदाधिकारी








