नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर विरोध प्रदर्शनों का दौर तेज होता दिख रहा है। सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस यानी सीजेपी के नेता सौरव दास ने आगामी 10 अक्टूबर को होने वाले प्रदर्शन से पहले बड़ा कदम उठाया है। सौरव दास ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से मुलाकात की और अपने विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा साझा की। पुलिस प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर बनाए हुए है ताकि राजधानी की कानून व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित रहे।
इस मुलाकात के दौरान सौरव दास ने मीडिया से बातचीत में तीखे तेवर दिखाए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक उनकी और उनके संगठन की मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक उनका यह संघर्ष रुकने वाला नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि वे अपने तय कार्यक्रम के अनुसार ही आगे बढ़ेंगे और किसी भी तरह के दबाव में आने वाले नहीं हैं। पुलिस अधिकारियों ने भी उन्हें कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखने और शांति बनाए रखने की हिदायत दी है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी और पुलिस से तीखी तकरार
जंतर-मंतर पर होने वाले इस आगामी प्रदर्शन को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। सौरव दास लगातार अपनी तीखी बयानबाजी के कारण चर्चा में बने हुए हैं। उन्होंने हाल ही में यह भी कहा था कि जनता ही असली फैसला करेगी और अदालतों के फैसलों से इतर आम लोग अपनी राय खुद बनाएंगे। उनके इस तरह के बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों और कानूनी हलकों में भी चर्चाएं काफी गर्म हो गई हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि जंतर-मंतर पर जुटने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। दिल्ली पुलिस के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में भी इस मामले को लेकर लगातार बैठकों का दौर जारी है। सौरव दास और उनके साथियों ने साफ कर दिया है कि वे अपनी बात को जनता तक पहुंचाने के लिए हरसंभव लोकतांत्रिक तरीका अपनाएंगे। पुलिस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि प्रदर्शन के दौरान शहर की ट्रैफिक व्यवस्था और शांति भंग ना हो।
सीजेपी नेताओं की चेतावनी और अदालती बयानों पर गरमाई राजनीति
दूसरी तरफ, देश की अदालतों और चुनाव आयोग से जुड़े मामलों को लेकर भी इन दिनों तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। हाल ही में मुख्य न्यायाधीश और चुनाव आयोग से जुड़े विवादों के बीच कई तरह की टिप्पणियां सामने आई हैं। सीजेपी के मंच से सरकार और व्यवस्था पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। सौरव दास और अभिजीत दिपके जैसे नेता लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं और सरकार को सीधी चेतावनी दे रहे हैं।
आम जनता के बीच भी इन बयानों को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। एक तरफ जहां कुछ लोग इसे लोकतांत्रिक अधिकार बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ व्यवस्था पर इस तरह के हमलों को लेकर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। आने वाले दिनों में 10 अक्टूबर का यह प्रदर्शन कितना बड़ा रूप लेता है, यह देखने वाली बात होगी। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और आगे के घटनाक्रम से आपको लगातार अपडेट करती रहेगी।



