श्रीलंका में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही सख्त जांच के बीच एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। देश की भ्रष्टाचार निरोधक संस्था (CIABOC) ने पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की पत्नी और पूर्व फर्स्ट लेडी शिरांति राजपक्षे को 1 करोड़ रुपये (श्रीलंकाई रुपये) के पब्लिक फंड घोटाले के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। श्रीलंका के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी पूर्व फर्स्ट लेडी को भ्रष्टाचार के मामले में इस तरह सीधे हिरासत में लिया गया है।
बच्चों के अस्पताल के नाम पर जुटाए गए चंदे में गड़बड़ी
जांच अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरा मामला शिरांति राजपक्षे के एनजीओ 'सिरिलिया साविया' से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि कोलंबो के प्रसिद्ध लेडी रिडवे चिल्ड्रंस हॉस्पिटल के लिए सीटी स्कैनर मशीन खरीदने के वास्ते यह चंदा जनता से जुटाया गया था। हालांकि, अस्पताल को कभी वह मशीन नहीं मिली और एनजीओ के खातों में आई इस भारी-भरकम रकम का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया।
विदेश से मेडिकल इलाज कराकर दो दिन पहले ही श्रीलंका लौटीं शिरांति राजपक्षे के वकीलों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पहले ही अग्रिम जमानत याचिका दायर कर रखी थी। इसके बावजूद, जांच एजेंसी ने पहले उनके आवास पर बयान दर्ज किया और फिर उन्हें गिरफ्तार कर कोलंबो के मुख्य मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
राजपक्षे परिवार और अन्य हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियां
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब राजपक्षे परिवार पर लगातार कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। महिंदा राजपक्षे साल 2005 से 2015 तक देश के राष्ट्रपति रहे थे, जबकि उनके छोटे भाई गोटबाया राजपक्षे को साल 2002 के आर्थिक संकट और भारी जन-आंदोलन के बाद इस्तीफा देना पड़ा था। इसके अलावा, महिंदा राजपक्षे के बड़े बेटे और विपक्षी सांसद नमल राजपक्षे भी कई अन्य भ्रष्टाचार के मामलों में आरोपी हैं। हालांकि, राजपक्षे परिवार हमेशा से इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करता आया है और इन्हें राजनीतिक प्रतिशोध करार देता रहा है।
भ्रष्टाचार निरोधक आयोग ने इस मामले में केवल शिरांति राजपक्षे ही नहीं, बल्कि बोर्ड ऑफ इन्वेस्टमेंट के फंड के दुरुपयोग के मामले में पूर्व विदेश मंत्री रोहिथा बोगोलागामा और 'सिरिलिया साविया' जांच से जुड़े फंड की मंजूरी में संलिप्तता के आरोप में नेशनल सेविंग्स बैंक के पूर्व अध्यक्ष को भी हिरासत में लिया है, जिससे देश की राजनीति में भूचाल आ गया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और विभिन्न रिपोर्ट्स पर वायरल इस खबर के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि करता है। यह मामला श्रीलंका में व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। साभार: संबंधित मीडिया रिपोर्ट्स / एजेंसियां।








