दुनिया के अहम समुद्री रास्तों से जहाजों की आवाजाही पर शुल्क लगाने और एकतरफा पाबंदियां थोपने के खिलाफ 60 देश एक साथ आ गए हैं। यूरोपीय संघ (EU) की पहल के बाद इन देशों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) से गुजरने वाले जहाजों पर गैरकानूनी टोल लगाने और उनकी आवाजाही को बाधित करने वाली शर्तों का कड़ा विरोध किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने आई इस महत्वपूर्ण घोषणा को यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के अलावा ऑस्ट्रेलिया, जापान और ब्रिटेन जैसे प्रमुख देशों का भी पूरा समर्थन मिला है।
इन देशों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों से सुरक्षित, निर्बाध और स्वतंत्र आवाजाही बनाए रखने के लिए वैश्विक स्तर पर मिलकर काम किया जाना बेहद जरूरी है। घोषणा में साफ तौर पर यह भी कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से कानूनी रूप से गुजरने वाले जहाजों पर ऐसे किसी भी तरह के शुल्क या कर नहीं लगाए जाने चाहिए, जो उनकी सामान्य आवाजाही में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करें।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर क्यों टिकी हैं दुनिया की निगाहें?
होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक बेहद रणनीतिक और अहम समुद्री मार्ग है। खाड़ी क्षेत्र का अधिकांश तेल और प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से होते हुए दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचता है। वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिहाज से इस मार्ग की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आने वाले क्रूड ऑयल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) पर निर्भर करता है।
हाल के दिनों में ईरान द्वारा होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से नेविगेशन, सुरक्षा और अन्य बंदरगाह सेवाओं के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूलने की योजनाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार जगत में भारी चिंता पैदा कर दी थी। इस तरह के एकतरफा कदमों से वैश्विक व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा और उनकी समय पर डिलीवरी को लेकर अनिश्चितता का माहौल बन गया था।
व्यापार और महंगाई पर पड़ सकता है गहरा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समुद्री रास्तों पर इस तरह की पाबंदियां या अतिरिक्त वित्तीय बोझ लादने का सिलसिला नहीं रुका, तो इसका सीधा असर वैश्विक माल ढुलाई (फ्रेट) और शिपिंग लागत पर पड़ेगा। मालभाड़ा महंगा होने से अंततः दुनिया भर में ईंधन, खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।
यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास द्वारा घोषित इस साझा रुख का मुख्य उद्देश्य समुद्री रास्तों को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत खुला रखना और किसी भी राष्ट्र की एकतरफा कार्रवाई से वैश्विक व्यापार को सुरक्षित करना है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इन 60 देशों का यह कड़ा कूटनीतिक संदेश ज़मीनी स्तर पर क्या असर दिखाता है और समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
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