टीसीएस यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण प्रकरण में नया मोड़
देश की प्रमुख आईटी कंपनियों में शुमार टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की नासिक इकाई में पिछले दिनों सामने आए गंभीर यौन उत्पीड़न और मतांतरण के मामले ने देश भर में सनसनी फैला दी थी। इस हाई-प्रोफाइल मामले की मुख्य आरोपी निदा खान की मुश्किलें अब पेशेवर और कानूनी मोर्चे के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत जीवन में भी लगातार बढ़ती जा रही हैं। कंपनी के भीतर के इस काले कारनामे ने कॉर्पोरेट जगत के साथ-साथ आम जनमानस को भी झकझोर कर रख दिया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमे ने तुरंत हरकत में आते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। एसआईटी लगातार इस मामले की परतें उधेड़ने में जुटी हुई है और अब तक कई अहम खुलासे सामने आ चुके हैं। जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बीच अब इस मामले से जुड़ा एक और सनसनीखेज पहलू सामने आया है, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
आरोपी निदा खान के पति ने अब इस पूरे विवाद के बीच अपनी पत्नी से कानूनी रूप से अलग होने का मन बना लिया है। उन्होंने अपनी वैवाहिक जिंदगी को खत्म करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है और तलाक की औपचारिक याचिका दायर कर दी है। इस कानूनी कदम के बाद आरोपी महिला की परेशानियां कई गुना बढ़ गई हैं, क्योंकि एक तरफ जहां वह आपराधिक मामलों और एसआईटी की जांच का सामना कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उनका बसा-बसाया घर भी उजड़ने के कगार पर पहुंच गया है।
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पारिवारिक अदालत ने जारी किया समन, 16 अक्टूबर को पेशी का आदेश
विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, नासिक की एक स्थानीय पारिवारिक अदालत में यह तलाक याचिका दाखिल की गई है। याचिका में पति की ओर से विवाह को पूरी तरह से समाप्त करने और आपसी रिश्तों को कानूनी रूप से तोड़ने का अनुरोध किया गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पारिवारिक अदालत ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पिछले दिनों यानी 22 अगस्त को ही औपचारिक समन जारी कर दिया था।
अदालत की ओर से जारी किए गए इस आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आरोपी निदा खान स्वयं या फिर उनके अधिकृत अधिवक्ता (वकील) आगामी 16 अक्टूबर को अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों। इस पेशी के दौरान अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी और मामले की अगली कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी। इस समन के मिलने के बाद कानूनी गलियारों में हलचल एक बार फिर तेज हो गई है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि इस तरह के गंभीर आरोपों और आपराधिक मुकदमों का असर पारिवारिक संबंधों पर पड़ना स्वाभाविक होता है। इस मामले में भी पति द्वारा उठाया गया यह कदम इसी का परिणाम माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि 16 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई के दौरान अदालत में क्या कुछ नया मोड़ आता है और आरोपी पक्ष की ओर से क्या सफाई पेश की जाती है।
जमानत पर बाहर हैं निदा खान, एसआईटी कस रही है शिकंजा
ज्ञात हो कि टीसीएस इकाई में हुए इस बहुचर्चित यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण कांड के खुलासे के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी निदा खान को गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि, कानूनी प्रक्रियाओं के तहत बाद में उन्हें अदालत से जमानत मिल गई थी, जिसके चलते वह फिलहाल जेल से बाहर हैं। लेकिन जमानत मिलने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि उनकी कानूनी मुश्किलें कम हो गई हैं, क्योंकि पुलिस और जांच एजेंसियों की पकड़ उन पर लगातार बनी हुई है।
इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहराई से तह तक जाने के लिए गठित किया गया विशेष जांच दल (एसआईटी) बेहद आक्रामक तरीके से अपनी जांच को आगे बढ़ा रहा है। एसआईटी की कार्यप्रणाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टीम ने अब तक इस मामले में दो बेहद मजबूत और विस्तृत आरोपपत्र (चार्जशीट) सक्षम न्यायालय के समक्ष दाखिल कर दिए हैं। इन चार्जशीट में कई चौंकाने वाले सबूत और गवाहों के बयान दर्ज हैं।
"टीसीएस नासिक इकाई से जुड़े इस प्रकरण में पुलिस और एसआईटी पूरी मुस्तैदी से साक्ष्य जुटाने में लगी है। कानून अपना काम कर रहा है और सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके।" — वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, नासिक
कॉर्पोरेट संस्कृति पर उठे सवाल और आगे की कानूनी राह
देश की दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनियों में शुमार टीसीएस जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के भीतर इस तरह की गंभीर आपराधिक गतिविधियों का सामने आना पूरे कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए एक बड़ी चेतावनी है। काम करने वाली जगहों पर महिलाओं की सुरक्षा और उनके कार्यस्थल के माहौल को लेकर अब देश भर में गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। लोग यह सोचने पर मजबूर हैं कि क्या बड़ी कंपनियों के भीतर भी कर्मचारी सुरक्षित नहीं हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामले न केवल संस्था की छवि को धूमिल करते हैं, बल्कि समाज में भी एक बेहद नकारात्मक संदेश भेजते हैं। इस मामले में जिस तरह से धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न जैसे संगीन आरोप एक साथ जुड़े हैं, उसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता को और अधिक बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई और एसआईटी की जांच से कई और बड़े चेहरे या राज बेनकाब हो सकते हैं।
फिलहाल पूरा मामला अदालत के विचाराधीन है और एक तरफ जहां आपराधिक मामलों की सुनवाई तेजी से चल रही है, वहीं दूसरी तरफ पारिवारिक न्यायालय में तलाक की अर्जी पर भी सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। अक्टूबर के मध्य में होने वाली सुनवाई तय करेगी कि नासिक के इस बहुचर्चित मामले में आगे क्या नया कानूनी मोड़ आता है।








