नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — प्रशांत महासागर में इन दिनों एक खतरनाक प्राकृतिक हलचल तेज हो गई है। मौसम वैज्ञानिकों ने सुपर अल नीनो के बहुत ज्यादा ताकतवर होने की पुष्टि की है। इस मौसमी बदलाव ने चीन से लेकर भारत तक के नीति निर्माताओं की नींद उड़ा दी है। पहले ही मानसूनी बारिश में कमी देख चुके देशों के लिए यह एक और बड़ी चेतावनी है। हालात इतने गंभीर हैं कि दुनिया भर के विशेषज्ञ आने वाले दिनों में भारी संकट की आशंका जता रहे हैं।
वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक इस सुपर-डुपर अल नीनो का असर बहुत भयानक होगा। आने वाले महीनों में भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में रिकॉर्ड तोड़ जानलेवा गर्मी पड़ सकती है। स्थिति इतनी बिगड़ सकती है कि गर्मी के प्रकोप से जुड़ी अलग-अलग वजहों से करीब साढ़े चार लाख लोगों की जान जाने का खतरा पैदा हो गया है। इस चेतावनी के सामने आने के बाद आम लोगों के बीच चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
प्रशांत महासागर में क्यों बढ़ रही है सुपर अल नीनो की ताकत
अल नीनो मूल रूप से समुद्र के गर्म होने की एक प्रक्रिया है जो दुनिया भर के मौसम चक्र को बदल देती है। इस बार यह चक्र अपनी सामान्य ताकत से कहीं ज्यादा आक्रामक रूप ले चुका है। समुद्री सतह का तापमान लगातार बढ़ रहा है जिसके कारण मौसम का पूरा संतुलन बिगड़ गया है। मौसम विभाग के जानकारों का मानना है कि इस बार सर्दियों का मौसम भी सामान्य नहीं रहेगा। बारिश के मौसम में मार झेलने के बाद अब लोगों को कड़ाके की ठंड या असामान्य मौसम का सामना करना पड़ सकता है।
चीन जैसे बड़े देशों में इस मौसमी बदलाव को लेकर उच्च स्तर पर चिंता जताई जा रही है। भारत में भी कृषि और मौसम पर नजर रखने वाली संस्थाएं पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। अगर गर्मी का यह अनुमान सच साबित होता है तो फसलों की पैदावार से लेकर आम आदमी की सेहत पर सीधा असर पड़ेगा। पानी की कमी और बिजली की भारी मांग जैसी समस्याएं एक बार फिर विकराल रूप ले सकती हैं। प्रशासन और सरकारों के सामने इस आपदा से निपटने की बहुत बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
आने वाले महीनों में कैसी होगी भारत की सर्दियां और गर्मी
विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो का असर केवल एक मौसम तक सीमित नहीं रहता है। गर्मियों में रिकॉर्ड तोड़ तापमान दिखाने के बाद अब सर्दियों के मिजाज पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है। भारत के कई हिस्सों में इस बार सर्दी का पैटर्न बदला हुआ नजर आ सकता है। जिन इलाकों में अच्छी बारिश की उम्मीद थी वहां सूखा या कम पानी की समस्या पहले ही सामने आ चुकी है। अब सर्दियों के मौसम में भी तापमान सामान्य से ऊपर रहने की पूरी आशंका जताई जा रही है।
मैदानी इलाकों से लेकर पहाड़ों तक मौसम का यह उतार-चढ़ाव आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। किसानों के लिए यह समय बेहद तनावपूर्ण बनता जा रहा है क्योंकि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि अगली फसल की बुवाई कैसे करें। वैश्विक स्तर पर हो रहे इन बदलावों से निपटने के लिए अब दीर्घकालिक रणनीतियों पर काम करने की जरूरत है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी आने वाले खतरों से निपटने के लिए लगातार नई कार्ययोजना तैयार कर रही हैं।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल और एहतियाती कदम
हमारी जमीनी पड़ताल बताती है कि आम जनता अभी इस बड़े खतरे के प्रति उतनी जागरूक नहीं है जितनी होनी चाहिए। देश के कई राज्यों में स्थानीय प्रशासन ने गर्मी और सूखे से निपटने के लिए शुरुआती तैयारियां शुरू कर दी हैं। हालांकि स्वास्थ्य सेवाओं को इस संभावित आपदा से निपटने के लिए और अधिक मजबूत करने की सख्त जरूरत है। खासकर बुजुर्गों और खुले में काम करने वाले मजदूरों के लिए विशेष इंतजाम करने होंगे ताकि जानमाल के नुकसान को कम किया जा सके।
आने वाले छह महीने दुनिया भर के मौसम और इंसानी जीवन के लिए बहुत कठिन रहने वाले हैं। वैज्ञानिक लगातार सरकारों को आगाह कर रहे हैं कि समय रहते पानी और बिजली का उचित प्रबंधन किया जाए। अगर हमने समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए तो यह सुपर अल नीनो इंसानियत के लिए बहुत भारी पड़ सकता है। 'द फ्रीलान्स' इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और हर ताजा अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा।





