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बदलते मौसम में तेज बुखार और बदन दर्द को न करें नजरअंदाज, हो सकता है डेंगू का गंभीर खतरा

मौसम बदलने के साथ ही अस्पतालों में वायरल और मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। डॉक्टर चेतावनी दे रहे हैं कि यदि बुखार के साथ तेज बदन दर्द और आंखों के पीछे चुभन महसूस हो, तो इसे सामान्य सर्दी-जुकाम न समझें बल्कि तुरंत चिकित्सीय जांच करवाएं।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•3 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•26
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बदलते मौसम में तेज बुखार और बदन दर्द को न करें नजरअंदाज, हो सकता है डेंगू का गंभीर खतरा
📷 बदलते मौसम में तेज बुखार और बदन दर्द को न करें नजरअंदाज, हो सकता है डेंगू का गंभीर खतरा — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • बदलते मौसम के साथ ग्रामीण और शहरी इलाकों में वायरल बुखार और पेट दर्द के मामलों में भारी उछाल दर्ज किया गया है।
  • तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण डेंगू की तरफ स्पष्ट इशारा कर सकते हैं।
  • विशेषज्ञों की सलाह है कि डॉक्टर के परामर्श के बिना कभी भी पेनकिलर या एस्पिरिन जैसी दवाएं न लें क्योंकि इससे ब्लीडिंग का खतरा बढ़ जाता है।

बदलते मौसम की मार: क्यों बढ़ रहे हैं वायरल और डेंगू के मरीज?

हर साल जब मौसम करवट बदलता है, तो हमारे शरीर पर इसका सीधा असर देखने को मिलता है। इन दिनों तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण देश भर के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की ओपीडी में मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं। लोग सर्दी, जुकाम, खांसी, पेट दर्द और तेज बुखार जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। हालांकि आम जनता इसे मौसमी बदलाव का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर देती है, लेकिन कई बार यह लापरवाही भारी पड़ सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह समय डेंगू और मलेरिया जैसी गंभीर वेक्टर जनित बीमारियों के फैलने का सबसे संवेदनशील दौर होता है।

हाल ही में विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों से मिले आंकड़ों के मुताबिक, रोजाना सैकड़ों मरीज पेट दर्द और तेज बुखार की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। गांवों से लेकर शहरों तक जलभराव और मच्छरों के प्रकोप के कारण मौसमी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ गया है। ऐसे में यह बेहद जरूरी हो जाता है कि हम शरीर में होने वाले हर छोटे-बड़े बदलाव को गंभीरता से लें और समय रहते उचित कदम उठाएं।

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डेंगू और वायरल बुखार के लक्षणों में अंतर और पहचान

यह समझना बेहद आवश्यक है कि हर बुखार केवल सामान्य वायरल नहीं होता। जब शरीर का तापमान अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाए, साथ ही हड्डियों और मांसपेशियों में असहनीय दर्द हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। डेंगू के शुरुआती लक्षणों में माथे के आसपास तेज सिरदर्द, आंखों को हिलाने पर पीछे की तरफ चुभन जैसा दर्द, अत्यधिक थकान और भूख में अचानक कमी आना शामिल है। इसके अलावा, बीमारी के शुरुआती दिनों में त्वचा पर हल्के लाल चकत्ते या रैशेज भी उभर सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, चूंकि सामान्य वायरल फीवर और डेंगू के शुरुआती लक्षण काफी हद तक एक जैसे होते हैं, इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना खतरनाक हो सकता है। बीमारी की सही पुष्टि के लिए डॉक्टर की सलाह से समय पर ब्लड टेस्ट करवाना अनिवार्य है। बीमारी की शुरुआत में एनएस1 एंटीजन टेस्ट और कुछ दिनों बाद एंटीबॉडी टेस्ट के जरिए स्थिति साफ हो जाती है, जिससे सही समय पर सटीक इलाज शुरू किया जा सके।

"अगर बुखार दो-तीन दिनों से ज्यादा बना हुआ है या लक्षण लगातार गंभीर हो रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। डेंगू के दौरान प्लेटलेट्स की संख्या और शरीर में पानी की कमी पर पैनी नजर रखना बेहद जरूरी होता है। मरीज को पर्याप्त आराम करना चाहिए और हाइड्रेटेड रहना चाहिए।"— डॉ. हतिंदर जीत सिंह सेठी, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन विभाग, फोर्टिस हॉस्पिटल

इन गंभीर लक्षणों दिखते ही तुरंत भागे अस्पताल, न करें देरी

क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ खास स्थितियां ऐसी होती हैं जिन्हें हेल्थ इमरजेंसी माना जाता है। यदि बुखार के साथ-साथ सांस लेने में गंभीर परेशानी, सीने में लगातार दर्द, बहुत ज्यादा बेहोशी या सुस्ती जैसी स्थिति पैदा हो जाए, तो घर पर इलाज करने की भूल बिल्कुल न करें। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के मामले में इन खतरों की आशंका और भी अधिक होती है, इसलिए उन्हें विशेष देखरेख की आवश्यकता होती है.

इसके अलावा, यदि मरीज के नाक या मसूड़ों से हल्का खून आने लगे, उल्टी या मल में खून के निशान दिखाई दें, शरीर पर अचानक नीले या लाल चकत्ते पड़ने लगें, या फिर लगातार उल्टी और दस्त की वजह से शरीर में पानी की भारी कमी हो जाए, तो बिना एक पल गंवाए अस्पताल पहुंचना चाहिए। ये सभी संकेत इस बात की गवाही देते हैं कि संक्रमण खतरनाक मोड़ ले रहा है और तत्काल चिकित्सकीय हस्तक्षेप की जरूरत है।

गलत दवाइयों का सेवन बन सकता है जानलेवा

अक्सर लोग बुखार या बदन दर्द होने पर बिना किसी डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से जाकर कोई भी पेनकिलर या एंटीबायोटिक खा लेते हैं। लेकिन डेंगू या गंभीर वायरल संक्रमण के दौरान यह आदत जानलेवा साबित हो सकती है। डॉक्टरों की सख्त चेतावनी है कि डेंगू जैसी बीमारियों में एस्पिरिन, आइबुप्रोफेन या अन्य नॉन-स्टेरॉयड एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDS) का सेवन कभी नहीं करना चाहिए। इस प्रकार की दवाइयां शरीर में प्लेटलेट्स के काम को प्रभावित करती हैं और आंतरिक रक्तस्राव यानी ब्लीडिंग का खतरा अत्यधिक बढ़ा देती हैं।

बुखार होने पर केवल डॉक्टर द्वारा निर्देशित पैरासिटामोल का ही सीमित मात्रा में उपयोग करना चाहिए। इसके साथ ही शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन को बनाए रखने के लिए ओआरएस (ORS), नारियल पानी, नीबू पानी और प्रचुर मात्रा में सादा पानी पीते रहना चाहिए ताकि शरीर में कमजोरी और डिहाइड्रेशन की समस्या न पनप सके।

रिकवरी के बाद भी क्यों जरूरी है सतर्कता?

कई लोगों का यह मानना होता है कि एक बार बुखार उतर गया और शरीर का तापमान सामान्य हो गया, तो इसका मतलब वे पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह स्पष्ट मत है कि डेंगू या मलेरिया जैसी बीमारियों से उबरने के बाद भी शरीर को रिकवर होने में कई हफ्ते या महीने तक का समय लग सकता है। ठीक होने के बाद भी कई मरीजों में अत्यधिक थकान, कमजोरी, सांस फूलना या खून की कमी यानी एनीमिया की शिकायत बनी रहती है।

इसलिए बीमारी से ठीक होने के तुरंत बाद अत्यधिक शारीरिक श्रम करने से बचना चाहिए और अपने खान-पान में पौष्टिक आहार को शामिल करना चाहिए। शरीर को पर्याप्त पोषण, विटामिंस और भरपूर नींद देना ही पूरी तरह स्वस्थ होने की कुंजी है। बदलते मौसम की इस चुनौती से निपटने के लिए सावधानी, जागरूकता और समय पर डॉक्टर की सलाह ही हमारा सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।

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