कानपुर में समाजवादी पार्टी का बड़ा सियासी दांव, किदवई नगर से फूंका चुनावी बिगुल
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूला सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी ने कानपुर महानगर इकाई के बैनर तले अपनी सियासी जमीन को और मजबूत करने के लिए किदवई नगर विधानसभा क्षेत्र के उस्मानपुर इलाके से एक बड़े पीडीए सम्मेलन की शुरुआत कर दी है। इस आयोजन ने स्थानीय राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है, क्योंकि पार्टी ने सीधे तौर पर जनता के बुनियादी मुद्दों को अपने एजेंडे के केंद्र में रखा है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महानगर अध्यक्ष फजल महमूद ने की, जबकि मुख्य अतिथि के तौर पर सपा प्रदेश सचिव समरथ पाल ने शिरकत की। इस सम्मेलन में भारी संख्या में स्थानीय लोग, पार्टी कार्यकर्ता और विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधि शामिल हुए। आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज के वंचित और शोषित तबकों की आवाज को बुलंद करना और आगामी राजनीतिक रणनीतियों के लिए जमीन तैयार करना बताया जा रहा है।
संबंधित खबरें
सड़कों के गड्ढों और नगर निगम के कामकाज पर विपक्ष का तीखा हमला
सम्मेलन के दौरान कानपुर शहर की बदहाल बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा सबसे आगे रहा। समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष हाजी फजल महमूद ने स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि औद्योगिक नगरी के रूप में पहचाने जाने वाले कानपुर की सड़कें आज गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं, जिससे आम जनता और वाहन चालकों का निकलना दूभर हो गया है।
फजल महमूद ने आगे आरोप लगाया कि विकास कार्यों के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है और जमीनी स्तर पर जनता त्राहिमाम कर रही है। उन्होंने कहा कि शहर के चौराहों से लेकर गलियों तक सफाई और प्रकाश व्यवस्था की स्थिति बेहद दयनीय है, जिससे साबित होता है कि स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह विफल हो चुकी है।
रोजगार और शिक्षा के मोर्चे पर सरकार को घेरा, नेताओं ने उठाए सवाल
युवाओं के भविष्य और रोजगार के मुद्दे पर सपा प्रदेश सचिव समरथ पाल ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने हाल ही में आए एक वरिष्ठ नेता के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें स्वरोजगार के तौर पर टैक्सी चलाने की बात कही गई थी। समरथ पाल ने कड़े शब्दों में कहा कि आज प्रदेश और देश का युवा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद डिग्री हाथ में लिए भटक रहा है, उसे टैक्सी चलाने की सलाह देना युवाओं की काबिलियत का अपमान है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को पकौड़े तलने या टैक्सी चलाने के उपदेश देने के बजाय सरकार को ठोस और स्थायी रोजगार के अवसर मुहैया कराने चाहिए। शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज शिक्षण संस्थानों की स्थिति ऐसी हो गई है कि गरीब परिवारों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना एक सपना बनता जा रहा है।
"कानपुर के युवाओं को रोजगार चाहिए, उन्हें भटकाने वाले बयान नहीं। हमारी पार्टी पिछड़े, दलित और वंचित समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करने को पूरी तरह तैयार है। जनता अब सब समझ चुकी है और बदलाव का मन बना चुकी है।" — समरथ पाल, प्रदेश सचिव, समाजवादी पार्टी
किदवई नगर में रुके 100 बेड के अस्पताल का मुद्दा भी छाया
इस सम्मेलन के आयोजक और सपा नेता सुधांशु मिश्रा ने स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का कड़ा जिक्र किया। उन्होंने वादा किया कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनते ही किदवई नगर क्षेत्र में लंबे समय से अटके पड़े 100 बेड के अस्पताल के निर्माण कार्य को तुरंत पूरा कर चालू कराया जाएगा, ताकि यहां की जनता को इलाज के लिए दर-दर न भटकना पड़े।
सुधांशु मिश्रा ने यह भी कहा कि गरीबों के हक के आवास और अन्य कल्याणकारी योजनाएं जो वर्तमान में फाइलों में धूल फांक रही हैं, उन्हें धरातल पर उतारा जाएगा। उन्होंने दावा किया कि पाल समाज और अन्य पिछड़े वर्ग पूरी मजबूती के साथ समाजवादी पार्टी के साथ खड़े हैं और आने वाले समय में जनता इसका करारा जवाब देगी।
सम्मेलन में उमड़ी भीड़ और आगामी राजनीतिक संकेत
इस पीडीए सम्मेलन में शैलेंद्र यादव ‘मिंटू’, संजय सेंगर, हुकुम सिंह, मेराज अहमद, अजय श्रीवास्तव, सुलेखा यादव, पूजा यादव, दीप्ति, सोनी गुप्ता, दीपशिखा, राजेंद्र नेता, राजू पाल, रियाज, अभिषेक मिश्रा, मनीष यादव, अभिलाष पासवान और मुकेश दीक्षित सहित बड़ी संख्या में पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ उपाध्यक्ष शैलेंद्र यादव ने बहुत ही आक्रामक अंदाज में किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कानपुर जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक शहर में इस तरह के सम्मेलनों के जरिए समाजवादी पार्टी शहरी मतदाताओं और विशेषकर पिछड़े व दलित वर्ग के बीच अपनी पकड़ को और अधिक गहरा करने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में इस तरह के आयोजन अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी देखने को मिल सकते हैं, जिससे राज्य का सियासी पारा गर्माना तय है।







