इंदौर में फिर दहला रघुवंशी परिवार: राजा के बाद अब जिगरी दोस्त अर्पित की संदिग्ध मौत
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से एक बेहद दर्दनाक और सनसनीखेज घटना सामने आई है, जिसने एक बार फिर पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। कुछ महीने पहले चर्चित ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या के सदमे से उनका परिवार पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था कि अब राजा के सबसे करीबी और जिगरी दोस्त अर्पित चौहान की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अर्पित ने अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र स्थित अपने साले के मकान में गले में फंदा लगाकर अपनी जान दे दी। इस घटना के बाद से मृतक के परिवार और रघुवंशी परिवार में कोहराम मचा हुआ है और हर कोई हैरान है कि आखिर हंसते-खेलते युवा ने इतना खौफनाक कदम क्यों उठाया।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवाया। पुलिस ने मर्ग कायम कर इस पूरे मामले की विभिन्न पहलुओं से गहराई से जांच शुरू कर दी है। अर्पित की अचानक हुई इस मौत ने कई अनसुलझे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब तलाशने में पुलिस जुटी हुई है। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे समझ नहीं पा रहे हैं कि जिस शख्स ने हर मुश्किल वक्त में उनका साथ निभाया, वह इस तरह अचानक जिंदगी की जंग कैसे हार गया।
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राजा की हत्या के बाद परिवार और कारोबार का बना था संबल
मृतक अर्पित चौहान और राजा रघुवंशी की दोस्ती कोई आम नहीं थी, बल्कि दोनों पिछले 8 से 10 वर्षों से एक-दूसरे के बेहद करीब थे। राजा की असमय और दर्दनाक मौत के बाद जब पूरा रघुवंशी परिवार गहरे मानसिक आघात में डूबा हुआ था, तब अर्पित ने आगे आकर परिवार का संबल बढ़ाया था। राजा के भाई विपिन रघुवंशी के अनुसार, अर्पित ने न केवल अपनी दोस्ती का फर्ज निभाया, बल्कि राजा के हिस्से का पूरा ट्रांसपोर्ट कारोबार भी अपने कंधों पर संभाल लिया था। वह परिवार के एक सदस्य की तरह हर सुख-दुख में साए की तरह साथ खड़ा रहता था।
परिजनों का कहना है कि अर्पित और राजा के बीच भाई जैसा रिश्ता था। राजा की शादी की तैयारियों से लेकर अन्य सामाजिक आयोजनों तक में अर्पित बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था। राजा के जाने के बाद अर्पित ही वह शख्स था जिसने ट्रांसपोर्ट फर्म के सुचारू संचालन के साथ-साथ परिवार को हिम्मत बंधाई थी। यहां तक कि कर्मचारियों के वेतन और अन्य व्यावसायिक लेन-देन की जिम्मेदारी भी पूरी ईमानदारी से अर्पित ही देख रहा था। ऐसे में उसका इस तरह दुनिया से चले जाना पूरे व्यापारिक जगत और मित्रों के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है।
सुसाइड से पहले सोशल मीडिया पर लिखा था एक रहस्यमयी स्टेटस
इस पूरी घटना में एक और पहलू जो सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है, वह है अर्पित द्वारा मौत से ठीक पहले लगाया गया व्हाट्सएप स्टेटस। पुलिस और दोस्तों से मिली जानकारी के मुताबिक, अर्पित ने शुक्रवार सुबह मंदिर से लौटने के बाद अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक स्टेटस अपडेट किया था। इस स्टेटस में लिखा था— 'नियंत्रण बहुत जरूरी है, अगर आमदनी कम हो तो खर्चों पर और आमदनी ज्यादा हो तो शब्दों पर।' इस संदेश को पोस्ट करने के बमुश्किल एक घंटे के भीतर ही उसने यह आत्मघाती कदम उठा लिया।
पुलिस अब इस स्टेटस को आधार बनाकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या अर्पित किसी गहरे मानसिक तनाव, दबाव या किसी विशेष परिस्थिति से गुजर रहा था। हालांकि, मौके से किसी प्रकार का कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, जिससे स्थिति को स्पष्ट तौर पर समझा जा सके। अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स, चैट्स और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है ताकि इस बात का पर्दाफाश हो सके कि किन कारणों के चलते उसने यह खौफनाक फैसला लिया।
परिवार और दोस्तों का छलका दर्द, निष्पक्ष जांच की गुहार
राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी ने मीडिया से बात करते हुए अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और नम आंखों से पुराने दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि अर्पित को वे लोग सगे छोटे भाई की तरह मानते थे। राजा की शादी की शॉपिंग से लेकर घर में हाल ही में हुए एक नन्हे मेहमान के जन्म तक के जश्न में अर्पित ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। परिवार का मानना है कि अर्पित अंदर ही अंदर राजा की हत्या के गम से उबर नहीं पा रहा था और लगातार न्याय की मांग में जुटा हुआ था।
"अर्पित हमारे परिवार के स्तंभ की तरह था। राजा की मौत के बाद उसने जिस तरह से बिजनेस और हम सबको संभाला था, उसकी कल्पना नहीं की जा सकती। हमें समझ नहीं आ रहा कि उसने ऐसा कदम क्यों उठाया। पुलिस को इस मामले की गहराई से जांच करनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।" — विपिन रघुवंशी, राजा रघुवंशी के भाई
फिलहाल पुलिस ने अर्पित की पत्नी, भाई अभिषेक और अन्य करीबी रिश्तेदारों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शुरुआती तौर पर पारिवारिक कलह, मानसिक दबाव या व्यापारिक उलझनों जैसे तमाम बिंदुओं पर तफ्तीश की जा रही है। इंदौर पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से मौत के असली कारणों से पर्दा उठ सकेगा। इस दोहरे हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मानसिक स्वास्थ्य और समय पर अपनों से संवाद कितना महत्वपूर्ण होता है।








