बिहार विधान परिषद चुनाव से पहले जेडीयू में खुली बगावत
बिहार के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों उथल-पुथल मची हुई है। आगामी विधान परिषद (MLC) चुनावों की सरगर्मी के बीच सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर अंतर्कलह अब सड़कों पर खुलकर सामने आ गई है। मोकामा के ताकतवर जेडीयू विधायक अनंत सिंह ने पार्टी के आधिकारिक रुख के खिलाफ जाकर बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी ने अपने पुराने नेता और विधान पार्षद नीरज कुमार को मैदान में उतारा है, लेकिन अनंत सिंह ने पार्टी के इस फैसले को खुली चुनौती देते हुए प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह के पक्ष में मोर्चा संभाल लिया है।
इस सियासी ड्रामे ने राज्य की राजनीति का पारा अचानक काफी बढ़ा दिया है। एक तरफ जहां पार्टी नेतृत्व इस आंतरिक कलह को थमाने की कोशिशों में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ अनंत सिंह का यह आक्रामक तेवर राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। जानकारों का मानना है कि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का यह मुकाबला अब दो दलों की बजाय व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की लड़ाई में तब्दील हो चुका है, जिसका असर आने वाले दिनों में और गहरा सकता है।
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नवादा में खुली जीप पर सवार होकर अनंत सिंह ने मांगे वोट
शनिवार को नवादा जिले की सड़कों पर एक अलग ही नजारा देखने को मिला। मोकामा विधायक अनंत सिंह और जन सुराज समर्थित उम्मीदवार अनुज सिंह एक खुली जीप पर सवार होकर आशीर्वाद यात्रा पर निकले। वारिसलीगंज बाइपास स्थित शहीद चंदन सिंह चौक पर माल्यार्पण के बाद शुरू हुई यह यात्रा पकरीबरावां और कौआकोल जैसे ग्रामीण इलाकों से गुजरते हुए नवादा शहर के प्रजातंत्र चौक तक पहुंची। इस दौरान रास्ते में जगह-जगह ढोल-नगाड़ों के साथ समर्थकों ने उनका स्वागत किया।
खास बात यह रही कि इस प्रचार अभियान के दौरान अनंत सिंह पीले रंग का गमछा लहराते नजर आए, जिसे राजनीतिक हलकों में जन सुराज पार्टी की पहचान माना जाता है। मतदाताओं के बीच जनसंपर्क के दौरान अनंत सिंह ने बेहद आक्रामक अंदाज में अपील की और जनता से कहा कि वे मतपेटी (बैलेट बॉक्स) को पूरी तरह भर दें ताकि जेडीयू उम्मीदवार की जमानत तक जब्त हो जाए। उनके इस खुले विद्रोह ने पार्टी के भीतर हड़कंप मचा दिया है।
पुरानी रंजिश और टिकट बंटवारे को लेकर गहराया विवाद
आखिर अनंत सिंह अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ क्यों खड़े हो गए हैं, इसके पीछे पुरानी राजनीतिक रंजिश और व्यक्तिगत मतभेद बताए जा रहे हैं। अनंत सिंह का आरोप है कि जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार ने पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें हराने के लिए परदे के पीछे से साजिश रची थी। इसी बात की खुन्नस निकालते हुए विधायक ने अब एमएलसी चुनाव में नीरज कुमार की हार सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है।
दूसरी ओर, जेडीयू के भीतर इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना जा रहा है। हालांकि, अनंत सिंह का अपना तर्क है कि विधान परिषद के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्न (सिंबल) पर नहीं लड़े जाते हैं, इसलिए इसे पार्टी विरोधी गतिविधि नहीं कहा जाना चाहिए। इसके विपरीत, नीरज कुमार का दावा है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने उन्हें आधिकारिक रूप से एनडीए समर्थित उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा है और ऐसे में किसी भी नेता का विरोध सीधे तौर पर पार्टी अनुशासन के खिलाफ है।
"जनता ही मेरी मालिक है और हमेशा चुनाव में हमें विजयी बनाती है। इस बार भी अनुज सिंह को भारी मतों से जनता विजयी बनाएगी और विरोधी जमानत बचा नहीं पाएंगे।" — अनंत सिंह, मोकामा विधायक
पार्टी नेतृत्व की पैनी नजर और डैमेज कंट्रोल की कोशिशें
जेडीयू के भीतर मचे इस घमासान पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। राज्य में विधान परिषद की कुल आठ सीटों (चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र) के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होना है और 27 अक्टूबर को वोटों की गिनती की जाएगी। ऐसे महत्वपूर्ण समय में पार्टी के भीतर इस तरह की कलह चुनावी गणित को बिगाड़ सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, इस आंतरिक विवाद को सुलझाने के लिए पार्टी स्तर पर सक्रियता बढ़ गई है। कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने आवास पर पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र यादव के साथ एक लंबी उच्चस्तरीय बैठक की थी। इसके बाद वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को यह अहम टास्क सौंपा गया है कि वे अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच जारी इस तनातनी को किसी तरह खत्म करवाएं और डैमेज कंट्रोल करें।
महागठबंधन में भी बिखराव और दिलचस्प होता मुकाबला
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का यह चुनाव केवल जेडीयू की अंदरूनी कलह तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विपक्षी खेमे में भी बिखराव साफ नजर आ रहा है। आरजेडी ने इस सीट से दिलीप कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया है, तो वहीं कांग्रेस पार्टी ने भी असदुल्लाह खान को मैदान में उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय और बहुकोणीय बना दिया है। पटना, नालंदा और नवादा जिलों में फैले इस स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के वोटर काफी पढ़े-लिखे और जागरूक माने जाते हैं, जो पारंपरिक समीकरणों से हटकर मतदान करने के लिए जाने जाते हैं।
बैलेट पेपर (मतपत्र) के माध्यम से होने वाले इस चुनाव में हर एक वोट की कीमत बहुत ज्यादा है। ऐसे में अनंत सिंह की बगावत और जन सुराज उम्मीदवार के लिए उनका यह धुआंधार प्रचार चुनाव के समीकरणों को किस दिशा में ले जाएगा, यह तो 27 अक्टूबर को नतीजों के आने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा। फिलहाल, बिहार की सियासत में इस हाई-वोल्टेज ड्रामे ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।








