नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी एसबीआई रिसर्च ने अपनी एक नई रिपोर्ट में सरकार के सामने एक बड़ा प्रस्ताव रखा है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि शेयर बाजार में निवेश बढ़ाने और देश की आर्थिक ग्रोथ को तेज करने के लिए एलटीसीजी टैक्स को पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए। पिछले कुछ समय से बाजार के जानकारों और निवेशकों के बीच भी इस कर को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही थीं। अब देश के सबसे बड़े बैंक के अर्थशास्त्रियों द्वारा यह बात कहे जाने के बाद इस मुद्दे पर बहस और ज्यादा तेज हो गई है।
एसबीआई रिसर्च की इस रिपोर्ट के आने के बाद निवेशकों में एक नई उम्मीद जग गई है। रिपोर्ट में साफ तौर पर दावा किया गया है कि यदि सरकार इक्विटी पर लगने वाले इस कर को हटा देती है, तो इससे देश के भीतर विदेशी और घरेलू पूंजी का बाहर जाना काफी हद तक कम हो जाएगा। जब निवेशक शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं, तो उन्हें अपने मुनाफे पर टैक्स चुकाना पड़ता है। नियम के अनुसार एक साल से ज्यादा समय तक निवेश रखने पर एलटीसीजी टैक्स देना होता है। अब जानकारों का मानना है कि इस कर के हटने से छोटे और बड़े दोनों तरह के निवेशकों को बड़ा फायदा मिलेगा और वे बिना किसी डर के खुलकर बाजार में पैसा लगा सकेंगे।
शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड निवेशकों को कैसे मिलेगा फायदा
आम तौर पर जब कोई व्यक्ति शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में लंबे समय के लिए निवेश करता है, तो उसे अपने मुनाफे का एक हिस्सा टैक्स के रूप में सरकार को देना होता है। वर्तमान नियमों के तहत वित्तीय वर्ष में एक लाख पच्चीस हजार रुपये तक के मुनाफे पर छूट मिलती है, लेकिन इससे ज्यादा कमाई होने पर टैक्स भरना पड़ता है। एसबीआई के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि इस कर को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए, तो लोगों के पास निवेश करने के लिए ज्यादा पैसा बचेगा। इससे बाजार में नकदी बढ़ेगी और कंपनियों को भी अपने कारोबार का विस्तार करने में आसानी होगी।
म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले आम लोग भी इन दिनों टैक्स प्लानिंग को लेकर काफी सतर्क हो गए हैं। वित्तीय सलाहकार अक्सर लोगों को समझाते हैं कि केवल अच्छा रिटर्न पाने के चक्कर में न रहें बल्कि टैक्स के नियमों को भी ठीक से समझें। शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म टैक्स के नए नियमों के कारण कई बार निवेशकों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ती है। अगर सरकार एसबीआई रिसर्च की इस मांग पर विचार करती है, तो निवेशकों को अपनी टैक्स प्लानिंग करने में बहुत आसानी होगी और उन्हें अपनी मेहनत की कमाई का ज्यादा हिस्सा अपने पास रखने का मौका मिलेगा।
पूंजी के पलायन को रोकने के लिए क्यों जरूरी है यह कदम
आज के समय में वैश्विक बाजार में बहुत प्रतिस्पर्धा चल रही है। दुनिया भर के निवेशक उसी देश में अपना पैसा लगाना चाहते हैं जहां उन्हें बेहतर रिटर्न के साथ-साथ कम कर चुकाना पड़े। भारत से भी कई बार पूंजी निकलकर दूसरे देशों के बाजारों में चली जाती है। एसबीआई की रिपोर्ट में इसी बात पर जोर दिया गया है कि अगर हमें अपने देश के शेयर बाजार को दुनिया का सबसे मजबूत बाजार बनाना है, तो कर के नियमों को और ज्यादा सरल बनाना होगा। एलटीसीजी टैक्स हटने से विदेशी निवेशकों का भरोसा भी भारत पर और ज्यादा मजबूत होगा।
जमीनी स्तर पर अगर देखा जाए तो आम निवेशक हमेशा से ही सरकार से यह उम्मीद करते आए हैं कि उन्हें कर के बोझ से राहत मिले। हालांकि सरकार की तरफ से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं आया है, लेकिन एसबीआई जैसे बड़े संस्थान की इस सलाह को बहुत अहम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार बजट या अन्य आर्थिक नीतियों में इस सुझाव पर कोई बड़ा कदम उठाती है या नहीं। तब तक निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकारों की राय लेकर ही बाजार में सोच-समझकर निवेश करना चाहिए।
भविष्य की रणनीति और निवेशकों के लिए जरूरी सलाह
किसी भी निवेशक के लिए यह जरूरी है कि वह केवल खबरों के भरोसे कोई बड़ा फैसला न ले। बाजार में उतार-चढ़ाव हमेशा बना रहता है और टैक्स के नियम भी समय-समय पर बदलते रहते हैं। जानकारों का कहना है कि निवेशकों को अपनी जोखिम लेने की क्षमता को देखकर ही पैसे लगाने चाहिए। प्रॉफिट हार्वेस्टिंग और सही समय पर मुनाफा बुक करने जैसी रणनीतियां निवेशकों के बहुत काम आती हैं।
द फ्रीलान्स की टीम लगातार इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। जैसे ही सरकार या वित्त मंत्रालय की तरफ से इस संबंध में कोई नया निर्देश या बयान जारी किया जाएगा, हम अपने पाठकों तक सबसे पहले सटीक जानकारी पहुंचाएंगे। फिलहाल निवेशकों के लिए यही सलाह है कि वे घबराने के बजाय अपने निवेश को लंबी अवधि के नजरिए से देखें और बाजार के ट्रेंड पर पैनी नजर रखें।





