लस्ट स्टोरीज 3 में सिद्धार्थ और अदिति की शानदार केमिस्ट्री
ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर हाल ही में रिलीज हुई बहुचर्चित सीरीज 'लस्ट स्टोरीज 3' इन दिनों दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। इस सीरीज को महिलाओं के नजरिए से तैयार किया गया है, जिसमें यह दिखाने की कोशिश की गई है कि उनकी जिंदगी में भावनाओं, आकर्षण और चाहत के क्या मायने होते हैं। हालांकि फिल्म में बोल्ड विषयों को छुआ गया है, लेकिन इसके मेकर्स ने इसे फूहड़ या सस्ता पब्लिसिटी स्टंट बनने से पूरी तरह बचाया है। इस सीरीज की सबसे बड़ी खासियत इसमें नजर आने वाली रियल लाइफ कपल अदिति राव हैदरी और सिद्धार्थ की केमिस्ट्री है, जिसे दर्शक बेहद पसंद कर रहे हैं।
फिल्म में इन कलाकारों के अभिनय और उनके बीच फिल्माए गए दृश्यों ने पर्दे पर एक अलग ही प्रभाव छोड़ा है। दर्शक न केवल कहानी से जुड़ पा रहे हैं, बल्कि कलाकारों के बीच के तालमेल की भी सराहना कर रहे हैं। इन सबके बीच, सीरीज के सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले इंटीमेट सीन्स और सेट पर काम करने के माहौल को लेकर अभिनेता सिद्धार्थ ने खुलकर बात की है। उन्होंने कैमरे के पीछे के उन अनुभवों को साझा किया है जो आम तौर पर दर्शकों को पर्दे के पीछे छिपे होने के कारण कभी नजर नहीं आते हैं।
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इंटीमेट सीन्स की शूटिंग का सच और इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर की भूमिका
बीबीसी को दिए गए एक विस्तृत इंटरव्यू में जब सिद्धार्थ से यह पूछा गया कि फिल्मों या वेब सीरीज में इंटीमेट सीन्स की शूटिंग कैसे की जाती है, तो उन्होंने इसके हर पहलू पर खुलकर रोशनी डाली। सिद्धार्थ ने बताया कि आज के समय में सेट पर इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर्स का होना माहौल को बेहद सुरक्षित और सहज बना देता है। उन्होंने इस प्रक्रिया को एक पूरी तरह से प्रोफेशनल और स्टराइल (कीटाणु-मुक्त) माहौल करार दिया। उनके अनुसार, जब ऐसे दृश्य शूट किए जा रहे होते हैं, तो यह किसी भी अन्य सामान्य दृश्य की तरह ही एक पेशेवर काम होता है, जहां सेट पर अनुशासन सर्वोपरि होता है।
सिद्धार्थ ने यह भी समझाया कि शूटिंग के दौरान सेट पर केवल वही लोग मौजूद रहते हैं जिनका होना वहां बेहद जरूरी होता है। जरूरत न होने पर अन्य क्रू मेंबर्स को बाहर भेज दिया जाता है, जिससे कलाकारों को किसी भी तरह की असहजता का सामना न करना पड़े। हर किसी के व्यवहार को लेकर कड़े नियम तय किए जाते हैं और उनका सख्ती से पालन भी करवाया जाता है। यह तरीका न केवल कलाकारों के बीच की झिझक को दूर करता है, बल्कि उन्हें अपने किरदार में पूरी तरह ढलने की पूरी आजादी भी देता है।
सेट पर सुरक्षा और कड़े सेफ्टी प्रोटोकॉल
सिनेमा जगत में बदल रहे दौर पर बात करते हुए सिद्धार्थ ने साफ किया कि आज के समय में सेट पर सुरक्षा और आपसी सहमति (कनसेंट) का विशेष ध्यान रखा जाता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई कलाकार आपको छू भी रहा है, तो वह पूरी तरह से आपकी मर्जी और सहमति के दायरे में ही होना चाहिए। शूटिंग के दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि वहां कोई ऐसी महिला क्रू मेंबर जरूर मौजूद हो, जिसे कलाकार पहले से अच्छी तरह जानते हों, ताकि उनका भरोसा और आत्मविश्वास बना रहे।
इसके अलावा, दो कलाकारों के बीच शारीरिक दूरी बनाए रखने या असहजता से बचने के लिए गद्दे या तकिए जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। सिद्धार्थ के मुताबिक, यह सब एक स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल का हिस्सा है। उन्होंने हंसते हुए यह भी कहा कि भले ही आप असल जिंदगी में पति-पत्नी (मियां-बीवी) ही क्यों न हों, जब आप कैमरे के सामने होते हैं और किसी सेट पर काम कर रहे होते हैं, तो आपको इस कड़े प्रोटोकॉल का पालन करना ही पड़ता है। पर्सनल लाइफ और प्रोफेशनल लाइफ की ये सीमाएं कलाकारों को एक सुरक्षित दायरा प्रदान करती हैं।
"हम सभी प्रोफेशनल हैं और जो कुछ भी होता है, वह सबके सामने होता है। हमने विशाल भारद्वाज को अपने घर के बेडरूम में कैमरे के साथ आने की इजाजत नहीं दी थी। हम तो बस एक सेट पर किरदार निभा रहे होते हैं, जहां आसपास काफी लोग घूम रहे होते हैं।" — सिद्धार्थ, अभिनेता
प्रोफेशनलिज्म और पर्सनल लाइफ के बीच स्पष्ट लकीर
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अभिनेता सिद्धार्थ ने इस बात पर जोर दिया कि अब इंडस्ट्री में ऐसे पेशेवर लोग (इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर्स) मौजूद हैं जो इन नियमों और प्रोटोकॉल को बहुत ही सही तरीके से लागू करवाते हैं। उन्होंने पुरानी और नई कार्यशैली के बीच के अंतर को समझाते हुए कहा कि आज का सिनेमा बहुत आगे निकल चुका है जहां हर छोटी-सी बात पर बारीकी से ध्यान दिया जाता है। कलाकारों को अपनी गरिमा से समझौता करने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती।
सिद्धार्थ ने स्पष्ट किया कि जब वे और अदिति कैमरे के सामने होते हैं, तो वे पति-पत्नी नहीं बल्कि उस कहानी के दो अलग-अलग किरदार निभा रहे होते हैं। उन्होंने कहा, 'हम तो बस एक सेट पर किरदार निभा रहे होते हैं, जहां आसपास बीसियों लोग घूम रहे होते हैं।' यह इस बात का प्रमाण है कि पर्दे पर दिखाई देने वाली निकटता पूरी तरह से तकनीकी और पेशेवर होती है, जिसका वास्तविक जीवन के निजी पलों से कोई लेना-देना नहीं होता है। कैमरे की नजर और सेट की चकाचौंध के पीछे एक बेहद अनुशासित दुनिया काम करती है।
सबसे कमजोर और सहमे इंसान की सुरक्षा है पहली प्राथमिकता
साक्षात्कार के अंत में सिद्धार्थ ने इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर के काम के सबसे अहम और संवेदनशील पहलू पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एक इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर की सबसे बड़ी और मुख्य जिम्मेदारी यह होती है कि सेट पर जो भी व्यक्ति सबसे ज्यादा असुरक्षित या सहमा हुआ (वल्नरेबल) महसूस कर रहा हो, उसकी पूरी सुरक्षा की जा सके। किसी भी कलाकार को कभी भी ऐसा कुछ करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए, जिसके बारे में उसे पूरी जानकारी न हो या जो उसे असहज करता हो।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि कैमरा क्या रिकॉर्ड कर रहा है और पर्दे पर वह कैसा दिखेगा, यह पूरा भरोसा एक आर्टिस्ट, डायरेक्टर और कैमरामैन के बीच के आपसी रिश्ते और समझ पर निर्भर करता है। जब तक यह त्रिकोणीय विश्वास मजबूत नहीं होता, तब तक इस तरह के संवेदनशील दृश्यों को पूरी सहजता के साथ पर्दे पर उतार पाना संभव नहीं है। सिद्धार्थ के इन खुलासों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सिनेमा के परदे पर जो जादू नजर आता है, उसके पीछे कड़ी मेहनत, अनुशासन और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम छिपे होते हैं।






