तमिलनाडु उपचुनाव की जंग में आमने-सामने आए एमके स्टालिन और थलपति विजय
दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु में राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ चुकी है। आगामी छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इस चुनावी माहौल के बीच द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम यानी डीएमके नेता एमके स्टालिन ने तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख और लोकप्रिय अभिनेता से राजनेता बने थलपति विजय पर तीखा हमला बोला है। स्टालिन के इस सीधे और कड़े सवाल ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, राज्य के क्षेत्रीय दलों के बीच जुबानी जंग और अधिक तीखी होती जा रही है। स्टालिन ने अपनी हालिया चुनावी रैली के दौरान विजय की चुप्पी को एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। इस टकराव से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार का यह दौर और अधिक दिलचस्प और आक्रामक होने वाला है।
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मुख्य चुनाव आयुक्त के विवाद पर थलपति विजय की चुप्पी पर उठे सवाल
धर्मपुरम विधानसभा उपचुनाव के सिलसिले में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए एमके स्टालिन ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) से जुड़े विवाद का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों में इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा हो रही है और विपक्षी नेता लगातार आवाज उठा रहे हैं, लेकिन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और टीवीके प्रमुख इस मामले पर पूरी तरह मौन साधे हुए हैं। स्टालिन ने सवाल किया कि इस चुप्पी के पीछे आखिर क्या वजह है।
उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए सीधे शब्दों में कहा कि क्या थलपति विजय की पार्टी और उनके नेता भाजपा के सामने किसी दबाव या डर के कारण कुछ नहीं बोल पा रहे हैं। स्टालिन का यह बयान राष्ट्रीय राजनीति के उन मुद्दों को दक्षिण के चुनावी मैदान में खींचने का प्रयास माना जा रहा है, जिन पर देश भर में बहस छिड़ी हुई है।
"आपको किस बात का डर है सीएम साहब? किस बात का डर है? अगर आप उस मुद्दे पर भी कुछ नहीं बोल सकते जिस पर देश भर के नेता बोल रहे हैं, तो इसके पीछे क्या वजह है? क्या आप बीजेपी से इतना डरते हैं?" — एमके स्टालिन, डीएमके नेता
विधानसभा की गरिमा और राजनीतिक आचरण पर गरमाई बहस
चुनावी रैलियों और भाषणों के दौरान केवल नीतिगत मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत आचरण और राजनीतिक गरिमा को लेकर भी तीखी बयानबाजी देखने को मिली। एमके स्टालिन ने तल्ख लहजे में कहा कि मुख्यमंत्री पद पर आसीन व्यक्ति को अपनी भाषा और व्यवहार में शालीनता रखनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि हालिया विधानसभा सत्रों में कुछ ऐसी बातें हुईं जिन्होंने सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाई है।
स्टालिन ने थलपति विजय को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें एक जिम्मेदार नेता की तरह बर्ताव करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता उम्मीद करती है कि राज्य का नेतृत्व करने वाला शख्स अपनी मर्यादा बनाए रखे। राजनीतिक मंचों से इस तरह की तीखी टिप्पणियां इस बात का संकेत हैं कि यह उपचुनाव केवल एक सीट के लिए नहीं, बल्कि आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक जमीन पर वर्चस्व स्थापित करने की बड़ी लड़ाई है।
दोनों दिग्गजों के रोडशो में उमड़ी भारी भीड़
चुनावी प्रचार के आखिरी दौर में तमिलनाडु की सड़कों पर अद्भुत नजारा देखने को मिला। थलपति विजय और एमके स्टालिन दोनों ने अपने-अपने समर्थकों के साथ बड़े पैमाने पर रोडशो निकाले। विजय का रोडशो ममंदूर से शुरू होकर विभिन्न कस्बों से गुजरते हुए अचिरुपक्कम में समाप्त हुआ। नेशनल हाईवे पर एक्टर-नेता की एक झलक पाने के लिए प्रशंसकों और आम लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई थी, जिससे यातायात भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ।
दूसरी ओर, एमके स्टालिन का रोडशो भी अमरावती स्टैच्यू से शुरू होकर धर्मपुरम पुलिस स्टेशन के नजदीक जाकर संपन्न हुआ। दोनों नेताओं के इन शक्ति प्रदर्शनों ने यह साबित कर दिया कि आगामी उपचुनाव में मुकाबला बेहद कड़ा और दिलचस्प होने वाला है। जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है, यह तो छह अक्टूबर को मतदान के बाद ही साफ हो पाएगा, लेकिन सियासी तापमान अभी से चरम पर है।
निष्कर्ष और आगे की राजनीतिक दिशा
तमिलनाडु का यह उपचुनाव राज्य की बदलती हुई राजनीतिक समीकरणों की एक बानगी पेश कर रहा है। पारंपरिक पार्टियों के साथ-साथ नए राजनीतिक दलों के उभार ने मुकाबले को त्रिकोणीय या बहुकोणीय बना दिया है। थलपति विजय की पार्टी के लिए यह चुनाव अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की एक बड़ी परीक्षा है, वहीं डीएमके अपनी पुरानी पकड़ को बनाए रखने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता इन तीखे सियासी सवालों और दावों पर क्या प्रतिक्रिया देती है।








