नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय राजनीति और टेलीविजन जगत से एक साथ दो बड़ी और चौंकाने वाली खबरें सामने आ रही हैं। हाल ही में भाजपा की तरफ से राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की नई सूची जारी की गई है। इस सूची में पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का नाम शामिल नहीं है। इसके अलावा हरदीप पुरी और बीएल वर्मा जैसे बड़े नेताओं को भी इस बार टिकट नहीं मिला है। इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है और पार्टी ने कई नए और युवा चेहरों पर भरोसा जताया है।
राजनीतिक मोर्चे पर चल रही इन हलचलों के बीच उनके लोकप्रिय टेलीविजन शो को लेकर भी बुरी खबरें आ रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कल्ट शो 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' का दूसरा सीजन यानी KSBKBT 2 अपनी शुरुआत के महज एक साल के भीतर ही बंद होने की कगार पर पहुंच गया है। दर्शकों के बीच कभी भारी क्रेज पैदा करने वाला यह शो अपनी पकड़ बनाए रखने में कामयाब नहीं हो पाया। अब मेकर्स इस शो को बंद करने की तैयारी कर रहे हैं और इसकी जगह एक नए शो 'अप्सरा' को लाने की चर्चा तेज हो गई है।
राज्यसभा चुनाव में बदलाव और नए चेहरों पर दांव
भारतीय जनता पार्टी ने आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए अपनी रणनीति में साफ बदलाव किया है। पार्टी ने इस बार कई पुराने और अनुभवी मंत्रियों को टिकट देने से परहेज किया है। सूची सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि पार्टी संगठन अब पूरी तरह से नए चेहरों और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाना चाहती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला साल के अंत में होने वाले चुनावों और पार्टी के आंतरिक फेरबदल का हिस्सा हो सकता है। स्मृति ईरानी की तरफ से अभी तक इस फैसले पर कोई तीखी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन उनके समर्थकों के बीच मायूसी जरूर देखी जा रही है।
दूसरी तरफ, जब से राज्यसभा की नई लिस्ट आई है, सोशल मीडिया पर भी लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। विरोधी दल भी इस फैसले को लेकर तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पार्टी के भीतर सांगठनिक बदलाव एक सामान्य प्रक्रिया है। हरदीप पुरी और वरुण गांधी जैसे नेताओं को भी इस बार मौका नहीं मिला है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि पार्टी हाईकमान आने वाले दिनों में संगठन और सरकार दोनों मोर्चों पर बड़ा बदलाव लाने के मूड में है।
टेलीविजन इंडस्ट्री में शो के बंद होने की सुगबुगाहट
राजनीति के साथ-साथ मनोरंजन जगत में भी स्मृति ईरानी के नाम की चर्चा जोरों पर है। एकता कपूर का बहुचर्चित शो 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' जब दोबारा नए रूप में आया था, तो लोगों को बहुत उम्मीदें थीं। लेकिन दर्शकों का पुराना प्यार इस नए सीजन को नहीं मिल पाया। टीआरपी की रेस में पिछड़ने के कारण मेकर्स को यह कड़ा फैसला लेना पड़ रहा है। एकता कपूर के सोशल मीडिया पोस्ट और अंदरूनी सूत्रों की मानें तो शो का सफर अब बहुत लंबा नहीं चलने वाला है।
आम दर्शकों के बीच भी इस बात की चर्चा है कि पुराने दौर के जादू को दोबारा स्क्रीन पर दोहराना आसान नहीं होता है। शो के बंद होने की खबर आने के बाद फैंस सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी और निराशा जाहिर कर रहे हैं। आने वाले कुछ हफ्तों में यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि शो की आखिरी ऑन-एयर तारीख क्या होगी और उसकी जगह आने वाला नया प्रोजेक्ट दर्शकों की उम्मीदों पर कितना खरा उतर पाता है।
राजनीति और मनोरंजन दोनों मोर्चों पर नया दौर
द फ्रीलान्स की टीम द्वारा जुटाई गई जानकारी के मुताबिक, स्मृति ईरानी के लिए यह समय व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तरों पर एक बड़े बदलाव का दौर है। एक तरफ जहां उन्हें चुनावी राजनीति में नई भूमिका का इंतजार करना होगा, वहीं उनके पुराने टीवी करियर की याद दिलाने वाला प्रोजेक्ट भी अब थमने की कगार पर है। राजनीति में नए चेहरों को जगह मिलना और टीवी पर पुराने दौर के सीरियलों का इस तरह दम तोड़ना, दोनों ही बातें आज के मीडिया बाजार की हकीकत को बयां करती हैं।
आगामी दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इन नए चेहरों के साथ चुनावी मैदान में कितना असर छोड़ पाती है। वहीं, टेलीविजन इंडस्ट्री भी इस बात पर मंथन कर रही है कि आखिर क्यों दर्शकों की पसंद तेजी से बदल रही है और पुराने हिट फॉर्मूले अब क्यों फेल हो रहे हैं। द फ्रीलान्स इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए रखेगा और आगे भी सटीक अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा।






