संवैधानिक संस्थाओं पर हमलों को लेकर बीजेपी का आक्रामक रुख
भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ आक्रामक तेवर अपनाते हुए तीखा हमला बोला है। भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की हालिया बैठकों और वहां लिए गए प्रस्तावों को लोकतंत्र और संविधान पर सीधा आघात करार दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि देश की जनता द्वारा बार-बार नकारे जाने के बाद अब मुख्य विपक्षी दल अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देख बौखला गया है। अपनी कमियों और असफलताओं की समीक्षा करने के बजाय कांग्रेस के नेता लगातार भारत के संवैधानिक संस्थानों की निष्पक्षता पर बेबुनियाद सवाल उठा रहे हैं।
हाल ही में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में 2024 के लोकसभा चुनावों की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने विशेष रूप से वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लिया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संस्थाएं देश के लोकतांत्रिक ढांचे की रीढ़ हैं। इन संस्थाओं पर इस तरह के अनर्गल आरोप लगाना सीधे तौर पर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की सोची-समझी साजिश है, जिसे देश की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।
स्मृति ईरानी ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि साल 2019 में भी कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को धूमिल करने की बात कही थी, लेकिन देश की महान जनता ने हर बार ऐसे बयानों को मतपेटी के जरिए करारा जवाब दिया है। आज जब लोकतांत्रिक मूल्यों के तहत जनता कांग्रेस को नकार चुकी है, तो पार्टी नेतृत्व अपनी गलतियों से सीखने के बजाय चुनाव आयोग के सिर ठीकरा फोड़ रहा है। यह प्रवृत्ति न केवल राजनीतिक अपरिपक्वता को दर्शाती है, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं का भी खुला उल्लंघन है।
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वोटर लिस्ट में मृत और डुप्लीकेट नामों को लेकर तीखे सवाल
मतदाता सूची के पुनरीक्षण और 13 करोड़ 30 लाख नामों के संशोधन के मुद्दे पर भाजपा ने कांग्रेस से तीखे सवाल पूछे हैं। स्मृति ईरानी ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि क्या कांग्रेस पार्टी यह चाहती है कि मतदाता सूचियों में मृत लोगों के नाम और एक ही व्यक्ति के नाम बार-बार दर्ज रहें? उन्होंने सवाल किया कि यदि इलेक्टोरल रोल में किसी प्रकार की गड़बड़ी या डुप्लीकेट नाम मौजूद हैं, तो कांग्रेस पार्टी उन त्रुटियों को दुरुस्त करने का विरोध क्यों कर रही है। क्या विपक्षी दल अनुचित लाभ उठाने के लिए ऐसी सूचियों को बनाए रखना चाहता है?
चुनाव आयोग की प्रक्रिया का बचाव करते हुए भाजपा ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग ने सार्वजनिक रूप से पूरी पारदर्शिता बरती है। बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) घर-घर जाकर नोटिस मिलने वाले मामलों के दस्तावेजों की खुद पुष्टि कर रहे हैं। इसके बावजूद कांग्रेस पार्टी का इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताना यह साबित करता है कि वे पारदर्शी चुनावी प्रणाली से डरते हैं। यदि मतदाता सूची पूरी तरह शुद्ध और पारदर्शी होगी, तो सबसे बड़ा नुकसान उन राजनीतिक दलों को होगा जो व्यवस्था की कमियों का फायदा उठाने की फिराक में रहते हैं।
बीजेपी ने कांग्रेस शासित और गैर-भाजपा शासित राज्यों का उदाहरण देते हुए भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में कांग्रेस या उसके सहयोगियों की सरकारें हैं, क्या वहां की मतदाता सूचियों और चुनाव आयोग के फैसलों को वे सही मानते हैं? यदि केरल, कर्नाटक, पंजाब या हिमाचल प्रदेश में चुनाव प्रक्रिया वैध है, तो बाकी जगहों पर वही व्यवस्था संदेहास्पद कैसे हो सकती है? कांग्रेस की यह दोहरी नीति और सुविधा की राजनीति अब देश के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है।
इतिहास के पन्नों और कांग्रेस के गठन पर तीखा प्रहार
प्रेस वार्ता के दौरान स्मृति ईरानी ने कांग्रेस पार्टी के ऐतिहासिक संदर्भों पर भी जोरदार पलटवार किया। कांग्रेस नेताओं द्वारा लाहौर अधिवेशन और पार्टी के इतिहास का बार-बार उल्लेख किए जाने पर कड़ा ऐतराज जताते हुए उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस इतिहास के पन्ने पलटना ही चाहती है, तो उसे अपनी स्थापना के शुरुआती दौर के सच से भी पर्दा उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस संगठन का गठन ब्रिटिश साम्राज्य के संरक्षण और राजनीतिक हितों को साधने के लिए किया गया था, वह आज संवैधानिक संस्थाओं को सीख दे रहा है।
"देश का लोकतंत्र और संविधान किसी एक दल की बपौती नहीं है। जो लोग अपनी राजनीतिक हार को पचा नहीं पा रहे हैं, वे आज संवैधानिक संस्थाओं पर कीचड़ उछालकर अपनी नाकामियों को छुपाने की असफल कोशिश कर रहे हैं। चुनाव आयोग भारत की लोकतांत्रिक मजबूती का प्रतीक है और इसका अपमान देश की जनता कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।" — स्मृति ईरानी, राष्ट्रीय महासचिव, बीजेपी
भाजपा का कहना है कि स्वतंत्रता के बाद से लेकर अब तक कांग्रेस ने हमेशा अपने राजनीतिक स्वार्थों को सर्वोपरि रखा है। जब भी चुनाव आयोग या अन्य संवैधानिक संस्थाओं ने निष्पक्षता से अपने कर्तव्यों का पालन किया है और उनके अनुकूल फैसले नहीं आए हैं, तब-तब कांग्रेस ने उन पर दबाव बनाने की कोशिश की है। आपातकाल के काले दिनों से लेकर आज की तारीख तक का इतिहास गवाह है कि सत्ता हासिल करने या बचाने के लिए किस तरह लोकतांत्रिक संस्थाओं का दोहन किया गया था।
पार्टी नेताओं का मानना है कि देश की जनता अब पूरी तरह जागरूक हो चुकी है और वह झूठे प्रोपेगैंडा तथा आधारहीन आरोपों में फंसने वाली नहीं है। राहुल गांधी और कांग्रेस कार्यसमिति के नेताओं द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ जो माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है, वह असल में जनता के जनादेश का अनादर है। भाजपा ने स्पष्ट किया कि देश के लोग विकास और सुशासन के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं, और इस तरह के नकारात्मक राजनीतिक हथकंडे अब कामयाब नहीं होने वाले हैं।
निष्कर्ष और आगे की राजनीतिक हलचल
इस पूरे घटनाक्रम ने देश की सियासत में एक नया उबाल ला दिया है। एक तरफ जहां राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर श्वेत पत्र जारी करने और बड़े बदलावों की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने इसे विपक्ष की हताशा करार देते हुए आक्रामक मोर्चा संभाल लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे पर घमासान और तेज होने की पूरी संभावना है।
लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व यानी चुनाव की निष्पक्षता और पवित्रता को बनाए रखना हर राजनीतिक दल और संवैधानिक संस्था की साझा जिम्मेदारी है। हालांकि, जिस प्रकार से सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है, उससे साफ है कि चुनावी सुधारों और संस्थागत स्वायत्तता की बहस आने वाले समय में भारतीय राजनीति का केंद्र बनी रहेगी। जनता इन तमाम गतिविधियों पर पैनी नजर बनाए हुए है और आगामी चुनावों में इसका असर देखने को मिल सकता है।



