फ्रांस में खराब शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों में संसाधनों की भारी कमी को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार विकराल रूप लेता जा रहा है। इस देशव्यापी आंदोलन का सबसे चौंकाने वाला और गंभीर पहलू यह सामने आया है कि प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए 5,000 से ज्यादा लोगों में से 87 प्रतिशत नाबालिग हैं। यानी इस बड़े राजनीतिक और सामाजिक संकट में बड़ी संख्या में 18 साल से कम उम्र के स्कूली छात्र सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव और शिक्षकों की भारी कमी
प्रधानमंत्री कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस आंदोलन के दौरान अब तक 85 टीचिंग स्टाफ भी घायल हो चुके हैं। फ्रांस की राजधानी समेत देश के कई बड़े शहरों में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गृह मंत्रालय के अनुसार, इस आंदोलन में अब तक करीब 2.5 लाख से ज्यादा लोग शामिल हो चुके हैं, जबकि आयोजकों का दावा है कि प्रदर्शनकारियों की संख्या 4.5 लाख से अधिक थी।
इस पूरे गुस्से की मुख्य वजह स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और जर्जर स्कूल इमारतों की मरम्मत न होना है। छात्रों का कहना है कि उनके स्कूलों में पढ़ाई के लिए बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं। कई कक्षाओं में डेस्क-कुर्सियों की कमी है, तो वहीं बाथरूम में दरवाजे, टॉयलेट पेपर और साबुन जैसी जरूरी चीजें गायब हैं। छात्रों का आरोप है कि गर्मी बढ़ने के बावजूद स्कूलों में उससे निपटने के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं।
प्रदर्शन के दौरान हिंसक झड़पें और पुलिस कार्रवाई
प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर स्थिति बेहद हिंसक हो गई। कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद, सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और दंगा-रोधी हथियारों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया। हिंसक झड़पों के दौरान एक 15 साल के किशोर का हाथ कटने की घटना सामने आने के बाद छात्रों और अभिभावकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।
विशेष रिपोर्ट:
शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर शुरू हुआ यह छात्र आंदोलन अब मानवाधिकार और पुलिस के अत्यधिक बल प्रयोग के मुद्दों पर भी बहस छेड़ चुका है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने सुरक्षा बलों से संयम बरतने की अपील की है।
इस आंदोलन में शिक्षक यूनियनों और अभिभावकों का भी पूरा समर्थन मिल रहा है। हालात की गंभीरता को देखते हुए फ्रांस सरकार ने पुलिस कार्रवाई के आरोपों की जांच के लिए आंतरिक जांच बिठा दी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार छात्रों की इन जायज मांगों को कब तक पूरा करती है और इतनी बड़ी संख्या में नाबालिगों की गिरफ्तारी को लेकर उठ रहे सवालों का क्या जवाब देती है।
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