उत्तर प्रदेश में बदला रोजगार और निवेश का पूरा परिदृश्य
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान राज्य के आर्थिक बदलाव और युवाओं के भविष्य को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्ष 2017 से पहले राज्य की व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरी हुई थी। उस दौर में न तो युवाओं के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर थे और न ही शिक्षा का स्तर बेहतर था। भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के कारण सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता नाम की कोई चीज नहीं बची थी, जिससे मेधावी छात्र और युवा ठगा सा महसूस करते थे।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि आज उत्तर प्रदेश अपनी विशाल युवा आबादी को 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' यानी जनसांख्यिकी लाभांश के रूप में तब्दील कर रहा है। राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कौशल विकास योजनाओं को जमीन पर उतारने का जो बीड़ा उठाया है, उसके दूरगामी परिणाम सामने आ रहे हैं। आज का युवा पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी रूप से भी सक्षम हो रहा है, जिससे उन्हें स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में भी रोजगार के बेहतरीन अवसर मिल रहे हैं।
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कानून-व्यवस्था में सुधार से निवेशकों का बढ़ा अटूट विश्वास
किसी भी राज्य के विकास के लिए निवेशकों का भरोसा जीतना सबसे बड़ी चुनौती होती है। मुख्यमंत्री योगी ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी सरकार ने सत्ता में आते ही सबसे पहले राज्य की कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने का काम किया। जब प्रदेश में गुंडागर्दी और माफियाराज पर लगाम लगी, तो देश-विदेश के बड़े उद्योगपतियों ने उत्तर प्रदेश में निवेश करने के लिए अपनी रुचि दिखाई। मजबूत सुरक्षा और बेहतर प्रशासनिक ढांचे के कारण आज ग्लोबल इन्वेस्टर्स का रुख तेजी से यूपी की ओर हुआ है।
विशेषज्ञों का भी यह मानना है कि एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) क्षेत्र उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। पिछली सरकारों की उदासीनता के कारण पारंपरिक हस्तशिल्प और छोटे उद्योग दम तोड़ रहे थे, लेकिन वर्तमान सरकार की नीतियों ने इन उद्योगों को नई जिंदगी दी है। एक जिला एक उत्पाद (ODOP) जैसी योजनाओं ने न सिर्फ स्थानीय कारीगरों को सशक्त किया है, बल्कि राज्य से होने वाले निर्यात में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
गांधी जयंती के बहाने पिछली सरकारों की कार्यशैली पर साधा निशाना
गांधी जयंती और अन्य विशेष अवसरों पर अपनी सरकार की उपलब्धियों को साझा करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले गांवों के नाम पर केवल राजनीति की जाती थी और उन्हें विकास के नाम पर केवल झूठे वादे और आश्वासन मिलते थे। आय और जाति प्रमाण पत्र जैसे छोटे कामों के लिए भी ग्रामीण इलाकों के लोगों को तहसील और जिला मुख्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे, जिससे जनता का शोषण होता था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार गांवों को विकास की अंतिम सीढ़ी नहीं मानती, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश और नए भारत की पहली इकाई मानकर कार्य कर रही है। पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल गवर्नेंस और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था के कारण ग्रामीण नागरिकों को घर बैठे सरकारी सेवाओं का लाभ मिल रहा है। दलालों और बिचौलियों का तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है, जिससे आम जनता के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आया है।
"वर्ष 2017 से पहले गांवों को विकास नहीं, सिर्फ वादे मिले. गांवों के नाम पर राजनीति होती रही, लेकिन व्यवस्था में न पारदर्शिता थी, न जवाबदेही. हमारी सरकार ने इस सोच को पूरी तरह बदलकर रख दिया है और आज हर गांव आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रहा है।" — योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण से संवर रहा युवाओं का भविष्य
युवाओं को रोजगार के योग्य बनाने के लिए राज्यभर में विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों का जाल बिछाया गया है। दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना और अन्य व्यावसायिक कार्यक्रमों के माध्यम से लाखों युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि प्रदेश का कोई भी युवा बेरोजगारी का सामना न करे, बल्कि वह खुद रोजगार सृजित करने वाला बने। इस दिशा में स्टार्टअप नीति और मुद्रा लोन जैसी योजनाओं ने भी अहम भूमिका निभाई है।
आने वाले समय में उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा औद्योगिक और आर्थिक हब बनने की ओर अग्रसर है। युवाओं के कौशल और सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति के मेल ने राज्य की उस नकारात्मक छवि को पूरी तरह धो दिया है, जो कभी इसे बीमारू राज्यों की श्रेणी में खड़ा करती थी। जनता अब बदलाव को महसूस कर रही है और विकास की यह गति आने वाले दिनों में और अधिक तेज होने की उम्मीद है।








